भव्य शोभायात्रा के साथ शुरू हुआ 23 वां अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन
भव्य शोभायात्रा के साथ सोमवार को 21 वें अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन की शुरुआत पुनौराधाम में हुई. सीता प्रेक्षागृह से शुरू हुई पारंपरिक शोभायात्रा शहर के मुख्य मार्गो से होते हुए जानकी जन्म भूमि पर जाकर समाप्त हुई. रास्ते में शोभायात्री नगर के लोगों से जनक नंदिनी सीता के प्रसंग में चर्चा करते हुए जय जय सियाराम के जोरदार नारे लगाए.

डा खुशबू झा सुरभि के गाये गोसाउनि गीत से उद्घाटन सत्र की विधिवत शुरुआत हुई. कार्यक्रम का शुभारंभ बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सह नवनियुक्त प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी, सांसद द्वय डॉ गोपाल जी ठाकुर, देवेश चंद्र ठाकुर, विधायक बैद्यनाथ प्रसाद, गायत्री देवी, श्वेता गुप्ता, अनिल राम, पूर्व विधायक, मिथिलेश कुमार, राम नरेश प्रसाद यादव, समाजसेवी प्रो उमेश चंद्र झा, जिला भाजपा अध्यक्ष मनीष कुमार गुप्ता व अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया.
उद्घाटन भाषण करते हुए संजय सरावगी ने कहा कि राम जन्म भूमि पर विशाल मंदिर का निर्माण के बाद जानकी प्राकट्य स्थली पर भव्य मंदिर निर्माण का शुभारम्भ होना निश्चित रूप से गर्व की बात है। अब मैया सीता की जन्म भूमि का उद्धार होना अवश्यंभावी है. उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में स्थित माता सीता के जन्म भूमि के दर्शन के बिना रामलला का दर्शन अधूरा है. क्योंकि बिना सिया के राम स्वयं अधूरे हैं. उन्होंने मां सीता के मातृलिपि मिथिलक्षर की चर्चा करते हुए उपस्थित जनों से अपने घर का नाम अनिवार्य रूप से मिथिलाक्षर लिपि में लिखने का संकल्प लेने का आह्वान करते कहा कि बिना दैनिक प्रयोग में लाए इस धरोहर लिपि को जीवंत बनाए नहीं रखा जा सकता.
मुख्य अतिथि के रूप में अपना विचार रखते हुए दरभंगा के सांसद डा गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि जगत जननी मां जानकी का चरित्र संपूर्ण भारत के सांस्कृतिक चेतना की केंद्रीय भावना में सन्निहित है. पूरी दुनिया में अगर हमारी संस्कृति सर्वश्रेष्ठ संस्कृति के रूप में स्थापित है तो यह भगवान श्रीराम और माता जानकी के द्वारा प्रस्तुत आदर्श उदाहरण के कारण ही है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि माता जानकी के बगैर राम की कल्पना नहीं की जा सकती. क्योंकि भगवान राम ने अपने जीवन में विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए जिस मर्यादा को स्थापित किया वह बिना सीता के सहयोग के संभव नहीं था.
अतिथियों का स्वागत करते हुए महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने मिथिला एवं मैथिली के वर्तमान यथास्थिति की विस्तार से चर्चा की। बैजू ने कहा कि यह सम्मेलन हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ करने के साथ ही मिथिला और अयोध्या के जन-जन को एक बार फिर से सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधने में मील का पत्थर साबित होगा. मौके पर मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पंडित कमलाकांत झा ने जनक नंदिनी सीता की जन्मभूमि मिथिला को निराकार ब्रह्म को साकार करने वाली धरती बताते हुए इसे कुशल व्यवहार के माध्यम से सभ्यता एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का केंद्र बिंदु बताया. मणिकांत झा ने अपने उद्बोधन में मिथिला भूमि को ज्ञान व प्रेम के समन्वय का जीता जागता प्रमाण बताया.
पहले दिन के कार्यक्रम में पुनौरा धाम के महंत कौशल किशोर दास प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य धर्मेंद्र नाथ मिश्र भास्कर ज्योति एवं भास्कर ज्योति को मिथिला रत्न सम्मान प्रदान किया गया वहीं मैथिली क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी, सीतामढ़ी के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर, प्रो काशीनाथ झा, प्रो दयानाथ झा, डॉ संजय कुमार झा, डॉ खुशबू झा सुरभि, प्रो उमेश चंद्र झा, डॉ वरुण कुमार आदि को मैथिली रत्न सम्मानोपाधि से अलंकृत किया गया. मौके पर विधायक सुनील कुमार पिंटू, श्वेता गुप्ता, श्रीमती रेखा गुप्ता, बैद्यनाथ प्रसाद, गायत्री देवी, पंकज मिश्रा, सुधीर चंद्र झा, सत्यप्रिय झा, सुधीर मिश्रा, विद्यापति झा, बीके मिश्रा, डॉ सुधांशु शेखर चौधरी, रंजीत मिश्रा, विनय कुमार मिश्रा एवं डॉ राजेश सुमन को जानकी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया.
इस अवसर पर शंभुनाथ मिश्र के संयोजन एवं मणिकांत झा के संचालन में भव्य कविगोष्ठी का आयोजन किया गया. कविगोष्ठी में महेंद्र नारायण राम, डा बुचरू पासवान, नीलम झा, सुषमा झा, चंद्र मोहन झा पड़वा, कुंज बिहारी मिश्र, डॉ बुचरू पासवान, प्रवीण कुमार झा आदि ने एक से बढ़कर एक भावपूर्ण रचनाओं का पाठ किया.
कार्यक्रम में आकर्षक विद्यापति संगीत समारोह का भी आयोजन किया गया. इसमें कुंज बिहारी मिश्र, डा ममता ठाकुर, डा सुषमा झा, कृष्ण कुमार ठाकुर कन्हैया, केदारनाथ कुमर आदि ने भावपूर्ण प्रस्तुति देकर उपस्थित दर्शकों का दिल जीतने में कामयाबी हासिल की. संगत कलाकारों ने अपनी उंगली का जादू जमकर दिखाया. मौके पर सम्मेलन की स्मारिका पुनौरा एवं डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू की लिखी पुस्तक मैथिली आंदोलनः दशा व दिशा का भी विमोचन किया गया।
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