टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि भाजपा जनता का विश्वास खो चुकी है। सबका साथ सबका विकास प्रारंभ से ही महज एक जुमला है। बिहार में सत्ता पर पुनः काबिज होने के लिए भाजपा अब हिंदुओं को बाँटकर जातीय सम्मेलन का आयोजन कर रही है। सबका साथ सबका विकास पर अब भाजपा को आस नहीं रहा है।

सांसद आजाद ने कहा कि अलग-अलग जातीय सम्मेलन आयोजित करने का एकमात्र उन जातियों का हित नहीं बल्कि ब्राह्मणों को प्रतिनिधित्व विहीन करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि बिहार के सभी 243 विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की उपस्थिति है। जातिगत जनगणना में भी ब्राह्मण एवं भूमिहार के पिछड़ेपन का जिक्र है। इसके बाद भी विधानसभा के चुनाव में ब्राह्मणों को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता है। इस कारण शासन प्रशासन से ब्राह्मण लगातार पीछड़ रहे हैं। श्री आजाद ने कहा कि ब्राह्मण मतदाताओं के समर्थन से भाजपा सत्ता हासिल कर लेती है। अब समय आ गया है कि ब्राह्मण सोच समझकर भविष्य को देखते हुए मतदान करें।
सांसद आजाद ने कहा कि मिथिला के लोगों को बंगाल में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। बड़ी संख्या में पूर्वांचल के लोग व्यवसाय से जुड़कर अपनी मजबूत स्थिति का एहसास करा रहे है। उन्होंने कहा कि मुझे दरभंगा की जनता ने लोकसभा में तीन बार प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्रदान किया इसके लिए सबो का ऋणी हूँ। दरभंगा की जनता के बीच सुख-दुख में आता भी रहूंगा। सांसद आजाद ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अब उम्र का असर दिखाई देने लगा है। इस मौके का लोग फायदा उठाकर भाजपा उनकी छवि को धूमिल करने में लगी है जो शुरू से उनकी नीती रही है । उन्होंने कहा कि तथा कथित उनके करीबी लोग नीतीश कुमार के पुत्र को राजनीति में आने नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा कि निशांत कुमार को राजनीति में आकर अपने पिता के आदर्शों को आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट लहजे में कहा कि जहाँ जनता के फैसले से 5 वर्षों के लिए कोई विधायक या सांसद चुना जाता है तो वह परिवारवाद का उदाहरण कैसे हो सकता है। लोकतंत्र में परिवारवाद हो ही नहीं सकता।
*कीर्ति आजाद
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