कुष्ठ रोगियों को नवजीवन प्रदान कर रही आशा
•अभी तक
दर्जनों कुष्ठ रोगियों का जान बचा चुकी हैं
•शुरुआती दिनों में ससुर भी बहू के स्वास्थ्य संबंधी कार्य के कारण घृणा करते थे
•कुष्ठ रोग लाइलाज नहीं,कुष्ठ रोगियों से न करें भेदभाव
समस्तीपुर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कुष्ठ रोगियों के प्रति सेवा भाव से प्रेरणा लेकर अब भी कई स्वास्थ्यकर्मी /समाजसेवी इस कार्य में जुटे हैं। जिले के सरकारी अस्पतालों में कुष्ठ रोगियों की सेवा और इजाज किया जा रहा है। यहां कुष्ठ रोगियों का उपचार, ऑपरेशन और ठीक होने के बाद उन्हें समाज की मुख्य धारा से पुनः जोड़ने के लिए मनोबल बढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में कई स्वास्थ्य कर्मी भी ग्रामीण स्तर पर कुष्ठ उन्मूलन के लिए कार्य कर रहे हैं। समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड के कापन गांव के आशा फैसिलिटेटर कुमारी कल्याणी अब तक दर्जनों कुष्ठ रोगियों की जान बचा चुकी हैं । जिनमें पलटन महतो, रामबालक महतो, माया देवी, हरिहर साह, कल्लू साह, धनेश्वरी देवी, रंजू देवी, राजेश ठाकुर, सुनील कुमार आदि शामिल हैं। शुरुआत के दिनों आशा के लिए बहुत ज्यादा चुनौती भरे थे।. बहुत सारे कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीज उनके घर पर एक आशा की उम्मीद लेकर आते थे ,लेकिन ससुर को यह कार्य बिल्कुल पसंद नहीं था। पति का सहयोग हमेशा मिला जिसकी बदौलत आज वह समाज की दशा और दिशा दोनों बदल रही है। कल्याणी कुष्ठ से ग्रसित लोगों का घाव साफ करने, उनके मल मूत्र साफ करने में संकोच नहीं करती हैं । उसे वह सेवा भाव के रूप में कर रही हैं। इसे वह अपना कर्तव्य मानती हैं । गांव के ही धनेश्वरी देवी नाम की एक महिला जो कुष्ठ रोगी हैं और उनका पति भी टीबी रोग से ग्रसित है। वह अपना गुजर-बसर भी सही तरीके से नहीं कर पा रही हैं तो हॉस्पिटल आने-जाने का खर्च कहां से संभव हो सकता है। वह गांव के तालाब के तटबंध पर रहकर किसी तरह अपना जीवन बसर कर रही है। परंतु कल्याणी ने उसे अपने घर लाकर खाना-पीना खिलाया। उपचार के क्रम में समय-समय पर प्राथमिक उपचार करती रही। यहां तक अपना वस्त्र उसको प्रदान की ताकि वह इस समाज में अच्छी तरह से जी सके। नियमित रूप से सरकारी अस्पताल अपने खर्चे पर लेकर आती और जाती रही हैं । आज बहुत सारे कुष्ठ रोगी कुमारी कल्याणी को मदर टेरेसा का स्वरूप मानते और वह अपने कार्य में लगातार तत्पर हैं। वह अपने जीवन का उद्देश्य भी लोगों की सेवा को बना चुकी है । पूर्व में भी बिहार सरकार के द्वारा उन्हें स्वास्थ्य विभाग में बेहतरीन कार्य करने हेतु सम्मानित किया जा चुका है।
कुष्ठ रोग लाइलाज नहीं,कुष्ठ रोगियों से न करें भेदभाव :
सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी ने बताया कि कुष्ठ रोग लाइलाज नहीं है। कुष्ठ रोग का पूर्णत: उपचार सम्भव है। कुष्ठ रोगियों को स्पर्श करने से कुष्ठ रोग नहीं होता है। कुष्ठ रोगियों से भेदभाव न करें, उनके साथ समान व्यवहार और बर्ताव करें आदि के बारे में समय-समय पर आशा, एएनएम और आनंगबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा सभी को जानकारी भी दी जा रही है। डॉ चौधरी ने बताया इस रोग के संक्रमण का कारण रोगाणु या बैक्टीरिया जिसे माईकोबैक्टीरियम लेप्री कहा जाता है, संक्रमण का कारण बनता है। कुष्ठ रोग का उपचार संभव है लेकिन इलाज में देरी होने से विकलांगता हो सकती है। यह संक्रमण रोगी की त्वचा को प्रभावित करता तथा रोगी की तंत्रिकाओं को क्षति पहुंचाता है। यह रोग आँख और नाक में समस्याएं पैदा कर सकता है। कुष्ठ रोग से डरे नहीं, कुष्ठ रोगियों के साथ सामान्य रोगियों की तरह व्यवहार करें। वहीं कुष्ठ रोगी के साथ उठना, बैठना, खाना-पीना एवं सहज व्यवहार करें।
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