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उत्कृष्ट मैथिली पोथी ‘फुलभंगा’ के लिए अभिलाषा को मिला मैसाम युवा सम्मान 

उत्कृष्ट मैथिली पोथी ‘फुलभंगा’ के लिए अभिलाषा को मिला मैसाम युवा सम्मान

 

– राष्ट्रीय राजधानी में दसवें एकल व्याख्यानमाला का मैसाम ने किया उत्कृष्ट आयोजन

 

– ‘मैथिली कथाक विकास’ विषय पर आयोजित व्याख्यानमाला में सामने आई कई महत्वपूर्ण जानकारियां

मैथिली की युवा रचनाकार एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पीजी मैथिली विभाग की सहायक प्राध्यापिका अभिलाषा को उनकी लिखी मैथिली पुस्तक ‘फुलभंगा’ के लिए इस साल का मैसाम युवा सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान उन्हें रविवार को मैथिली साहित्य महासभा (मैसाम) के तत्वावधान में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब स्थित डिप्टी स्पीकर हाॅल में आयोजित भव्य समारोह में मैथिली के प्रसिद्ध कथाकार अशोक, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. एन. झा, मैसाम अध्यक्ष राहुल झा एवं मैसाम उपाध्यक्ष तपन कुमार झा के हाथों सम्मान के रूप में प्रशस्ति पत्र के साथ पच्चीस हजार रुपये का चेक उन्हें प्रदान किया गया।

मौके पर ‘मैथिली कथाक विकास’ विषय पर आयोजित एकल व्याख्यानमाला में अपना विचार रखते हुए कथाकार अशोक ने कहा कि कथा या कहानी का प्राचीन नाम संस्कृत में ‘गल्प’ या ‘आख्यायिका’ मिलता है। लेकिन, आधुनिक समय में कथा के नाम से जो रचना हुई है वह संस्कृत साहित्य के गल्प और आख्यायिका के नाम से मिलने वाली रचनाओं से सर्वथा भिन्न है। उन्होंने कहा कि यह विधा अंग्रेजी साहित्य से होते हुए मैथिली में आई। जहाँ तक कथा के परिभाषा की बात है तो कथा को किसी परिभाषा में बांधना कठिन है। बावजूद इसके बहुत से कथाकार और आलोचकों ने इसे परिभाषित करने का विलक्षण प्रयास किया है।

उन्होंने बताया कि मुंशी प्रेमचन्द कथा पर विचार करते कहते हैं कि ‘ कथा यानी गल्प एक रचना है, जिसमें जीवन के किसी एक अंग या मनोभाव को प्रदर्शित करना लेखक का उद्देश्य होता है।उसका चरित्र, उसकी शैली और कथा विन्यास ये सभी उसके भाव को पुष्ट करते हैं।’

कथाकार अशोक ने कहा कि प्रारम्भ में मैथिली कथा का अर्थ था मैथिली भाषा में लिखित कथा। कुछ दिन बाद यह भाषा के संग क्षेत्र से जुड़ गया और मैथिली कथा का अर्थ हो गया मैथिली भाषा में लिखित मिथिला की कथा। आगे चलकर मैथिली में लिखित मैथिल कथाकारों की कथा मैथिली कथा बन गया। लेकिन, मैथिली कथा जिस परिभाषा के साथ इक्कीसवीं सदी में गढ़ी गई उसने मैथिली कथा को किसी भी तरह की सीमाओं के बंधन से परे सम्पूर्ण मानव समुदाय की कथा हो गई। यह इसका सर्वाधिक सबल पक्ष है।

व्याख्यान माला की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस एस. एन. झा ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने मैथिली साहित्य जगत को विकास की दिव्य दृष्टि से संपन्न बताते हुए मैथिली साहित्य के भंडार की श्रीवृद्धि में नयी पीढ़ी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने मैथिली साहित्य महासभा द्वारा आयोजित ‘मैथिली कथाक विकास’ पर केंद्रित व्याख्यानमाला को उपयोगी बताया।

