मैथिली लोकचित्र कला प्रतियोगिता में अंजिता सामल ने मारी बाजी
– सिकंदर मुखिया को दूसरा व स्नेहा सुरभि को मिला तीसरा स्थान

विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में स्वर्ण जंयती वर्ष समारोह के तीसरे दिन मंगलवार को मैथिली लोकचित्र कला प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। प्रतियोगिता में सैकड़ों की संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों की ओर से बनाए गए मिथिला पेंटिंग को देखने के बाद निर्णायक मंडल ने उड़ीसा की रहने वाली अंजिता सामल को प्रथम, मधुबनी के सिकंदर मुखिया को द्वितीय और स्नेहा सुरभि को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया। साथ ही सिक्की कला के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए राधा कुमारी को पुरस्कृत किया गया।
प्रतियोगिता में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के चुनावी रणनीतिकार शरद झा ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि मिथिला की गौरवशाली संस्कृति विश्वस्तर पर फैली हुई है। जहां कहीं मिथिला के लोग हैं वे विश्वस्तर पर अपनी संस्कृति को फैलाने में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिथिला की लोकचित्र कला विश्व स्तर पर लोगों को अपनी ओर खींचने का कार्य करती है। मिथिला लोकचित्र कला को विश्वस्तर पर व्यावसायिक रूप से मजबूती प्रदान करने की जरूरत है। ये बच्चे मिथिला की प्रतिभा है। ये आगे चलकर अपनी संस्कृति को दुनिया भर में फैलाने का कार्य करेंगे। मुझे इसकी पूरी उम्मीद है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने मिथिला की संस्कृति के समुचित विकास के लिए मिथिला के पर्यटन स्थल को चिन्हित कर दुनिया भर में इसका प्रचार-प्रसार करने की जरूरत पर बल दिया।
मुख्य अतिथि राजेश झा ने कहा कि मिथिला संस्कृति के प्रचार-प्रसार में जो दूरी आ गई थी, नई पीढ़ी उसको कम करने का कार्य कर रही है। डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि मिथिला की गौरवशाली संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए विश्व स्तर पर संवाद करने की जरूरत है। उन्होंने बंगाल की तर्ज पर मिथिला की संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए सक्रियता को बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। कार्यक्रम में मिथिला लोककला के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 21 युवा को मिथिला कला सम्मान से सम्मानित किया गया। मंच संचालन अधिवक्ता मांडवी झा और मणिभूषण राज ने मिलकर किया।
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