वट सावित्री पर महिला संवाद कार्यक्रम ने लिया उत्सव का रूप,सशक्तिकरण का बना सशक्त मंच

वट सावित्री पर महिला संवाद कार्यक्रम ने लिया उत्सव का रूप,सशक्तिकरण का बना सशक्त मंच

 

दरभंगा वट सावित्री पर्व के पावन अवसर पर दरभंगा जिले के विभिन्न प्रखंडों में आयोजित ‘महिला संवाद’ कार्यक्रम आज केवल एक सरकारी आयोजन न होकर महिलाओं के लिए एक सामाजिक उत्सव का मंच बन गया।

महिलाओं ने परंपरागत रूप से अपने पति की दीर्घायु की कामना करते हुए वृक्ष पूजन कर इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण,आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का भी संकल्प लिया।

कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में आई जीविका दीदियों ने अपने अनुभव साझा किए, विभिन्न सरकारी योजनाओं से कैसे उनके जीवन में परिवर्तन आया—यह माइक पर पूरे आत्मविश्वास से बताया और दूसरों को प्रेरणा भी दी।

 

महिलाओं ने अब सिर्फ योजनाओं की जानकारी लेने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि नीति निर्माण की चर्चा में भाग लेकर अपने गाँव और समाज की समस्याओं पर खुलकर सुझाव भी दिए।

 

महिलाओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, जल-जमाव, सोलर लाइट, वृद्धावस्था पेंशन, सिंचाई और स्वरोजगार जैसे ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बातें रखीं और प्रशासन से इनके समाधान की मांग की। अब यह ‘महिला संवाद’ कार्यक्रम एक अभियान का रूप ले चुका है, जहाँ हर महिला की आवाज़ सुनी जा रही है।

 

कार्यक्रम में ‘महिला संवाद रथ’ की विशेष भूमिका है,जो जिले के विभिन्न गाँवों में जाकर सरकारी योजनाओं की जानकारी ऑडियो-विजुअल माध्यम से दे रहा है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लघु फिल्में, समूह संवाद और योजनाओं पर आधारित प्रदर्शनियाँ महिलाओं को सहज रूप से जानकारी देने में मददगार साबित हो रही हैं।

 

 

 

दरभंगा के मनीगाछी, बहादुरपुर, कुशेश्वरस्थान, घनश्यामपुर, सिंहवाड़ा, बेनीपुर सहित कई प्रखंडों में आयोजित महिला संवाद सत्रों में भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण देखने को मिले।

बेनीपुर प्रखंड में एक स्थानीय शिक्षिका,जो वर्षों बाद गाँव लौटी थी ने मंच से साझा किया कि कैसे सरकारी योजनाओं और शिक्षा ने उन्हें एक नई पहचान दी।

जब गाँव की महिलाओं ने उन्हें सम्मानित किया,तो वह क्षण पूरे समुदाय के आत्मबल और गर्व का प्रतीक बन गया।

दरभंगा की हजारों महिलाओं की ओर से बोले गए वह शब्द हैं,जो अब सामाजिक परिवर्तन की बुनियाद बन चुके हैं।

‘महिला संवाद’ कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया है कि जब महिलाएं बोलती हैं,तो समाज बदलता है।

दरभंगा जिले में यह पहल अब सशक्तिकरण का आंदोलन बन चुकी है और आने वाले समय में यह कई और जीवन बदलने का माध्यम बनेगी।

कार्यक्रम के समापन पर सभी महिलाओं ने समाज में व्याप्त नशा, बाल विवाह, दहेज प्रथा के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाने और पीड़ितों के साथ खड़े रहने का संकल्प लिया।

महिलाओं ने कहा कि वे अब न केवल अपने परिवार और बच्चों के भविष्य के लिए, बल्कि एक बेहतर, सुरक्षित और समान समाज के निर्माण के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाएँगी।

यह संकल्प दरभंगा की ग्रामीण महिलाओं की बदलती सोच और सामाजिक चेतना का जीवंत प्रमाण बन गया।

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