जिले में विशेष कुष्ठ रोगी खोजी अभियान शुरू :
-जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में आशा तथा शहरी क्षेत्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता करेगी खोज
– कुष्ठ रोग के कारण, लक्षण, बचाव, उपचार एवं मरीजों को पहचान के लिए आशाओं को दिया गया है प्रशिक्षण
– मरीजों की पहचान करने के साथ इलाज कराने के लिए किया जाएगा प्रेरित
मधुबनी, राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में आठ से 17 अक्टूबर तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान शुरू किया गया है । जिसके तहत जिले के सभी प्रखंडों में वार्डवार एक-एक मरीजों की पहचान कर उन्हें इलाज कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान के सफल संचालन को लेकर जिले की आशा कार्यकर्ताओं समेत अन्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इस संबंध में राज्य स्तर से कुष्ठ निवारण पदाधिकारी ने एसीएमओ को विशेष दिशा निर्देश जारी किया है. विदित हो कि जिला में कुल 588 नए कुष्ठ रोगी का इलाज चल रहा है जिसमें अप्रैल 2022 से सितंबर 2022 तक 303 ने कुष्ठ रोगियों की खोज की गई है जिसमें व्यस्क 275 तथा बच्चा 28 रोगी शामिल है बिहार सरकार द्वारा मुफ्त में एमडीटी दी जाती है. सभी कुष्ठ रोगी को मुफ्त में एमडीटी दी जाती है. वही पैर में घाव वाले कुष्ठ रोगियों को सेल्फ केयर किट और एमसीआर (माइक्रो सेलुलर रबड़)- चप्पल दिया जाता है विशेष रोगी रोगी अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 3839 आशा कार्यकर्ताओं के साथ एक अन्य सदस्य टीम में शामिल होंगे वहीं शहरी क्षेत्रों में 104 आंगनवाड़ी सेविका के साथ-साथ एक अन्य सदस्य शामिल होंगे. एसीएमओ डॉ आर के सिंह ने बताया इस संबंध में आशा कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण किया गया है । इस दौरान उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं को कुष्ठ रोग के कारण, लक्षण, बचाव, उपचार एवं मरीजों की कैसे पहचान समेत अन्य आवश्यक और जरूरी जानकारी दी गई है । ताकि प्रशिक्षित कर्मी आसानी के साथ मरीजों की पहचान कर उन्हें इलाज कराने के लिए प्रेरित कर सकें और अभियान का सफल संचालन सुनिश्चित हो सके।
अभियान के दौरान दो तरह के मरीज मिलने की रहती है संभावना :
डॉ. सिंह ने बताया, कुष्ठ रोगी खोज अभियान काफी आसान है। इस दौरान दो तरह के मरीज मिलने की संभावना रहती है। पहला पीबी यानी जिस मरीजों को एक से दो जगह पर बीमारी की विकृति है, उन्हें 06 माह और दूसरा एमबी यानी जिन्हें दो से अधिक जगहों पर बीमारी की विकृति है, उन्हें 09 माह तक दवाई का सेवन करना जरूरी है। तभी बीमारी को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाता है। वहीं, उन्होंने बताया, सामान्य मरीजों के लिए पीएचसी स्तर पर समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। जबकि, गंभीर मरीजों को जिला स्तरीय अस्पताल भेजा जाता है।
सभी प्रखंडों की आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया है प्रशिक्षण :
डॉ.सिंह ने बताया, यह प्रशिक्षण निर्धारित तिथि के अनुसार जिले में बारी-बारी से सभी प्रखंडों की आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया है। आशा कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में एक-एक टीम कुष्ठ रोगी खोजी अभियान के तहत घर-घर जाकर मरीजों की पहचान करेंगी और संबंधित मरीजों को इलाज कराने के लिए प्रेरित करेंगी। यही नहीं, इलाज के लिए स्वास्थ्य संस्थान जाने में आवश्यक और जरूरी सहयोग भी करेंगी। साथ ही, अभियान का प्रतिदिन अनुश्रवण किया जाएगा। इसलिए सभी आशा फैसिलिटेटर की जिम्मेदारी होगी कि वो प्रतिदिन की रिपोर्ट शाम में संबंधित पीएचसी को उपलब्ध कराएं। ताकि, अभियान की मॉनिटरिंग भी साथ-साथ सुगमता से हो सके।
कुष्ठ रोग एक नजर :
– कुष्ठ रोग जीवाणु से होने वाला एक रोग है।
– कुष्ठ रोग नस और त्वचा दोनों को प्रभावित करता है।
– यदि समय पर इलाज नहीं किया जाए एवं लंबे समय तक साथ रहने पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने की प्रबल संभावना रहती और विकलांगता भी हो सकती है।
– यह किसी भी व्यक्ति, किसी उम्र की महिला-पुरुष को प्रभावित कर सकता है।
– सही समय पर रोग की पहचान एवं उपचार प्रदान कर रोग को पूर्ण रूप से समाप्त किया जा सकता है।
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