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विश्व ओजोन दिवस पर सी.एम.साइंस कालेज में संगोष्ठी आयोजित

विश्व ओजोन दिवस पर सी.एम.साइंस कालेज में संगोष्ठी आयोजित

विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर सी.एम.साइंस कालेज में मंगलवार को एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘फ्रॉम साइंस टू ग्लोबल एक्शन’ विषय पर महाविद्यालय के पीजी रसायन शास्त्र विभाग के द्वारा आयोजित संगोष्ठी का विधिवत शुभारंभ महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. संजीव कुमार मिश्र, वनस्पति विज्ञानी सह एमएलएसएम कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डा विद्यानाथ झा, बर्सर सह भौतिकी विभागाध्यक्ष डा उमेश कुमार दास एवं आयोजन सचिव सह रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष डा विश्व दीपक त्रिपाठी ने समवेत दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

ओजोन दिवस के लिए इस साल के निर्धारित थीम पर संगोष्ठी के प्रस्तावित विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में डा विद्यानाथ झा ने पावर प्वाईंट प्रेजेंटेशन के द्वारा अपना सारगर्भित विचार रखा। अपने संबोधन में उन्होंने ओजोन परत के महत्व को रेखांकित करते हुए इसके जर्जर होने के कारण पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान भौतिकवादी युग में एयर कंडीशन और रेफ्रिजरेटर के बेतहाशा प्रयोग के कारण क्लोरोफ्लोरो कार्बन नामक रसायन की मात्रा वायुमंडल में अत्यधिक बढ़ जाने से ओजोन परत में होने वाला छिद्र लगातार बढ़ता जा रहा है। इस कारण वातावरण, पर्यावरण और मानव जीवन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने ओजोन परत के जर्जर होने के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों की विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि ओजोन परत में छिद्र के निरंतर बढ़ने के कारण सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर प्रत्यक्ष रूप से पहुंच रही है और इसके कारण त्वचा के कैंसर की बीमारियों का खतरा निरंतर बढ़ता जा रहा है।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य प्रो संजीव कुमार मिश्र ने मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का जिक्र करते हुए बताया कि ओजोन परत को बचाने की दिशा में चल रहे प्रयासों से ओजोन परत की रिकवरी में काफी लाभ हुआ है। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हम सभी को भविष्य में क्लोरोफ्लोरोकार्बन के विकल्प तलाशने के लिए सतत प्रयत्नशील रहने की आवश्यकता है। तभी हम ओजोन परत को उद्देश्यपूर्ण सुरक्षा प्रदान करने में सफल हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि आज के समय जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रही है। इस स्थिति में ओजोन दिवस का महत्व काफी बढ़ जाता है। पर्यावरण की रक्षा करना केवल दुनिया की सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय समझौतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह हम सब की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इससे पहले डा उमेश कुमार दास ने अपने संबोधन में ओजोन परत के संरक्षण पर विज्ञान के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विज्ञान की नई-नई तकनीकें विकसित होने से हम क्लोरोफ्लोरोकार्बन के बेहतर विकल्प की तलाश कर सकते हैं। जिससे ओजोन परत में निरंतर हो रहे छिद्र पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर सक्रिय प्रयास चल रहे हैं, हमें उम्मीद करनी चाहिए कि वर्ष 2067 तक ओजोन परत फिर से अपने पूर्व की स्थिति में आ सकती है।

महाविद्यालय के पीजी रसायन शास्त्र विभागाध्यक्ष सह आयोजन सचिव डा विश्व दीपक त्रिपाठी ने अतिथियों का मिथिला की परंपरा अनुरूप पाग, चादर एवं हरित पौधा प्रदान कर स्वागत किया। संगोष्ठी का विषय प्रवेश कराते हुए उन्होंने बताया कि साल 1987 के बाद से प्रतिवर्ष 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में ओजोन दिवस के अवसर पर आयोजित भाषण, स्लोगन, पोस्टर एवं क्विज प्रतियोगिता में अव्वल आए छात्र-छात्राओं को मेडल एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। भाषण प्रतियोगिता में शांभवी कुमारी ने प्रथम, शबाना कमर ने द्वितीय एवं अंकित राज ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। स्लोगन प्रतियोगिता में सुमैया अख्तर ने प्रथम, राखी कुमारी ने द्वितीय एवं किरण झा ने तृतीय स्थान हासिल किया। पोस्टर प्रतियोगिता में सुमैया अख्तर ने प्रथम, किरण झा ने द्वितीय एवं साक्षी ठाकुर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। क्विज प्रतियोगिता में अंजलि झा ने प्रथम, इकरा फातिमा ने द्वितीय एवं पुरुषोत्तम झा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विभाग की शिक्षिका डा निधि झा के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन विभाग के शिक्षक डा शाकिर अहमद ने किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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