आगामी तीन नवंबर से विश्राम सदन में परिजनों को मिलेगा आश्रय
दो कमरे व अटैच बाथरूम के लिए देने होंगे 350 रुपये
आठ बेड वाले हॉल में प्रति बेड 70 रुपये लिया जाएगा शुल्क
विश्राम सदन को पावर ग्रिड ने अधीक्षक को किया हैंड ऑवर

दरभंगा. डीएमसीएच परिसर स्थित पावर ग्रिड विश्राम सदन को आगामी नौ नवंबर से आम परिजनों के लिए खोल दिया जाएगा. मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद परिजन अपने ज़रूरत के अनुसार कमरा व बेड बुक करा सकते हैं. इसके लिए उन्हें प्रति 24 घंटे की दर से निर्धारित शुल्क अदा करने होंगे. दो कमरा के साथ एटेच बाथरूम के लिए 350 रुपये व हॉल में एक बेड लेने के लिए 70 रुपये देने होंगे. एक हॉल में आठ बेड लगे हैं. परिजनों के द्वारा देय राशि एक बैंक में जमा किया जायेगा. इसका उपयोग विश्राम सदन के मेंनटेंनस पर किया जायेगा. अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मद के राशि के जमा के लिये जल्द ही एक बैँक एकांउट खोला जायेगा. विदित हो कि डीएमसीएच परिसर स्थित विश्राम सदन को पावर ग्रिड ने अधीक्षक को हस्तगत करा दिया है. गुरुवार को उदघाटन कार्यक्रम के दौरान इसे हैंड ऑवर कर दिया गया. मालूम हो कि विश्राम सदन में डीएमसी के तीन विभागों को हंस्तांतरित करने की बात कही जा रही थी, लेकिन यह सदन परिजनों के उपयोग में लाया जायेगा.
खुले आकाश के नीचे रहने वाले परिजनों को मिलेगा आश्रय
डीएमसीएच में इलाज कराने के लिये जिला के अलावा निकटवर्ती क्षेत्र सहित नेपाले से भी लोग पहुंचते हैं. विभिन्न विभागों में भर्ती कराने के बाद परिजन खुले आकाश के नीचे रहने को मजबुर हैं. प्रतिकुल मौसम में अस्पताल परिसर में जैसे- तैसे वक्त बीताते हैं. वहीं दूसरी ओर कई परिजन मरीजों को भर्ती कराने के बाद परिजन रेस्ट हॉउस के तलाश में भटकते हैं. इसमें उन्हें भारी शुल्क देना पड़ता है, लेकिन अब यह परेशानी दूर होने वाली है. इसके लिये इंतजार करना होगा. विश्राम सदन को हैँड ऑवर की प्रक्रिया के बाद ही इसे चालू किया जा सकेगा.
जी प्लस में होंगे 260 बेड
विदित हो कि पांच मंजिला भवन में कुल 32 कमरा है. इसमें 260 बेड लगाये गये हैं. इस प्रकार प्रत्येक फ्लोर पर 12 बेड हैं. प्रत्येक तल पर दो पुरुष, दो महिला व एक दिव्यांग के लिये बाथरूम बनाया गया है. इसके साथ ही प्रत्येक तल पर दो हॉल भी निर्मित है. विदित हो कि 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की व्यवस्था के लिये 85.5 केवीए का जनरेटर स्थापित किया गया है. ऊपरी मंजिल पर पहुंचने के लिये लिफ्ट की सुविधा है. जल संचयन के लिये तीस हजार लीटर का टैंक बनाया जा रहा है. वहीं खाने- पीने के लिये कैंटीन भी बनाया गया है. इस प्रकार इलाजरत मरीज व परिजनों के ठहरने, खाने- पीने व अन्य बुनियादी सुविधा के मद्देनजर इसका निर्माण कराया गया है. खासकर लंबे उपचार के लिये मरीजों को भर्ती कराने के बाद परिजनों को काफी सहुलियत होगी.
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