दरभंगा में महिला संवाद कार्यक्रम संपन्न, महिलाओं की आवाज बनी नीति निर्माण की दिशा
महिला संवाद का हुआ सफल समापन, गाँव-गाँव गूँजी महिलाओं की आवाज
दरभंगा की दीदी की आवाज पहुँची सरकार तक, पोशाक निर्माण का कार्य अब जीविका के हवाले

बिहार सरकार द्वारा दरभंगा जिले में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 18 अप्रैल से शुरू किया गया महिला संवाद कार्यक्रम 18 जून को सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। यह दो महीने दो पालियों में चला संवाद कार्यक्रम जिले के प्रत्येक कोने तक पहुँचा और महिलाओं की समस्याओं, आकांक्षाओं व सुझावों को एक सशक्त मंच प्रदान किया।
डीपीएम डा० ऋचा गार्गी के नेतृत्व में दरभंगा जिले के सभी प्रखंडों में कुल 2911 ग्राम संगठनों में महिला संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों के संचालन हेतु 25 एलईडी युक्त जागरूकता रथों का उपयोग किया गया, जो गाँव-गाँव जाकर महिलाओं को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से परिचित कराते रहे। एलईडी रथों पर चलचित्रों, ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियों और लाभार्थी महिलाओं की प्रेरणादायक कहानियों के माध्यम से योजनाओं की जानकारी दी गई।
डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी ने कहा कि महिला संवाद कार्यक्रम ने दरभंगा की लाखों महिलाओं को न केवल सरकार की योजनाओं की जानकारी दी, बल्कि उन्हें अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखने और समाधान की दिशा में सोचने का मंच भी दिया। उन्होंने कहा कि लीफलेट व मुख्यमंत्री संवाद पत्र के वितरण से महिलाओं में जागरूकता और विश्वास दोनों बढ़ा है। आज महिलाएं योजनाओं को लेकर अधिक सजग, सक्रिय और आत्मनिर्भर बन रही हैं, जो सशक्त समाज की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
सामाजिक विकास प्रबंधक नरेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि महिला संवाद कार्यक्रम में 6,90,731 जीविका समूह की महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई, जबकि 48,417 गैर-जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं भी इस अभियान से जुड़ीं। इसके अतिरिक्त, 67,576 पुरुषों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता किया।
यह अभियान केवल एक संवाद नहीं रहा बल्कि जनभागीदारी से एक व्यापक जनांदोलन का रूप ले चुका था। गाँवों में जागरूकता रथों के पहुँचते ही उत्सव जैसा माहौल बन जाता था और सभी लोग बड़ी संख्या में इसमें भाग लेते थे।
महिला संवाद कार्यक्रम ने केवल योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित रहकर नहीं, बल्कि यह आम महिलाओं की समस्याओं और आकांक्षाओं को नीतिगत स्तर पर रखने का अवसर बन गया। महिलाओं ने खुले मंच से बुनियादी सुविधाओं जैसे पक्की सड़कों, पक्की नालियों, बिजली की 24 घंटे उपलब्धता, सौर ऊर्जा स्रोतों के विस्तार, पेयजल संकट, खेतों की सिंचाई व्यवस्था, सड़क अतिक्रमण जैसी समस्याओं को रखा। इसके अतिरिक्त, शिक्षा के क्षेत्र में गाँवों में विद्यालय, कॉलेज, डिजिटल लाइब्रेरी, और स्वास्थ्य क्षेत्र में जाँच केंद्र, दवाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति की माँग भी की गई।
रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं ने तकनीकी प्रशिक्षण, आसान ऋण प्रक्रिया, ब्याज दरों में कमी और स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता बताई। कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं ने खाद, बीज, कीटनाशकों की समय पर उपलब्धता, अनुदान, मखाना, मकई, गन्ना और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने तथा पशुपालन के लिए पशु चिकित्सालय व सब्सिडी की माँग की।
महिलाओं ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी आवाज़ बुलंद की। वृद्धा पेंशन में वृद्धि, सामुदायिक भवन, जीविका हाट, विवाह भवन, सभी वर्गों के लिए आवास की आवश्यकता स्पष्ट की गई। साथ ही उन्होंने घरेलू हिंसा, अंधविश्वास, छुआछूत, नशापान, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और अश्लील डीजे गीतों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की।
कार्यक्रम के दौरान जाले प्रखंड की जीविका दीदी आरती देवी द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक निर्माण का कार्य जीविका समूहों को देने की माँग को सरकार द्वारा स्वीकार किया गया है, जिससे पूरे राज्य की सिलाई कार्य से जुड़ी जीविका दीदियों को स्थायी रोजगार मिलेगा। वहीं कई महिलाओं ने बिजली, पानी, नाली, जलजमाव आदि समस्याओं के बारे में बातें रखी थी जिनका समाधान किया जा चुका है।
महिला संवाद के माध्यम से प्राप्त सभी समस्याओं को दो श्रेणियों—छोटी और बड़ी—में बाँटा गया है। छोटी समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर माननीय जिलाधिकारी महोदय के नेतृत्व में त्वरित गति से किया जा रहा है, जबकि बड़ी समस्याओं को संबंधित विभागों और उच्च कार्यालयों को भेजा गया है, जहाँ उन पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है।
संचार प्रबंधक राजा सागर ने कहा महिला संवाद ने दरभंगा जिले में विकास की एक नई आधारशिला रखी है, जहाँ अब आम महिलाओं की समस्याओं, उनकी सोच और उनकी आकांक्षाएं नीति निर्माण की धुरी बन रही हैं। यह संवाद कार्यक्रम केवल विचार-विमर्श का नहीं, बल्कि समावेशी विकास और सामूहिक संकल्प का उदाहरण बन गया है। दरभंगा से यह संवाद अब आदर्श ग्राम के संकल्प से विकसित बिहार की ओर एक सशक्त कदम बन चुका है।
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