स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह में पहली बार महिला संगोष्ठी आयोजित
मां के गर्भ में ही मातृभाषा सीख लेते हैं बच्चे : नेहा नुपुर
– मैथिली भाषा मैथिलिवासियों को दुनिया भर में जोड़ने का काम करती : माला झा

फोटो । महिला संगोष्ठी में शामिल अतिथि और महिलाएं।
बच्चे मां के गर्भ में जो भाषा सीखती है, वही बच्चे की मातृभाषा हो जाती है। महाभारत काल में भी अभिमन्यु इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। मिथिला की शैक्षणिक व सांस्कृतिक परंपरा प्राचीन काल से ही सुदृढ़ रही है। मिथिला की महिला यहां की सभ्यता, संस्कृति व साहित्य को बेहद समृद्ध करने में अपना योगदान निभाती रही है। उक्त बाते मंगलवार को विद्यापति सेवा संस्थान की ओर से स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह में पहली बार आयोजित महिला संगोष्ठी में ‘मातृभाषा मैथिलक विकास मे मातृशक्ति केर भूमिका’ विषय पर अपना विचार व्यक्त करते हुए दरभंगा जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी नेहा नुपुर ने कही। उन्होंने कहा कि मैथिली भाषा के प्रचार-प्रसार व समुन्नत विकास में हमेशा मैथिलानियों का योगदान रहा है। घर से लेकर बाहर तक मैथिली मातृभाषा को बचाएं रखने में महिलाओं की भूमिका सराहनीय है। अब मैथिली भाषा को महिला विश्व स्तर पर फैलाने का कार्य कर रही है। इसका कुछ उदाहरण इस कार्यक्रम में शामिल महिला अतिथि ही हैं।
अमेरिका से भारत एफएम के माध्यम से प्रसारित होने वाले मैथिली कार्यक्रम की संचालिका माला झा ने कहा कि मैथिली भाषा दुनिया भर में मैथिलीवासियों को जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने इस मंच से मोबाइल फोन के कॉल सेंटर और रिंग टोन में मैथिली भाषा को शामिल करने के लिए आंदोलन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि मिथिला की महिला पहले से ही सांस्कृतिक रूप से सक्षम रही है। वर्तमान में भी इसे आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अध्ययन व अध्यापन की सबसे बड़ी चुनौती विषय वस्तु की समझ विकसित करना है। मैथिली भाषा में पाठ्य पुस्तकों की कमी इस दिशा में सबसे बड़ी चुनौती है। खासकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मैथिली भाषा की पुस्तकों का नितांत अभाव है। जहां तक मैथिली का सवाल है तो यह संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है किंतु पाठ्य पुस्तकों की कमी की वजह से मैथिली अब तक शिक्षण का माध्यम नहीं बन सकी है। जबकि प्राथमिक स्तर से ही मैथिली में अध्यापन की मांग उठती रही है। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. रेणु चौधरी ने कहा कि महिलाओं को मातृभाषा मैथिली के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। किसी भी विषय में स्नातक उत्तीर्ण छात्रों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मैथिली में स्नातकोत्तर करने के छूट दे दी जानी चाहिए।
महिला संगोष्ठी की प्रभारी डॉ. सुषमा झा ने मंच संचालन करते हुए संगोष्ठी में शामिल सभी महिलाओं को दैनिक जीवन में मैथिली भाषा के उपयोग करने के लिए शपथ दिलाई। विशिष्ठ अतिथि के रूप में आभा झा, प्रतिभा रंजन की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। वृजवाला के स्वस्ति वाचन से शुरू हुए कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने डा ममता ठाकुर की अगुवाई में सामूहिक रूप से विद्यापति रचित गोसाउनि गीत का गायन किया।
मौके पर साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए शिक्षिका भारती रंजन एवं कवियित्री नीलम झा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मीना झा, प्रतिभा स्मृति, सुनीता झा, ऋतु प्रज्ञा, ऋतु राय, सरिता झा, पुष्पलता कुमारी, कल्पना प्रवीण, कंचना झा, किरण, चंदा रानी, वर्षा, बेबी, रेखा व प्रीति सहित सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
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