प्रोग्रैमेटिक मैनेजमेंट ऑफ़ टीबी प्रीवेंटिव ट्रीटमेंट योजना के माध्यम से टीबी उन्मूलन सम्भब – सिविल सर्जन

दरभंगा जिला यक्ष्मा केंद्र एबं डब्ल्यूजे क्लिंटन फाउंडेशन के सहयोग से राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत सीएमई का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन अपर मुख्य चिकित्सा पदधिकारी डॉ एसएस झा ने किया। इस अबसर पर उन्होंने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुआ कहा कि भारत सरकार की राष्ट्रीय रणनीति 2017-25 के अनुसार टीबी उन्मूलन के लिए लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रोग्रैमेटिक मैनेजमेंट ऑफ़ टीबी प्रीवेंटिव ट्रीटमेंट (पीएमटीपीटी) योजना के अंतर्गत लेटन टीबी इंफेक्शन वाले मरीज को चिह्नित कर उन्हें टीपीटी से जोड़ा जायेगा। ताकि उनके शरीर के अंदर पनप रही बैक्टेरिया को एक्टिब टीबी होने से पहले समाप्त कर दिया जाए। जिससे टीबी फैलाब के चेन को तोड़ने में मदद मिलेगी जो टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में काफी सहायक होगा। उन्होंने इस अवसर पर सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को कार्यक्रम में सहयोग करने की अपील की।
11 ज़िला में चलाया जा रहा कार्यक्रम-
इस अबसर पर जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ सतेंद्र कुमार झा ने बताया कि यह कार्यक्रम पूरे बिहार के 11 जिलों में चलाया जा रहा है । जिसमें 5 जिला में इस कार्यक्रम का क्रियान्वन वर्ल्ड विज़न द्वारा किया जा रहा है । दरभंगा जिला में इसकी शुरुआत अक्टूबर 2021 में की गयी। इस कार्यक्रम के तहत एलटीबीआई काउंसलर के द्वारा सभी पलोमरी टीबी के घर में जाकर कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग कर वैसे मरीज को चिह्नित किया जा रहा है जिनमे एक्टिब टीबी का कोई लक्षण नहीं है। तत्पश्चात वैसे मरीज को टीपीटी से जोड़क़र उन्हें 6 माह आइसोनियाजेड की दवा खिलायी जाती है। ताकि लेटन टीबी इंफेक्शन को समाप्त किया जा सके। उनके द्वारा बताया गया कि माह अक्टूबर 2021 से फरवरी 2022 तक 979 मरीज की कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग की गयी जिसमें 5 साल से नीचे का 344 औ 5 साल से ऊपर का 2575 कुल 2909 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इस स्क्रीनिंग के दौरान कुल 2862 ऐसे कॉन्ट्रेक्ट मिले जिसमें एक्टिव टीबी के कोई लक्षण नहीं थे। जिसमें कुल 1325 लोगों को टीपीटी से जोड़ा गया और शेष को जल्द ही टीपीटी से जोड़ा जायेगा।
लगभग 35-40 करोड़ भारतीय आबादी में लेटेन टीबी इंफेक्शन-
इस अवसर पर मुख्य वक्ता वर्ल्ड विज़न के प्रोजेक्ट डाइरेटर अमरजीत प्रभाकर द्वारा सरकार के प्रोग्रैमेटिक मैनेजमेंट ऑफ़ टीबी प्रीवेंटिव ट्रीटमेंट योजना की गाइडलाइन के बारे में चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत सभी पलोमरी टीबी मरीज को चिह्नित कर उन्हें टीपीटी से जोड़ना है ताकि लेटन टीबी इंफेक्शन को समाप्त किया जा सके। उन्होंने इस अबसर पर डब्ल्यूएचओ के एक अध्ययन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में विश्व स्तर पर तपेदिक संक्रमण (टीबीआई) का सबसे अधिक अनुमानित बोझ है। लगभग 35-40 करोड़ भारतीय आबादी में लेटेन टीबी इंफेक्शन है। जिनमें से 26 लाख सालाना तपेदिक (टीबी) रोग विकसित करने का अनुमान है। जिसमे टीपीटी के बाद टीबी रोग विकसित होने का जोखिम लगभग 60% कम हो जाता और एचआईवी (पीएलएचआईवी) के साथ रहने वाले लोगों में यह कमी 90% तक हो सकती है, जो टीबी उन्मूलन के लिए काफी सहायक है। उनके द्वारा बताया गया की कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग के दौरान टीबी मरीज के सम्पर्क में रहने वाले सभी 5 साल के ऊपर के लोगों को एक्सरे करना जरुरी है। ताकि टीबी संक्रमण के बारे में पता चल सके और इस प्रक्रिया में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सहयोग की अपील की। मंच का संचालन डिस्ट्रिक्ट लीड चन्दन कुमार ने किया । इस अबसर पर एस टी एल एस गिरजा शंकर झा भी उपस्थित हुए एबं कार्यक्रम के संचालन में काफी सहयोग किया।
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