जिला के आठ अस्पतालों के ओटी व लेबररूम को किया जायेगा अपग्रेड
-लक्ष्य के मानक के अनुरूप विभागीय अधिकारी करेंगे निरीक्षण
-ओटी व लेबररूम के उन्नयन से मरीजों को मिलेगी बेहतर चिकित्सा सुविधा
-सुविधाओं की ब्रांडिंग के लिए किया जाता है मूल्यांकन
दरभंगा जिला के आठ अस्पतालों के ओटी व लेबर रूम को अपग्रेड किया जायेगा. इसे लेकर प्रसव कक्ष व मातृत्व ओटी के लक्ष्य प्रमाणीकरण की कवायद शुरू कर दी गई है. इसमें बहादुरपुर, सिंहवाड़ा, केवटी, बिरौल, अलीनगर, बहेड़ी, किरतपुर व एसडीएच बेनीपुर शामिल हैं . इसे लेकर विभागीय अधिकारी जल्द ही इन जगहों का निरीक्षण करेंगे. उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी. विदित हो कि सभी अस्पतालों के ओटी व प्रसव कक्ष के उन्नयीकरण से मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा प्रदान की जायेगी, ताकि शिशु व माता के मृत्यु दर में कमी लायी जा सके. इसके लिये मानक के अनुसार ओटी व लेबर रूम में अत्याधुनिक उपकरण, साफ- सफाई, कर्मियों आदि की प्रतिनियुक्ति की जायेगी. इससे लक्ष्य के मानक के अनुरूप इन अस्पतालों के ओटी व लेबर रूम में चिकित्सा व्यवस्था में गुणात्मक बदलाव किये जायेंगे. विदित हो कि इसमें कई तरह के मूल्यांकन पैमाने बनाए जायेंगे. इसमें अस्पताल की आधारिक संरचना के साथ अस्पताल में साफ़-सफाई का स्तर, स्टाफ की उपलब्धता, लेबर रूम के अंदर जरूरी संसाधनों की उपलब्धता मैपिंग की जायेगी. साथ ही प्रसव कक्ष में सभी प्रकार के रजिस्टर के अपडेशन भी की जानी है.
मैटरनिटी ऑपरेशन थियेटर व प्रसूता के लिये विशेष देखभाल में सुधार लाना मकसद –सिविल सर्जन डॉ ए के सिंह ने बताया कि भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लक्ष्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम की मदद से शिशु के जन्म के समय प्रसव कक्ष में देखभाल की गुणवत्ता बेहतर करना है ताकि मां एवं नवजात शिशु दोनों के ही जीवन पर कोई खतरा न हो. मातृत्व व शिशु मृत्यु दर में कमी लाने और उन्हें अधिक से अधिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लक्ष्य कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है. बता दें कि लक्ष्य प्रमाणीकरण का मूल उद्देश्य प्रसव संबंधी सुविधाओं को बेहतर बनाना है. इसके मद्देनजर लक्ष्य कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है. इसके तहत प्रसव कक्ष, मैटरनिटी ऑपरेशन थियेटर व प्रसूता के लिये बनी विशेष देखभाल इकाई की गुणवत्ता में सुधार लाना है.
भौतिक निरीक्षण कर आठ इंडीकेटरों की होती हैं जांच
विदित हो कि लक्ष्य प्रमाणीकरण के आठ मानकों, जिसमें मुख्य रूप से सेवा प्रावधान, रोगी का अधिकार, इनयूट्रस, सपोर्ट सर्विसेज, क्लिनिकल सर्विसेज, इंफेक्शन कंट्रोल, क्वालिटी मैनेजमेंट, आउटकम शामिल हैं . इन सभी आठों इंडीकेटरों का कुल 362 उपमानकों पर अस्पताल के प्रसव कक्ष एवं शल्य कक्ष का लगभग छह से नौ महीनों तक लगातार क्वालिटी सर्किल (संस्थान स्तर पर), ज़िला कोचिंग दल (ज़िला स्तर पर) इसके अलावा क्षेत्रीय कोचिंग दल द्वारा लगातार पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण कर आवश्यकता अनुसार सभी स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है. प्रशिक्षण के बाद अस्पताल का भौतिक निरीक्षण किया जाता है, और यह देखा जाता कि प्रशिक्षण लेने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा कार्य किया जा रहा है या नहीं. इसके साथ ही आठों इंडीकेटरों के अनुरूप नियमानुसार समुचित ढंग से रखा जाता है या नहीं, इससे संबंधित निरीक्षण किया जाता है.
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