अगले सत्र से दरभंगा एम्स के 100 सीटों पर शुरू हो सकती है पढ़ाई
-व्यवस्था शुरू करने को लेकर विभागीय कवायद तेज
-शहर में वैकल्पिक जगह की हो रही खोज
-सदर हॉस्पिटल भवन को तत्काल दिये जाने का सरकार को भेजा जायेगा प्रस्ताव
दरभंगा, अगले साल लोगों को दरभंगा एम्स में पढ़ाई शुरू करने को लेकर खुशखबरी मिल सकती है. अगले सत्र से एम्स के 100 सीटों पर एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की जा सकती है. इसके लिये विभागीय प्रयास शुरू कर दिये गये हैं. जानकारी के अनुसार छात्रों के पढ़ाई के लिये निर्माणाधीन सदर अस्पताल का उपयोग किया जा सकता है. इस संबंध में एम्स के निदेशक डॉ माधवानंद कार ने पिछले दिनों इस अस्पताल का निरीक्षण किया है. वहां चल रहे काम व बिल्डिंग का अवलोकन किया. साथ ही काम के पूर्ण होने की जानकारी मांगी. बीएमएसआइसीएल की ओर से बताया गया कि काम अंतिम चरण में चल रहा है. काम पूरा होने के बाद जल्द ही विभाग को हैँड ऑवर कर दिया जायेगा. बताया गया कि उसके पश्चात इस भवन का उपयोग करने के लिये प्रदेश सरकार से बात की जायेगी. वहां से हरी झंडी मिलने के बाद अगले सत्र से एम्स की पढ़ाई शुरू होने की पूरी संभावना है. वहीं विभाग की ओर से इसके अलावा अन्य वैक्लपिक जगह की भी तलाश की जा रही है. सूत्र बताते हैँ कि डीएमसीएच परिसर स्थित सुपरस्पेशलिटी अस्पताल का भी इस्तेमाल इस मकसद के लिये किया जा सकता है. इसकी भी संभावना बनती है. वहीं दूसरी ओर बताया जा रहा है कि इस बहुमंजिला भवन में डीएमसी छात्रों के तीन विभाग को शिफ्ट किया जा सकता है. बता दें कि एम्स के निदेशक की ओर से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने की कोशिश की जा रही है, ताकि एम्स के निर्माण की गतिविधि में तेजी लायी जाय. वहीं एक सौ सीटों पर पढ़ाई शुरू होने से चिकित्सकों की कमी पूरी हो सकेगी. इसकी पुष्टि करते हुये निदेशक डॉ कार ने कहा है कि वो आशान्वित हैँ कि अगले साल से एम्स के 100 सीटों पर पढ़ाई शुरू हो जायेगी. इसे लेकर वह उपयुक्त जगह की खोज कर रहे हैं.
लोक सभा में सांसद ने एम्स की पढ़ाई के लिये पूछा था प्रश्न-
बता दें कि इसी साल 25 मार्च को सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ भरत प्रवीण पवार से दरभंगा एम्स में पढ़ाई के शुरू करने की बाबत जानकारी मांगी थी. इसके जवाब में मंत्री ने कहा था कि एम्स के निर्माण के लिये आरंभिक चरण चल रहा है. इसलिये अभी यहां पढ़ाई शुरू नहीं की जा सकती है. बताया कि इसके लिये उपयुक्त बुनियादी ढांचा , मैनपावर व फैकल्टी चाहिये.
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