ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के हाॅल में विश्वविद्यालय छात्र संध के तत्वावधान में स्वामी विवेकानंद की 157 वीं जयंती समारोहपूर्वक मनाई गयी।

समारोह का उद्घाटन कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय ने दीप प्रज्वलित कर किया।तत्पश्चात कुलसचिव एवं अन्य मंचासीन अतिथियों ने स्वामी विवेकानंद की तस्वीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।कर्नल राय ने इस अवसर पर मिथिला शब्द के अंग्रेजी वर्णाक्षर की व्याख्या कर स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस युवा दिवस की नयी परिभाषा गढी।इस अवसर पर स्वामी विवेकानंद के विचारों का भारत विषयक विचार गोष्ठी आयोजित की गई।विषय प्रवेश करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो चन्द्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद नव वेदांतवादी थे।उन्होंने धर्म को कर्मकांड से अलगाया और दीन दुखियों के उद्धार पर बल दिया।वे पाच्य और पाश्चात्य में संतुलन के आग्रही थे।प्रो जितेन्द्र नारायण ने कहा कि स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रतीक हैं और उन्होंने हिन्दुत्व की व्यापक व्याख्या प्रस्तुत की।बहस को आगे बढाते हुए प्रो अजीत कुमार सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारतीय राष्ट्रीयता के प्रणेता थे।उन्होंने पवित्रता धैर्य और विश्वास पर बल दिया।छात्र संघ अध्यक्ष आलोक कुमार ने विवेकानंद को युवाओं का आदर्श कहा।कुलानुशासक डाॅ अजीत चौधरी ने राष्ट्रवाद के प्रसंग में विवेकानंद को सर्वथा प्रासंगिक बताया।मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो मनोज कुमार झा ने विवेकानंद के नव वेदांत की व्याख्या की और उनके सार्वभौम धर्म दर्शन को प्रासंगिक बताया।इस अवसर पर डाॅ विनोदानंद झा एवं डाॅ प्रीति झा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।कार्यक्रम के अंत में
स्वामी विवेकानंद की जयंती के उपलक्ष्य में छत्र छात्राओं के बीच नौ जनवरी को स्वामी विवेकानंदःएक युग पुरुष विषयक निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।इस प्रतियोगिता में अभिजीत दर्शन ने प्रथम अनिमा सिन्हा ने द्वितीय प्रेमचंद प्रियदर्शी ने तृतीय बजरंगी कुमार यादव ने चतुर्थ एवं ॠषिकेश झा ने पंचम स्थान प्राप्त किया।कार्यक्रम का संचालन आर्यन सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन छात्र संघ महासचिव प्रीती कुमारी ने किया।कार्यक्रम में डाॅ कन्हैया चौधरी पूर्व अध्यक्ष सूरज कुमार उपाध्यक्ष अविगत कुमार पूर्व महासचिव उत्सव पराशर की विशेष उपस्थिति थी।
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