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बिहार = समस्तीपुर फाइलेरिया उन्मूलन मुहिम को ले स्वास्थ्य प्रतिबद्ध

फाइलेरिया उन्मूलन मुहिम को ले स्वास्थ्य प्रतिबद्ध

•नाईट ब्लड व नुक्कड़ नाटक का लिया जायगा
•राज्य सलाहकार फाइलेरिया डॉ. अनुज सिंह रावत ने लिया जायजा
•जिले के 8 गांवों में किया गया था रात्रि रक्तपत संग्रह व जागरूकता हेतु नाटक का हुआ था आयोजन

समस्तीपुर  स्वास्थ्य विभाग फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है । इसी कड़ी में जिले के 8 प्रखंडों के 8 गांव में रात्रि रक्त पटसंग्रह व इन गांव में नुक्कड़ नाटक का आयोजन कर लोगों को फाइलेरिया उन्मूलन का संदेश दिया गया था । हाल ही में कार्यक्रम समाप्ति के उपरांत फाइलेरिया के स्टेट कंसलटेंट डॉ अनुज सिंह रावत, अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी पटना के कार्यालय से आये पदाधिकारी ने जायजा लिया. टीम ने विभाग द्वारा किए गए कार्यों का सराहना किया तथा टीम के द्वारा बताया गया कि बताया कि नाईट ब्लड सर्वे की मदद से लोगों के रक्त में फाइलेरिया के परजीवी की मौजूदगी का पता लगाया जाता है. इसके बाद आवश्यकता पड़ने पर फाइलेरिया उन्मूलन के लिए आवश्यक दवा सेवन के लिए अभियान चलाया जाता है. अभियान के तहत अल्बेंडोजोल और डीईसी की दवा दी जाती है. फाइलेरिया से संक्रमित हो जाने पर लंबे समय तक इलाज चलने और दवा की खुराक पूरी करने पर रोगी सामान्य जीवन जी सकता है. दवाई की खुराक पूरी नहीं करने पर यह रोग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए नुकसानदायक है. सभी सरकारी अस्पताल पर डीईसी दवा नि:शुल्क उपलब्ध है जिसे 5 सालों तक साल में एक बार लेना जरूरी है.

इन प्रखंडों में हुआ था नाइट ब्लड सर्वे :

डीएमओ डॉ विजय ने राज्य सलाहकार डॉ अनुज को बताया कि जिले के 8 प्रखंड के 8 गांव में लोगों का नाइट ब्लड सर्वे किया गया । सर्वे सम्बंधित प्रखंड में 11 से 14 मई तक हुआ था । जिसमें कल्याणपुर प्रखंड के ध्रुवगामा, पूसा के गंगापुर, मोरवा के महमदपुर,समस्तीपुर के बारह पत्थर,दलसिंहसराय के नगरगामा, पटोरी के सिरदिलपुर,सरायरंजन के सरायरंजन, ताजपुर के आधारपुर शामिल रहे ।

स्टेट कंसलटेंट डॉ अनुज कुमार रावत ने बताया, नाइट ब्लड सर्वे व नुक्कड़ नाटक के दौरान फाइलेरिया से बचाव से संबंधित आवश्यक और जरूरी जानकारी भी दी गई। जिसमें संक्रमित मरीजों को किन-किन बातों का ख्याल रखते हुए इलाज कराना है। फाइलेरिया से बचाव के लिए क्या-क्या सावधानी बरतनी है। इसके कारण और लक्षण समेत अन्य जरूरी जानकारी दी गई। वहीं, उन्होंने बताया, फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसका कोई पर्याप्त इलाज संभव नहीं है। लेकिन, इसे शुरुआत में ही पहचान करते हुए रोका जा सकता है। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति को फाइलेरिया ग्रसित अंगों को पूरी तरह स्वच्छ पानी से साफ करना चाहिए। साथ ही सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही डीईसी व अल्बेंडाजोल की दवा का नियमित सेवन करना चाहिए। वहीं, उन्होंने कहा, फाइलेरिया मुख्यतः मनुष्य के शरीर के चार अंगों को प्रभावित करता है। जिसमें पैर, हाथ, हाइड्रोसील एवं महिलाओं का स्तन शामिल है। हाइड्रोसील के अलावा फाइलेरिया संक्रमित अन्य अंगों को ऑपरेशन द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता है। संक्रमित व्यक्ति को समान्य उपचार के लिए किट उपलब्ध कराई जाती है, जबकि हाइड्रोसील फाइलेरिया संक्रमित व्यक्ति को मुफ्त ऑपरेशन की सुविधा मुहैया कराई जाती है।

– फाइलेरिया क्या है ?
– फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है।
– किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है।
– फाइलेरिया के लक्षण हाथ और पैर में सूजन (हाँथीपाँव) व हाईड्रोशील (अण्डकोष में सूजन) है।
– किसी भी व्यक्ति को संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में 05 से 15 वर्ष लग सकते हैं।

– फाइलेरिया से बचाव के उपाय :
– सोने के समय मच्छरदानी का निश्चित रूप से प्रयोग करें।
– घर के आसपास गंदा पानी जमा नहीं होने दें।
– एल्बेंडाजोल व डीईसी दवा का निश्चित रूप से सेवन करें।
– साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें।
सीफार के एस.पी.एम. रणविजय जी ने भी जिला फाईलेरिया पदाधिकारी से चर्चा करके नुक्कड़ नाटक के संदर्भ में चर्चा किया व आश्वासन दिया कि आने वाले एम डी एम कार्यक्रम में हमारी पूरी टीम का महत्तम सहयोग प्रदान किया जाएगा और राज्य से फाईलेरिया उन्मूलन हेतु जो भी दिशा निर्देश प्रदान किया जाएगा उनका अनुपालन किया जायेगा ।

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