इससे पूर्व अतिथियों के साथ मैसाम के अध्यक्ष राहुल झा और उपाध्यक्ष तपन कुमार झा द्वारा दीप प्रज्ज्वलन बीच मैसाम के कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा कवि कोकिल विद्यापति रचित गोसाउनि गीत ‘जय जय भैरवि…’ की सस्वर प्रस्तुति के संग मैसाम द्वारा आयोजित दसम एकल व्याख्यानमाला का विधिवत शुभारंभ हुआ। मैसाम महासचिव सोनी चौधरी के कुशल संचालन में आयोजित कार्यक्रममे धन्यवाद ज्ञापन मैसाम उपाध्यक्ष तपन कुमार झा ने किया। मिथिला की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप अतिथियों का स्वागत मैसाम के सदस्यों द्वारा मिथिला चित्रकला से सुसज्जित पाग और दोपटा संग मैथिली के लब्धप्रतिष्ठ हितचिंतक स्व भुवनेश्वर प्रसाद गुरुमैता जी का चित्र भेंट कर किया गया।

स्वागत संबोधन में मैसाम के अध्यक्ष राहुल झा ने मैसाम की विस्तृत कार्य-योजना पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मैसाम की स्थापना वर्ष 2015 में मैथिली साहित्य और संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए किया गया। इसके अंतर्गत मैसाम द्वारा प्रत्येक वर्ष निरंतर कवि गोष्ठी, कथा गोष्ठी और व्याख्यान माला के आयोजन के साथ ही मैसाम युवा सम्मान प्रदान किया जाता है। जिसमें 40 वर्ष तक के आयु वर्ग के साहित्यकार को मैथिली में लिखी गई उनकी उत्कृष्ट कृति के लिए ‘मैसाम युवा सम्मान’ दिया जाता है। अपने संबोधन में उन्होंने मैसाम की भविष्य की योजनाओं की भी विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर मैसाम की अर्धवार्षिक मुख पत्रिका ‘अपूर्वा’ के पाँचवें अंक के साथ कवियित्री सुधा ठाकुर की बाल कविता संग्रह ‘गामक कोरामे’, डा० उमाशंकर चौधरी की मैथिली कविता संग्रह ‘प्रसंगत’, राज किशोर मिश्र की पुस्तक क्रमशः ‘प्रलय-पाश’ और ‘जँ जग जल नहि होइत’, हितनाथ झा की पुस्तक ‘राजा पोता बलगर ‘, नारायण झा की पुस्तक ‘किशोर मनकथा’ और अभिलाषा की पुस्तक ‘यथाप्रसंग’ का भी लोकार्पण किया गया।

मौके पर अपूर्वा के संपादक द्वय संजीव कुमार सिंह और उज्ज्वल कुमार झा ने मैसाम की अर्द्धवार्षिक पत्रिका के प्रकाशन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में मैथिली साहित्य के प्रति अभिरुचि जगाना इसके मूल में सन्निहित है। वहीं सृजनात्मक साहित्य के साथ-साथ आलोचनात्मक साहित्य को प्राथमिकता देना इसकी विशेषता है। कार्यक्रम में मैसाम की कार्यकारिणी के सदस्यों हेमंत झा, संजीव सिन्हा, तपन झा, सुबोध झा, उज्ज्वल कुमार झा, राहुल झा वत्स, सूर्य नारायण यादव, भावना मिश्रा, अरुण कुमार मिश्र, सुधा ठाकुर, अशीष नीरज, आनंद दास, पवन ठाकुर, अखिलेश मिश्र, रीता ठाकुर, ऋतेश रंजन, मनोज झा, सरोज झा, संजय कुमार झा, राज किशोर मिश्र, कविता पाठक, चंदन झा, अभय नाथ मिश्र, संजय झा, श्रवण झा सहित मिथिला के अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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