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शिशुओं के चिकित्सकीय देखरेख को ले दी जा रही प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

ऑब्जर्वर्सशीप ट्रेनिंग से अस्पतालों के एसएनसीयू का कार्य होगा सुदृढ़- डॉ केएन मिश्रा

शिशुओं के चिकित्सकीय देखरेख को ले दी जा रही प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद स्वास्थ्य कर्मिंयों को दिया गया प्रमाण- पत्र
दरभंगा. 16 फरवरी. शिशु विभाग में चल रहे 14 दिवसीय ऑब्जर्वर्सशीप के छठे बैच की ट्रेनिंग मंगलवार को समाप्त हो गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम डीएमसीएच के शिशु रोग विभाग में किया गया था. अंतिम दिन विभागाध्यक्ष डॉ केएन मिश्रा के कक्ष में प्रमाण पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया. प्रमाण पत्र करने वालों में बांका से आयी पूनम कुमारी एवं अंजली कुमारी, भागलपुर से आयी खुशबू कुमारी एवं एकता कुमारी, अररिया से आयी रीना कुमारी शामिल है. विभागाध्यक्ष डॉ केएन मिश्रा एवं डॉ ओमप्रकाश ने प्रशिक्षण दिया. चार दिवसीय एफबीएनसी ट्रेनिंग में एसएनसीयू में नवजात शिशु की देखभाल के बारे में जानकारी दी गयी. इसके तहत बताया गया कि नवजात बच्चों के शरीर के तापमान को सही रखना, उन्हें सही से दूध पिलाना, जरूरत पड़ने पर नस से पानी चढ़ाना और ग्लूकोज देना, सांस की दिक्कत होने पर ऑक्सीजन और सीपैप से उन्हें सांस देना, जॉन्डिस होने पर फोटोथेरेपी से जौंडिस कम करना, संक्रमण होने पर एंटीबायोटिक देने इत्यादि का प्रशिक्षण प्रशिक्षकों को दिया गया. इसके अलावा एसएनसीयू में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न चिकित्सकीय उपकरणों के बारे में भी बताया गया. मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ मिश्रा और अन्य शिक्षकों ने कहा कि प्रशिक्षण के उपरांत बिहार के सभी जिलों में एसएनसीयू का कार्य और सुदृढ़ हो सकेगा. मौके पर डॉ अशोक कुमार, डॉ एनपी गुप्ता, डॉ रिजवान हैदर, डॉ केकेपी महथा, डॉ अनिता कुमारी आदि मौजूद थे.

सांस की गति को जांचना जरूरी
प्रशिक्षण में डॉ के एन मिश्रा ने बताया कि जैसे ही बच्चा जन्म लेता है, डॉक्टर उसके मुंह और नाक से म्युकस और एमनियोटिक फ्ल्यूड को साफ करने के लिए सक्शन करते हैं, जिससे बच्चा खुद से सांस लेना शुरू कर सके. जन्म के एक मिनट और पांच मिनट के बाद सांसों की गति मापी जाती है. मौके पर प्रशिक्षण देते हुए डॉ अशोक कुमार ने बताया जन्म के एक घंटे बाद डॉक्टर शिशु के सांस की दर, तापमान, हृदय गति और मसल्स मूवमेंट के अलावा उसके रिएक्शंस, बाई बर्थ डिजीज और जॉन्डिस की भी जांच करते हैं. जन्म के 24 घंटे के भीतर शिशु को यूरीन और स्टूल जरूर डिस्चार्ज करना चाहिए. अगर इसमें जरा भी देर हो या फिर उसके यूरीन या स्टूल में गड़बड़ी दिखाई दे तो इस बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं.

पहला आहार मां का दूध
प्रतिभागियों को जानकारी देते हुए प्रशिक्षक डॉ ओम प्रकाश ने बताया बच्चे का सबसे पहला भोजन, प्रसव के बाद मां का पहला दूध होता है. यह थोड़ा-सा चिपचिपा और पीले रंग का होता है. मां के पहले दूध को कोलोस्ट्रकम कहते हैं. इसमें कईं एंटीबायोटिक्स होते हैं, जो बीमारियों से बच्चे को बचाते हैं. और बच्चे के रोग प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने में सहायता कर उसे विभिन्न इंफेक्शंस से बचाते हैं. बताया भरपूर मां का दूध नवजात शिशु के लिए एक सर्वोत्तम आहार माना जाता है.

16 फरवरी से शुरू होगा द्वितीय प्रशिक्षण
16 फरवरी से विभिन्न जिलों से आए हुए छह डॉक्टर और नर्स के सातवें बैच का प्रशिक्षण शुरू होगा. इसमें प्रशिक्षणार्थियों को नवजात के बेहतर चिकित्सा प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी जायेगी. ट्रेनिंग कार्यक्रम मेंविभिन्न जिलों से आये स्वास्थ्य कर्मी भाग लेंगे.

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