अस्पतालों में प्रशिक्षित डॉक्टर व नर्स होने से नवजात के मृत्यु दर में आयेगी कमी
-नवजात के जन्म के बाद का क्षण होता महत्वपूर्ण- डॉ केएन मिश्रा
-14 दिवसीय ऑब्जर्वरशिप के आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की हुई शुरुआत

दरभंगा, डीएमसीएच के शिशु विभाग के सेमिनार रूम में प्राचार्य डॉ के एन मिश्रा और अधीक्षक डॉ हरिशंकर मिश्रा ने 14 दिवसीय ऑब्जर्वरशिप के आवासीय प्रशिक्षण का संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। ऑब्जर्वरशिप के सातवें बैच में किशनगंज, मधेपुरा, नवादा और डीएमसीएच के डॉक्टर व नर्स प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उद्घाटन सत्र में डॉ मिश्रा ने कहा कि नवजात के जन्म के बाद का क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। कहा कि नवजात के जीवन का पहला मिनट, पहला घंटा, पहला दिन, पहला सप्ताह, पहला महीना जीवन के किसी भी अन्य समय से ज्यादा संवेदनशील होता है। सूबे में पैदा होने वाले जीवित एक हजार बच्चों में से 25 अपना पहला महीना पूरा नहीं कर पाते और इससे कई गुना ज्यादा बच्चे अपने जीवन के उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते जो ईश्वर ने उन्हें प्रदान किया है। कहा कि इसको टाला जा सकता है। अगर प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्स विभिन्न अस्पतालों में उपलब्ध हों इसके मद्देनजर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और बिहार सरकार ने प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों के साथ हर जिले और मेडिकल कॉलेज में एसएनसीयू खोलने का निर्णय लिया और काफी हद तक सफलता पाई है।
शिशु मृत्यु दर में आयेगी कमी –
अधीक्षक डॉ शंकर मिश्रा ने कहा कि एसएनसीयू के कारण ही बिहार में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। विभागीय निर्देश से अब 2030 तक नवजात मृत्यु दर को 12 से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है। मौके पर डॉ अशोक कुमार ने कहा चार दिनों की एफबीएनसी ट्रेनिंग के बाद 14 दिन यहां के कार्य को देखकर सीख कर जिलों के एसएनसीयू में लागू करना है। प्रशिक्षणार्थियों को अपने मॉड्यूल को हमेशा साथ रखना है, जिससे उन्हें ऑब्जर्वरशिप के कार्यक्रम को सीखने में सुविधा हो। कार्यक्रम में डॉ मोहन केजरीवाल एवं डॉ रिजवान हैदर ने भी अपने विचार रखे। बतौर प्रशिक्षक डॉ कृपा नाथ मिश्रा एवं डॉ ओम प्रकाश ने चिकित्सा कर्मियों को आज पहले दिन नवजात शिशु के पुनर्जीवन का प्रशिक्षण दिया।
सभी अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा सुविधा-
डॉ ओम प्रकाश ने कहा कि शिशु के बेहतर चिकित्सा के लिये सभी प्रखंडों में सरकारी अस्पताल मौजूद हैं। इसका लाभ आमजन को उठाना चाहिये। बच्चों में किसी प्रकार की शारीरिक समस्या होने पर अस्पताल में संपर्क किया जा सकता है। कहा कि ऐसा देखा गया है कि अभिभावक बच्चों को अस्पताल लाने में देरी करते हैँ। इससे बच्चों के जीवन को खतरे में डाल दिया जाता है। यह उचित नहीं है। इस परिस्थिति को बदलने के लिये सही समय पर नवजात को अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। इससे किसी प्रकार की समस्या को टाला जा सकता है।
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