घर- घर सर्वे कर आशा कार्यकर्ता बच्चों को दे रही जेई का टीका
-जिला में तीन सौ से अधिक आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया टास्क
-विभागीय निर्देश से छूटे हुये नौ माह से 10 साल तक के बच्चों को किया जा रहा चिह्नित
-शत प्रतिशत टीकाकरण के लिये डीआईओ ने चिकित्सा पदाधिकारियों को दिये निर्देश
दरभंगा स्वास्थ्य विभाग के निर्देश से जिला में पिछले सप्ताह से जेई से बचाव के लिये टीकाकरण किया जा है। इसमें करीब तीन सौ से अधिक आशा कार्यकर्ताओं को लगाया गया है। वो घर- घर जाकर जेई वन एवं टू टीकाकरण से वंचित नो माह से 10 वर्ष तक के बच्चों को चिह्नित कर टीकाकृत कर रही हैं। विदित हो कि बीते 24 मार्च को राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने सिविल सर्जन को पत्र लिखकर नियमित टीकाकरण के तहत जेई वन व टू टीका से वंचित लाभार्थियों को प्रतिरक्षित करने का आदेश दिया है। इसमें कहा गया है कि जेई के टीकाकरण में गिरावट दर्ज की गयी है। साथ ही कोरोना संक्रमण के कारण नियमित टीकाकरण में भी काफी गिरावट आयी है। इसके मद्देनजर जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिये छूटे हुये बच्चों को टीकाकृत कराना जरूरी है। इसके लिये विभाग ने सर्वे के माध्यम से सूची तैयार करने को कहा है। इस आधार पर टीकाकरण अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।
बैठक में डीआइओ ने दिये निर्देश-
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के तहत छूटे हुये बच्चों को जेई टीका देने के लिये डीआईओ डॉ एके मिश्रा ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को दिशा- निर्देश दिया है। इसमें कहा गया है कि आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा सर्वे के आधार पर टीकाकरण अभियान चलाया जाय। इस संबंध मे जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को कहा है कि आशा कार्यकर्ताओं की ओर से किये जा रहे सर्वे में यह ध्यान रखा जाय कि सर्वे का काम सही से हो रहा है। इसे लेकर एमओआईसी, बीएचएम व बीसीएम को निर्देश दिये गये हैं।
जेई से बचाव करता है टीका:
डीआईओ ने कहा है कि जापानीज इंसेफेलाइटिस (जेई) से बचाव में इस टीके का बड़ा महत्व होता है। जेई का टीका लगवाने के बाद बच्चे पर इस बीमारी के हमले का खतरा समाप्त हो जाता है। टीकाकरण के जरिये हम अपने बच्चों को जेई से होने वाली मौत और विकलांगता के खतरे से बचा सकते हैं।
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