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बेसा के पूर्व महासचिव को राष्ट्रीय पुरस्कार

बेसा के पूर्व महासचिव को राष्ट्रीय पुरस्कार

आपदा रोधी एवं पर्यावरण के अनुकूल समाज निर्माण को कृतसंकल्पित तथा विज्ञान एवं तकनीक के विभिन्न पहलुओं को समाज के अन्तिम पंक्ति के लोगों तक पहुंचाने को कटिबद्ध पथ निर्माण विभाग , बिहार के अधीक्षण अभियंता , बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के पूर्व महासचिव एवं इण्डियन इन्जीनियर्स फेडरेशन (पूर्व) के पूर्व उपाध्यक्ष डा सुनील कुमार चौधरी को आईसीसी राष्ट्रीय पुरस्कार

से नवाजा गया है। यह अवार्ड उन्हे सिविल इंजीनियरिंग, कंकृट टेक्नोलॉजी , डिजास्टर मैनेजमेंट एवं पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध कार्य एवं आपदा रोधी तकनीक को समाज के अंतिम पंक्ति के लोगो तक पहुँचाने के लिए आईसीसी ,नई दिल्ली द्वारा एन एस आइसी एग्जीबिशन कम्प्लेक्स मे आयोजित इंटरनेशनल कौनफ्रेंस ओन ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी एण्ड नोडीग शो के दौरान प्रदान किया गया है।डा चौधरी आईसीसी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले बिहार के पहले अभियंता एवं बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के पहले महासचिव बन गये हैं।

 

डा, चौधरी ने भवन,सड़क एवं पुल के भूकंप रोधी छमता बढ़ाने, पर्यावरण के अनुकूल तकनीक को अपनाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र मे अनेको अभिनव कार्य किये है जो समाज,राज्य एवं देश के विकास मे महत्वपूर्ण योगदान अदा कर सकता है।अवार्ड मिलने पर खुशी जाहिर करते हुए डा चौधरी ने कहा कि यह अवार्ड मुझे आपदारोधी समाज एवं आत्म निर्भर बिहार के निर्माण की दिशा में सार्थक प्रयास करने हेतु प्रेरित करेगा। डा चौधरी अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी एवं सामाजिक संगठनों से जुड़कर भूकंप एवं उससे निपटने के लिए डिजास्टर रेजिलिएन्ट एवं कौस्ट इफेक्टिव टेक्नोलॉजी को समाज के अन्तिम पंक्ति के लोगों तक पहुंचाने का काम करते रहे हैं ।डा चौधरी को 26 अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है एवं 206 शोध पत्र विभिन्न प्रतिष्ठित जर्नल एवं कान्फ्रेस में प्रकाशित हो चुका है ।इस अवसर पर निम्न पंक्तियों के माध्यम से डा चौधरी ने एक खूबसूरत पैगाम देने की कोशिश की-

 

बिहार के हम अभियंता, आसमान है हद हमारी

जानते हैं चाँद सूरज, ज़िद हमारी जद हमारी।

हम वही जिसने समंदर, की लहर पर बांध साधा

हम वही जिनके लिए दिन, रात की उपजी न बाधा।

हम की जो धरती को माता, मान कर सम्मान देते

हम की जो चलने से पहले, मंज़िलें पहचान लेते।

हम वही जो शून्य में भी, शून्य रचते हैं निरंतर

हम वही जो रोशनी रखते, हैं सबकी चौखटों पर

ट्रेन्चलेस टेक्नोलॉजी का पैगाम ले आए हैं हम

हम बिहारी हैं , मगर हर क्षेत्र में छाए हैं हम।

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