प्राइवेट क्लिनिक पर इलाजत यक्ष्मा मरीज का निश्चय पोर्टल पर निबंधन करना अनिवार्य
– यक्ष्मा विभाग व डॉक्टर फॉर यू के द्वारा चलाया जा रहा है विशेष अभियान
-विशेष अभियान चलाने के लिए बनाई गई रणनीति
-राज्य स्तरीय 2 सदस्य टीम ने सदर अस्पताल का किया
-नवंबर व दिसंबर में राज्य में प्राइवेट सेक्टर में नोटिफिकेशन लक्ष्य के अनुरूप प्रगति लाने का निर्देश

मधुबनी
टीबी की बीमारी से भारत में प्रति वर्ष लाखों लोगों की मौत हो जाती है। मौत के कारणों के आधार पर देखा जाए तो सबसे ज्यादा लोगों की मौत का कारण बनने के मामले में टीबी नौवें नंबर पर आता है। मामले की गंभीरता देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय टीबी की बीमारी के उन्मूलन करने का प्रयास कर रही है। जिसके लिए सरकार के द्वारा 2025 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार हर मरीज का समुचित इलाज सुनिश्चित करने के साथ मरीजों का उचित पोषण उपलब्ध करवा रही है क्योंकि पोषण के अभाव में इस बीमारी का उन्मूलन बहुत कारगर नहीं होगा। इसी कारण सरकार सभी टीबी के मरीजों को इलाज के दौरान 500 रुपये प्रति माह की मदद दे रही है। वही विभाग के निर्देश के अनुसार अब प्राइवेट क्लिनिक पर इलारत यक्ष्मा मरीजों का निश्चय पोर्टल पर निबंधन करना अनिवार्य कर दिया गया है विदित हो कि वर्ष 2022 के लिए विभाग के द्वारा जनवरी से लेकर दिसंबर तक 4000 मरीजों का पोर्टल पर निबंधन करने का लक्ष्य रखा गया था. अक्टूबर माह बीत जाने पर जी अब तक महज 1555 यानी 39% मरीजों का ही निबंधन हो सका है माह नवंबर व दिसंबर में मिशन मोड शेष बचे 2445 मरीज का निबंधन किया जाना है जिसे मिशन मोड में पूरा करना है. निक्षय पोर्टल पर एंट्री को लेकर डॉक्टर को भी प्रत्येक मरीज के आउटकम पर 500 रु. का प्रावधान है. कार्यक्रम को लेकर राज्य स्तर से 2 सदस्य टीम डॉ संदीप सोनी पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट एसटीएसयू, एवं अकबर हुसैन टीम सदर अस्पताल आई टीम के सदस्यों ने यक्ष्मा विभाग तथा प्राइवेट नोटिफिकेशन पर कार्य करने वाले डॉक्टर फॉर यू कार्यालय का निरीक्षण किया तथा उपस्थित कर्मियों के साथ बैठक कर प्राइवेट नोटिफिकेशन बढ़ाने का लेकर विशेष रणनीति बनाई गई.सीडीओ डॉक्टर जीएम ठाकुर ने बताया कि टीबी पर प्रभावी नियंत्रण और उन्मूलन के लिए सरकार ने एक नई योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य क्षय रोग से मुक्ति पाना है। नई योजना के तहत सारथी के तौर पर निश्चय पोर्टल बनाया गया है। इसके माध्यम से प्रशासनिक स्तर पर ऑनलाइन निगरानी की जा रही है। पोर्टल के माध्यम से टीबी मरीजों और उनके इलाज से संबंधित सूचनाएं और इलाज से स्वास्थ्य में सुधार की जानकारियां दर्ज हो रही हैं। प्रतिदिन पोर्टल अपडेट किया जा रहा है।
टीबी का हर चौथा मरीज भारतीय:
संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. जी.एम. ठाकुर ने बताया भारत में टीबी के मरीजों की संख्या पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है। टीबी का हर चौथा मरीज भारतीय है। आंकड़ों के रूप में लगभग 30 लाख लोगों को टीबी की बीमारी होती है। इस मामले में सबसे दुखद पहलू यह है कि सभी लोगों को इलाज नहीं मिल पाता है। बड़ी संख्या के केस अनरजिस्टर्ड ही रह जाते हैं। हालांकि प्रयास है कि जल्दी ही सभी रोगियों को रजिस्टर करने में और उनका इलाज करने में हमलोग सक्षम हो जायेंगे। प्राइवेट अस्पतालों से भी प्रतिवर्ष हजारों मरीज सामने आ रहे हैं। जिस को चिह्नित कर उचित परामर्श तथा दवा उपलब्ध करायी जा रही है।
क्या है लक्ष्य
वैश्विक रूप से डब्ल्यूएचओ एवं भारत सरकार ने जो लक्ष्य तय किया है, उसके मुताबिक टीबी मरीजों की कुल संख्या को 2030 तक 2015 के कुल मरीजों की संख्या के बीस फीसद तक ले आना है। इससे अलग हटकर भारत सरकार ने अपने लिए यह समय सीमा 2025 तक तय किया है।
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