आंगनबाड़ी सेविकाएँ घर घर जाकर दे रही हैं स्वच्छता का संदेश
• गृहभ्रमण के
दौरान बच्चों को सिखा रही हैं हाथों की स्वच्छता के तरीके
• बच्चों के अभिभावक भी समझ रहे हैं स्वच्छता का महत्त्व
समस्तीपुर पोषण माह में सम्पूर्ण पोषण स्वच्छता के महत्त्व को घर घर पहुंचाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने गृहभ्रमण को अपना जरिया बनाया है। . अपने पोषक क्षेत्र में हाथों की सफाई, घर तथा उसके आस पास सफाई रखकर स्वयं को स्वस्थ्य रखने का संदेश सेविकाओं द्वारा समुदाय तक पहुँचाया जा रहा है। .
पोषण माह को सफल बनाने के लिए आम जागरूकता पर बल-
डीपीओ अलका आम्रपाली ने बताया कि राष्ट्रीय पोषण माह को सफल बनाने के लिए आम जागरूकता पर बल दिया जा रहा है। इसी क्रम में ही हाथ धुलायी कार्यक्रम जैसी गतिविधियों का आयोजन किया गया है। साथ ही इस दौरान किशोरी एवं माताओं को पोषण पर जागरूक करने के लिए आंगनबाड़ी सेविका द्वारा घर-घर जाकर गर्भावस्था में बेहतर पोषण, 4 प्रसव पूर्व जांच, एनीमिया की रोकथाम के लिए आयरन की गोली जैसे विषयों पर जानकारी दी गयी है। साथ ही कोविड 19 संक्रमण से बचाव की भी जानकारी दी गयी।
स्वच्छता का पालन कर बीमारियों को रखें दूर:
केयर इंडिया के डीटीओ ऑन अभिकल्प मिश्रा ने बताया कि पोषण की शुरुआत व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखकर किया जा सकता है.। अपने घर एवं आस पास स्वच्छता का ध्यान रखकर कई प्रकार के संक्रमण से बचाव किया जा सकता है। . हाथों की सफाई, स्वच्छता का ध्यान रखते हुए खाना बनाना, खाने के बर्तन का साफ़ होना, खाने एवं खाना बनाने से पहले हाथों की सफाई आदि सभी हमारे पोषण को प्रभावित करते हैं। .
बीमारी से बचा सकती है सफाई :
सफाई ही बीमारी से लड़ने का पहला हथियार होता है। बीमारियों के संक्रमण से बचने का सबसे अच्छा तरीका सफाई का पहला चरण खाने से पहले और शौच के बाद हाथ धोना होता है। इसी उद्देश्य को लेकर हाथ धुलाई कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस अवसर जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाथ धोने के सही तरीकों के बारे में बताया गया। साथ ही इससे होने वाले फायदों की जानकारी भी दी गई।
पोषण के पाँच सूत्रों पर बल:
मिश्रा ने बताया पोषण अभियान का मुख्य उद्देश्य पोषण अभियान को जन-आंदोलन बनाना है ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग पोषण की जरूरत को समझ सके। पोषण अभियान के तहत ही सितम्बर माह को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। इस पोषण माह में आम लोगों को पोषण पर जागरूक करने के लिए सामुदायिक स्तर पर आयोजित होने वाली गतिविधियों पर ज़ोर दिया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा पोषण त्योहार से व्यवहार परिवर्तन के लिए पोषण के पाँच सूत्र दिये गए हैं। जिसमें पहले सुनहरे 1000 दिन, पौष्टिक आहार, एनीमिया प्रबंधन, डायरिया रोकथाम एवं स्वच्छता को शामिल किया गया है।
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