
पति की लंबी आयु और उनके सुखमय जीवन के लिए सुहागिन महिलाएं कई तरह के व्रत रखती हैं। उन्हीं व्रतों में से एक वट सावित्री का व्रत है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ये व्रत हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है। वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी और वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करती हैं। मान्यता है कि वट वृक्ष की पूजा लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य देने के साथ ही हर तरह के कलह और संतापों का नाश करने वाली होती है। हिंदू धर्म में वट वृक्ष या बरगद के पेड़ को विशिष्ट माना गया है। कई व्रत और त्योहार में बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है, इसमें से वट सावित्री की पूजा प्रमुख है। तो चलिए आज जानते हैं कि आखिर वट वृक्ष की पूजा क्यों की जाती है और क्या है इसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व है।
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