नागरिकता संशोधन कानून-एनआरसी देश की संविधान केकी मौलिक संरचना के खिलाफ नीतीश कुमार की तथाकथित धर्मनिरपेक्षता का पर्दाफाश नेशनल सिनेमा चौक से पोलो मैदान तक निकला मार्च
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आज दरभंगा में नेशनल सिनेमा चौक से पोलो मैदान तक सैकड़ो की संख्या में छात्र-युवाओं का मार्च हुआ। मार्च नेशनल सिनेमा से राहमगंज, नाका 6, दारूभट्टी चौक, कमर्शियल चौक, लहेरियासराय टावर होते हुए पोलो मैदान में सभा मे जाकर सभा मे तब्दील हो गया।
मार्च में एनआरसी-सीएए नही चलेगा, एनआरसी सीएए कानून वापस लो, मोदी साह मुर्दाबाद, मोदी-साह होस में आओ, हिन्दू मुश्लिम शिख ईसाई, आपस में है भाई-भाई आदि नारा लगा रहे थे।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रबल विरोध के वावजूद नागरिकता संशोधन बिल अब कानून बन गया है,

यह पूरी तरह से हमारी नागरिकता पर हमला है. अल्पसंख्यकों को खासकर निशाना बनाया गया है. लोगों से अब अपनी नागरिकता साबित करने को कहा जा रहा है.
मोदी-अमित शाह सरकार का नागरिकता संशोधन कानून व एनआरसी पूरी तरह संविधान की मौलिक संरचना तथा आजादी के आंदोलन के संपूर्ण मूल्यबोध के खिलाफ है. आज पूरे देश में इसका तीखा प्रतिवाद हो रहा है. विगत कई दिनों से पूर्वोत्तर के राज्यों में आंदोलन जारी है. दुर्भाग्य यह कि आंदोलनकारियों को बर्बर मिलिट्री दमन का सामना करना पड़ रहा है. असम में अबतक कई लोगों की मौत हो चुकी है. वाम दलों ने मिलिट्री दमन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. पूर्वोत्तर के इलाके में कफ्र्यू की स्थिति बेहद चिंताजनक है. मोदी-शाह ने पूरे देश को धधकती ज्वाला में झोक दिया है.
भाजपा द्वारा एनआरसी (नागरिकता का राष्ट्रीय रजिस्टर) योजना के कारण असम की जनता, खासकर गरीब, वंचित समुदाय व अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों में भय-आतंक का माहौल बना. उसका नतीजा आज पूरा देश देख रहा है. नागरिकता सूची से 19 लाख 60 हजार लोगों को बाहर कर दिया गया, जिसमें करीब 13 लाख हिंदू समुदाय के गरीब लोग हैं. नागरिकता-विहीन लोगों को डिटेंशन कैंपों (यातना शिविरों) में बंद कर उन्हंे सड़ाया-मारा जा रहा है. कैंपों में अभी तक 6 महीने के दुधमुहे बच्चे से लेकर वृद्ध तक कुल 29 निर्दोष नागरिक मारे जा चुके हैं. लेकिन इससे सबक लेने की बजाए सरकार उलटे एनआरसी को पूरे देश में थोप रही है. एनआरसी की ही अगली कड़ी में धार्मिक भेदभाव पर आधारित सीएबी लाया गया, जिसका सर्वाधिक शिकार देश के आम-अवाम और सभी जाति-समुदाय के गरीब व वंचित लोग होंगे. देश के करोड़ों नागरिकों को नागरिकता-विहीन करने की इस साजिश को नाकाम करना होगा. नागरिकता से ही हमारे सारे अधिकार बनते हैं. यह बेहद स्वागतयोग्य है कि इसके खिलाफ आंदोलन की आग पूरे देश में फैल रही है।
मार्च का नेतृत्व संदीप चौधरी, मंजर अली, प्रिंस राज, केशरी यादव, मयंक यादव, राहुल राज, मोहम्मद तालिब, मोहम्मद सहाबुद्दीन, अमीर हक, मोहमद सद्दाब, अनुराग सिंह गौतम, आशिक खान, पप्पू खान, गुलजार, गुलनवाज हुसैन, आकिब जावेद, खावर जावेद, कैफ राजा सहित सैकड़ो लोग शामिल थे।
सभा के अंत मे हमे चाहिए आजादी वाला नारा से गूंज उठा।
दरभंगा news24live
संपादक अजित कुमार सिंह
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