विषयगत ज्ञान के साथ उसकी सहज एवं सरल अभिव्यक्ति महत्वपूर्ण : प्रो दिलीप कुमार चौधरी
सीएम साइंस कॉलेज में चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को हुआ समापन

सीएम साइंस कॉलेज में चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह में महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए बताया कि निरंतर बदलते समय के परिप्रेक्ष्य में महाविद्यालय में छात्रों के लर्निंग की प्रक्रिया को समुन्नत बनाने के लिए समुचित बदलाव किए जा रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों को अपनी प्रेजेंटेशन स्किल बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि भविष्य में विषयगत अर्जित ज्ञान के साथ-साथ उस ज्ञान की सहज एवं सरल अभिव्यक्ति अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इससे पहले दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्र में चार विषय विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान दिए। पहला व्याख्यान अमेरिका के पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोध विशेषज्ञ डॉ सौरभ सिंह ने एडवांस मेटेरियल एंड नैनोसाइंसेज के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि किस तरह नैनोमेटेरियल और एडवांस मेटेरियल वर्तमान समय में मानव जीवन को सहज और आसान बनाने में हर क्षेत्र में अपना अहम योगदान दे रहे हैं। दूसरे व्याख्यान में सीएसआईआर अंतर्गत सीआईएफएमआर धनबाद के वैज्ञानिक डॉ विक्रम सिंह ने प्रतिभागियों को स्पेक्ट्रोस्कोपी, नैनो मेटेरियल एवं एडवांस मेटेरियल के सिंथेसिस में स्पेक्ट्रोस्कोपी के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। अपने व्याख्यान के दूसरे भाग में उन्होंने अपने शोध कार्य का हवाला देते हुए बताया कि किस तरह क्वांटम डॉट्स एवं कार्बन क्वांटम ट्यूब विभिन्न क्षेत्रों के एडवांस मेटेरियल के सिंथेसिस में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। तीसरे व्याख्यान में दिल्ली विश्वविद्यालय के देशबंधु कॉलेज की प्रो रूबी मिश्रा ने सौंदर्य प्रसाधनों एवं दैनिक खाद्यान्नों में विषैले रसायनों के प्रभाव से होने वाले दुष्प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने व्याख्यान में बताया कि किस प्रकार से छोटे-छोटे रसायन हमारे रोजमर्रा के उपयोग की चीजों को बनाने में सहायक साबित हो रहे हैं। चौथे व्याख्यान में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी रसायनशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ विकास कुमार सोनू ने यूवी विजिबल स्पेक्ट्रोस्कॉपी टेक्निक की चर्चा करते हुए उसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया। पहले तकनीकी सत्र की अध्यक्षता पीजी रसायनशास्त्र विभाग के वरीय शिक्षक प्रो अब्दुस्समद अंसारी ने की।
तकनीकी सत्र के बाद स्नातक एवं स्नातकोत्तर के प्रतिभागी छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों द्वारा पोस्टर प्रेजेंटेशन दिए गए। स्नातकोत्तर रसायन शास्त्र विभाग के प्रो संजय कुमार चौधरी एवं प्रो प्रेम कांत झा ने इस सत्र के निर्णायक मंडल के सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निर्णायक मंडल के सदस्यों द्वारा पोस्टर प्रेजेंटेशन के विभिन्न पहलुओं पर बारीकी से मूल्यांकन करते हुए इस सत्र में स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग की अदिति कृष्णा को प्रथम, सीएम साइंस कॉलेज की रिद्धि ठाकुर को द्वितीय एवं मेजवान काॅलेज के राहुल तथा अभिषेक को संयुक्त रुप से तृतीय पुरस्कार के लिए चयन किया गया। ओरल प्रेजेंटेशन कोटि में एमआरएम कॉलेज की अनुपमा अंजलि, स्नातकोत्तर रसायनशास्त्र विभाग के पवन कुमार सदा एवं सीएम साइंस कॉलेज के नौशीन अंबर को क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के लिए चुना गया। इस सत्र के आयोजन में रसायन शास्त्र विभाग के सभी शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों ने भरपूर सहयोग किया। संगोष्ठी के संयोजक डॉ विश्व दीपक त्रिपाठी के संचालन में आयोजित समापन समारोह में धन्यवाद ज्ञापन संगोष्ठी की सह संयोजिका डॉ निधि झा ने किया।
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रसायन पर आधारित रंगोली ने सभी का ध्यान खींचा
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सीएम साइंस कॉलेज में चल रहे दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में महाविद्यालय के पीजी रसायन शास्त्र विभाग के छात्रों द्वारा बनाई गई रंगोली आगंतुकों के विशेष आकर्षण में रहे। इस रंगोली में नैनो पूतियंस नाम के बने हुए स्ट्रक्चर पूरी तरह मानव आकृति सा दिखते हैं। संगोष्ठी के संयोजक डॉ विश्व दीपक त्रिपाठी ने बताया कि इस स्ट्रक्चर को पहली बार वर्ष 2002 में अमेरिका की प्रयोगशाला में तैयार किया गया। विभाग के प्रतिभागी छात्र-छात्राओं आरती, सायमा नाज, अफसाना, राजीव, सचिन और मनमोहन ने इस स्ट्रक्चर को मिथिला की धरोहर रंगोली के पुट का इस्तेमाल कर बनाया, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफलता हासिल की।
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