Breaking News

मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के नौंवे स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ

मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के नौंवे स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ

वर्चुअल मोड में आयोजित समारोह में देश-विदेश से जुड़े मिथिलावासी
मौके पर नीलम झा द्वारा मैथिली में रचित श्री दुर्गा चालीसा का भी हुआ लोकार्पण

मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के नौवें स्थापना दिवस के अवसर पर वर्चुअल मोड में आयोजित पाक्षिक समारोह का शुभारंभ रविवार देर शाम शहर के शुभंकरपुर स्थित श्मशान काली मंदिर परिसर में किया गया। समारोह का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार व भारत निर्वाचन आयोग के दरभंगा जिला स्वीप आईकॉन मणिकांत झा, कवियित्री नीलम झा, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी मैथिली विभागाध्यक्ष प्रो रमेश झा, वरिष्ठ पत्रकार विष्णु कुमार झा, मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के संस्थापक पं अजय नाथ शास्त्री, युवा समाजसेवी परमानंद झा, दरभंगा साक्षर संस्था के सचिव अशोक चौधरी, संजय कुमार झा, संतोष कुमार झा, नवल किशोर झा एवं अभियान के वरिष्ठ संरक्षक प्रवीण कुमार झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मौके पर मणिकांत झा ने कहा कि वर्तमान समय में मिथिला, मैथिली और मिथिलाक्षर के सूरत-ए-हाल हमें आत्मावलोकन करने की जरूरत है। यदि हम अपनी मातृ लिपि मिथिलाक्षर का प्रयोग दैनिक कार्यों में नहीं करेंगे तो वह पुनः मृत प्राय हो जाएगी। उन्होंने मृतप्राय हो चुकी मिथिला की धरोहर लिपि मिथिलाक्षर को पुनर्जीवित करने में मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान की भूमिका की सराहना करते हुए मिथिला के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को इसे अपनाते हुए इसके प्रचार-प्रसार के लिए आगे आने का आह्वान किया। प्रो रमेश झा ने कहा कि संविधान में शामिल अधिकतर भाषाओं को जहां अपनी स्वतंत्र लिपि नहीं है। ऐसे में हमारी धरोहर लिपि मिथिलाक्षर मैथिली को विशिष्टता प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास होगा कि स्नातक व स्नातकोत्तर मैथिली के पाठ्यक्रम में मिथिलाक्षर को यथोचित स्थान मिलने के साथ-साथ मिथिलाक्षर में मैथिली की उत्तर पुस्तिका लिखने वाले अभ्यर्थियों के सभी तरह के शिक्षण शुल्क माफ किए जाएं ताकि मैथिली के आम छात्रों के बीच अपनी धरोहर लिपि के प्रति आकर्षण बढ़ाया जा सके।
मौके पर वरिष्ठ पत्रकार विष्णु कुमार झा ने कहा कि अभियान के गहन अवलोकन से एक बात खासतौर पर सामने आती है कि इसमें प्रशिक्षित होने वालों में अधिकांश युवा हैं और यह अभियान सबसे अधिक युवाओं की जनसंख्या वाले भारत देश में एक युवा सोच की उपज है। साथ ही यह सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर निरंतर चौबीसो घंटे चलने वाली इकलौती पाठशाला है। परमानंद झा ने कहा कि धरोहर लिपि मिथिलाक्षर का पुनर्जागरण आह्लादित करने वाला है। कवियित्री नीलम झा ने अभियान के नौवें स्थापना दिवस के अवसर पर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए अपनी स्वरचित कविताएं सुनाई।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए अभियान के वरिष्ठ संरक्षक प्रवीण कुमार झा ने 25 सितंबर से 9 अक्टूबर तक देश-विदेश में आयोजित होने वाले स्थापना दिवस के वर्चुअल पाक्षिक समारोह की विस्तृत जानकारी देते बताया कि इस दौरान अनेक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने के साथ ही मिथिलाक्षर में लिपिबद्ध किए गये विभिन्न साहित्य सामग्री को सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर प्रदर्शित करने के साथ ही एक दिन मिथिलाक्षर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ट्वीटर के प्लेटफार्म पर मेगा ट्रेंड चलाया जाएगा। अशोक कुमार चौधरी ने दरभंगा एयरपोर्ट का नामपट्ट अन्य भाषाओं के साथ मिथिलाक्षर में भी लिखे जाने की बात रखी। जिसका सभी ने ध्वनि मत से स्वागत किया।
मौके पर नीलम झा द्वारा मैथिली मे रचित श्री दुर्गा चालीसा का लोकार्पण भी किया गया। लोकार्पण उपरांत उपस्थित लोगों द्वारा समवेत स्वर मे चालीसा का पाठ किया गया। वक्ताओं ने महात्मा गाँधी शिक्षण संस्थान दरभंगा द्वारा प्रकाशित श्री दुर्गा चालीसा को दुर्गा पूजा का अनुपम उपहार बताते हुए उम्मीद जाहिर की कि इसकी पहुंच शीघ्र ही मिथिला के घर-घर में होगी और यह देवी की आराधना में सहायक होगी।
अध्यक्षीय संबोधन में मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के संस्थापक पं अजयनाथ झा शास्त्री ने अभियान के गतिविधियों की विस्तार से चर्चा करते बताया कि मिथिलाक्षर की शत-प्रतिशत साक्षरता के प्रति इस अभियान से जुड़े अभियानी पूर्णतः कृतसंकल्प हैं, लेकिन मिथिलाक्षर को चलन में लाना संपूर्ण मिथिलावासी की जिम्मेवारी है।
समारोह में गंधर्व कुमार झा ने वेद ध्वनि प्रस्तुत किया। जबकि डा सुषमा झा, दीपक कुमार झा एवं जया के गाए गोसाउनि गीत एवं अभियान गीतों को देश-विदेश से जुड़ने वाले दर्शकों ने काफी पसंद किया। कार्यक्रम के आयोजन में दीपक आनन्द मल्लिक, धर्मेन्द्र कुमार झा, अनिल कुमार मिश्र, रुनू मिश्रा, पंकज कुमार कर्ण, कृष्ण कान्त झा, शंभु नाथ झा, उग्रनाथ झा, सुधा झा, जगतरंजन झा , संजय मिश्रा, साकेत कुमार झा आदि की उल्लेखनीय भूमिका रही। जबकि मिथिला क्षेत्र के सभी शहर, नगर और महानगर के साथ ही उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, प बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु के अतिरिक्त लंदन, नेपाल, सऊदी अरब, कतर, आस्ट्रेलिया, साउथ कोरिया, कैलिफोर्निया, नाईजीरिया, मलेशिया, यूके, यूएई, यूएसए, मैक्सिको, जाम्बिया, कुबैत आदि देशों से भारी संख्या मे प्रवासी मैथिल जुड़े। धन्यवाद ज्ञापन डा सुषमा झा ने किया।

Check Also

• आयुक्त की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षात्मक बैठक आयोजित… 

🔊 Listen to this   • आयुक्त की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की …