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हर पीएचसी का हो अपना सर्जन, केयर इंडिया डॉक्टरों को मिनी लैप पद्धति का दे रहा प्रशिक्षण

अजित कुमार सिंह की रिपोर्ट

हर पीएचसी का हो अपना सर्जन, केयर इंडिया डॉक्टरों को मिनी लैप पद्धति का दे रहा प्रशिक्षण

•महिलाओं का बंध्याकरण में ‘मिनी लैप तकनीक’ का होता है प्रयोग

-11मार्च तक दूसरे बैच को दिया जायगा प्रशिक्षण

•आपरेशन के 24 घंटे बाद ही मरीज को दे दी जाती है छुट्टी
•परंपरागत आपरेशन की तुलना में यह तकनीक अधिक सरल और सुरक्षित है।

मधुबनी परिवार नियोजन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग हर स्तर पर प्रयास कर रहा है। इसी उद्देश्य की पूर्ति को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर पीएचसी में एक सर्जन हो ताकि बंध्याकरण कराने वाली महिला एवं पुरुष नसबंदी कराने वाले पुरुष को किसी भी समय किसी भी पीएचसी में ऑपरेशन किया जा सक।. इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए केयर इंडिया के द्वारा महिलाओं के बंध्याकरण में प्रयोग होने वाले तकनीक ‘मिनी लैप ‘ का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण सदर अस्पताल कैंपस में केयर इंडिया की डॉ सुनीता भागज्ञा के द्वारा दिया जा रहा है। प्रशिक्षण 28 फरवरी से शुरू होकर 11 मार्च तक दिया जाएगा। विदित हो कि इससे पूर्व भी एक प्रशिक्षण 16 फरवरी से 27 फरवरी तक का प्रथम बैच को दिया गया। प्रशिक्षण में डॉ भागज्ञा ने बताया कि यह बंध्याकरण की तकनीक है। बताया कि इस तकनीक से बंध्याकरण आपरेशन करना बहुत ही आसान हो गया है। परंपरागत आपरेशन में मरीज को कई घंटों तक बेहोश रखने के लिए ईथर की डोज दी जाती था । वहीं आपरेशन के लिए बड़ा चीरा भी लगाना पड़ता था। इस पद्धति से ऑपरेशन के बाद महिला मरीजों को चौबीस घंटे के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है। वहीं पुरुष नसबंदी के आधा घंटा बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि मिनी लैप का अर्थ ही है मामूली चीरा (एक से डेढ़ इंच ) नाभी के निकट चीरा लगाकर आसानी से बंध्याकरण आपरेशन किये जाते हैं। महिला 48 घंटे के बाद हल्के-फुल्के कार्य कर सकती है। वह सातवें दिन के बाद सामान्य तरीके से कार्य कर सकती है। उन्होंने बताया कि इस आपरेशन में जोखिम जैसी कोई बात नहीं है और न ही लंबी बेहोशी की नौबत। आपरेशन के 24 घंटे बाद ही मरीज को घर जाने की अनुमति दे दी जाती । हालांकि आपरेशन के बाद मरीजों को चिकित्सक के परामर्श के अनुसार सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता में यह तकनीक अहम भूमिका निभा रहा है।
सभी पीएचसी में मिलती है सुविधा:
केयर इंडिया की परिवार नियोजन समन्वयक सुरभि ने बताया यह सुविधा सारे पीएचसी में उपलब्ध है। अगर किसी पीएससी में सर्जन उपलब्ध नहीं होते हैं तो वैसे स्थिति में केयर इंडिया द्वारा वैसे पीएचसी विजिटर प्रोवाइडर (सर्जन) उपलब्ध कराकर बंध्याकरण कराया जाता है व एमबीबीएस डॉक्टर एवं स्टाफ नर्स को 12 दिनों का प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित किया जाता है। स्वास्थ विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक फैसिलिटी में एक इन हाउस सर्जन उपलब्ध हो जिससे किसी भी वक्त महिला का बंध्याकरण किया जा सके।

गर्भ-निरोधक उपाय उपलब्ध है अस्पतालों में:
एसीएमओ डॉ आर के सिंह ने बताया स्वास्थ विभाग के पास परिवार नियोजन के स्थायी एवं अस्थायी साधन उपलब्ध हैं । स्थायी साधनों में मिनीलैप एवं महिला नसबंदी की सुविधा उपलब्ध है। बच्चों में अंतराल एवं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कॉपर टी, गर्भ-निरोधक गोली(माला-एम एवं माला-एन), कंडोम एवं इमरजेंसी कंट्रासेपटीव पिल्स उपलब्ध है।

इन्हें दिया जा रहा प्रशिक्षण:
मिनी लैप का प्रशिक्षण डॉ अयाची प्रियदर्शनी ,चिकित्सा पदाधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विस्फी, डॉ सुरेश प्रसाद ,चिकित्सा पदाधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कलुआही, प्रीति कुमारी स्टाफ नर्स /एएनएम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र विस्फि, पकुसुम कुमारी स्टाफ नर्स एएनएम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कलुआही को दिया जा रहा है।

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