बीटेक से बॉयलर फार्म तक: रूपा कुमारी की आत्मनिर्भरता की कहानी
सपनों को पंख देती जीविका: रूपा कुमारी बनीं लखपति दीदी
हौसले और मेहनत की मिसाल बनीं रूपा कुमारी
दरभंगा की रूपा कुमारी बनीं ‘लखपति दीदी’, मुर्गी पालन से ग्रामीण उद्यमिता की मिसाल

दरभंगा ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में जीविका परियोजना एक बार फिर अपनी सफलता की कहानी लिख रही है। दरभंगा जिले के तारडीह प्रखंड अंतर्गत पुतई पंचायत की निवासी रूपा कुमारी ने मुर्गी पालन व्यवसाय के माध्यम से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ की है, बल्कि वे आज एक सफल ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
बीटेक जैसी तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद विवाहोपरांत गाँव पहुँची रूपा कुमारी के सामने रोजगार और पहचान की चुनौती थी। पारंपरिक घरेलू भूमिका तक सीमित रहने के बजाय उन्होंने आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। इसी क्रम में वे सुमन जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं, जहाँ समूह बैठकों और दीदियों के अनुभवों ने उन्हें उद्यमिता की ओर प्रेरित किया।
जीविका के सहयोग से रूपा कुमारी ने 50,000 रुपये का ऋण लेकर बॉयलर प्रजाति के मुर्गी पालन व्यवसाय की शुरुआत की। शुरुआती दौर में संसाधनों और अनुभव की कमी के बावजूद उन्होंने धैर्य और सतत प्रयास से व्यवसाय को आगे बढ़ाया। इस दौरान उनके पति सुधीर कुमार सिंह ने मुजफ्फरपुर स्थित प्रशिक्षण केंद्र से छह माह का मुर्गी पालन प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिससे दंपती को व्यवसाय के वैज्ञानिक और तकनीकी पक्षों की बेहतर समझ मिली। पशुधन प्रबंधक श्रेया शर्मा ने भी रूपा कुमारी को मुर्गी पालन से संबंधित तकनीकी जानकारी एवं आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। श्रेया ने बताया कि वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन, समय पर टीकाकरण, संतुलित आहार एवं स्वच्छता के माध्यम से उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि संभव है।
वर्तमान में रूपा कुमारी अपने फार्म में लगभग 2,500 बॉयलर मुर्गों का पालन कर रही हैं। कंपनी द्वारा उन्हें ₹87 प्रति चूजा की दर से चूजे उपलब्ध कराए जाते हैं। 36 से 45 दिनों के पालन-पोषण के बाद मुर्गों का औसत वजन करीब 2 किलोग्राम हो जाता है, जिसे कंपनी द्वारा वापस खरीद लिया जाता है। साफ-सफाई, संतुलित आहार, दवा प्रबंधन और तापमान नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने के कारण उनका फार्म निरंतर बेहतर उत्पादन दे रहा है।
इस व्यवसाय से रूपा कुमारी को वार्षिक 5 से 6 लाख रुपये की आय हो रही है। इससे न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी उन्हें एक सफल महिला उद्यमी के रूप में सम्मान मिल रहा है।
भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए रूपा कुमारी ने बताया कि वे मुर्गी पालन की दो और यूनिट स्थापित करने की तैयारी में हैं। नई यूनिट के बाद वे एक साथ लगभग 10,000 मुर्गों का पालन करेंगी, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होने की संभावना है।
डीपीएम डा० ऋचा गार्गी ने कहा कि जीविका केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम है। जीविका के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और सतत मार्गदर्शन मिलता है, जिससे वे छोटे प्रयासों को बड़े उद्यम में बदल पा रही हैं। रूपा कुमारी जैसी लखपति दीदियाँ इस कार्यक्रम की सफलता का जीवंत उदाहरण हैं।
बीपीएम श्री प्रदीप रॉय ने बताया कि जीविका द्वारा ऐसी मेहनती और उद्यमशील महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी रूपा कुमारी जैसी महिलाओं को तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं अन्य आवश्यक सहायता निरंतर प्रदान की जाएगी।
रूपा कुमारी की यह सफलता कहानी जीविका परियोजना के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।
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