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पोखर बचाओ, घाट बनाओ को लेकर आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी

पोखर बचाओ, घाट बनाओ को लेकर आमरण अनशन का तीसरा दिन

 

मिथिला स्टूडेंट यूनियन का कल दिनांक 28 मार्च से नगर निगम के वार्ड 40 में पोखर बचाओ घाट बनाओ को लेकर आमरण अनशन पर यूनियन के तीन सेनानी अविनाश कुमार सहनी, कृष्ण भावक और उदय नारायण झा बैठे है। मौके पर विश्वविद्यालय संगठन मंत्री दिवाकर मिश्रा ने कहा की आज पूरे देश में पोखर और तालाबों के समक्ष अस्तित्व का संकट खड़ा हुआ है। अनेकानेक तालाब सूखकर सिमट गए हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश में लगभग 24 लाख तालाब थे, जिनमें से 20 लाख तालाब गायब हो चुके हैं। यहां दरभंगा के भू-माफियाओं, राजनेता तथा अधिकारियों के गठजोड़ ने मिलकर तालाबों का पानी ही नहीं पिया, अपितु महर्षि अगस्त्य से भी आगे बढ़कर पानी सहित उनके अस्तित्व को ही निगल लिया है। जब तक तालाबों की व्यवस्था का कार्य समाज के हाथ में था, समाज के धनिक वर्ग द्वारा समय-समय पर नए-नए तालाबों का निर्माण एवं पुराने तालाबों की खुदाई कराकर उनके संरक्षण-संवर्धन किया जाता रहा है। किंतु पीडब्ल्यूडी विभाग के बनते ही यह कार्य शासन द्वारा राज्यों के पीडब्ल्यूडी विभाग सौंप दिया गया। इसका जिम्मा सिंचाई विभाग के हाथों में भी दिया जाता रहा है। दोनों विभागों की खींचतान का असर हुआ कि कोस-कोस में तालाबों से पटी देश की भूमि तालाब रहित हो रही है। यह जो पोखर है वो दरभंगा निगम के अंतर्गत वार्ड 40 में आता है। मिथिला स्टूडेंट यूनियन के संस्थापक सदस्य अनूप मैथिल ने कहा की आज देश का तीन चौथाई भाग पेयजल की समस्या से जूझता नजर आता है। देष के लगभग 70 प्रतिषत घरों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। लोग प्रदूषित पानी पीने के लिए बाध्य हैं, जिसके चलते लगभग 4 करोड़ लोग प्रतिवर्ष बीमार होते हैं। देश में प्रतिवर्ष लगभग 4000 अरब घन मीटर पानी वर्षा के जल के रूप में प्राप्त होता है किंतु उसका लगभग 8 प्रतिशत पानी ही हम संरक्षित कर पाते हैं, शेष पानी नदियों, नालों के माध्यम से बहकर समुद्र में चला जाता है। हमारी सांस्कृतिक परंपरा में वर्षा के जल को संरक्षित करने पर विषेश ध्यान दिया गया था, जिसके चलते स्थान-स्थान पर पोखर, तालाब, बावड़ी, कुआं आदि निर्मित कराए जाते थे, जिनमें वर्षा का जल एकत्र होता था तथा वह वर्ष भर जीव-जंतुओं सहित मनुष्यों के लिए भी उपलब्ध होता था। किंतु अब वैज्ञानिक प्रगति के नाम पर इनके अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। अनशनकारी अविनाश सहनी, उदय नारायण झा, कृष्ण कुमार ने कहा की हमलोग परसो से ही अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे है, लेकिन अभी तक जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन हमारे सुधि लेने भी नही आए है। लगातार इस गर्मी में हमारे साथियों का तबियत बिगड़ रहा, ये लोग अन्न जल त्याग के दो दिनों से यहां बैठे है। गर्मी के वजह से शरीर में पानी की कमी होने लगी है लेकिन एक समुचित स्वास्थ्य व्यवस्था हमलोगो को नही दिया गया है। बहादुरपुर प्रखंड उपाध्यक्ष नीरज भारद्वाज ने कहा की अगर अविलंब इस पोखर का सौंदर्यकरण नही किया जाता है तब तक यह अनशन जारी रहेगा। जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन जल्द इस धारणा स्थल पर स्वास्थ्य सेवा बहाल करे, अगर हमारे साथियों को कुछ भी होता है, तो हमलोग नगर निगम घेरने का काम करेंगे।

मौके पर: राजू सहनी, जय प्रकाश झा, भगत सहनी, कृष्ण पासवान, उज्ज्वल मिश्रा, अनीश चौधरी, प्रकाश सहनी, अभिषेक झा, प्रिंस कुमार, कृत राज, मदन सहनी, विशाल कुमार, मो साहेब, रमन कुमार, गोलू कुमार, साहिल कुमार, राजू पासवान, विक्रम कुमार, आयुष कुमार, आलोक कुमार, कन्हैया कुमार, सोयम कुमार, सूरज कुमार, अमर सहनी, भोला कुमार, विजय सहनी, अनीश कुमार आदि लोग 24 घंटे उपस्थित थे।

 

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