पं चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’ की पुण्यतिथि पर विद्यापति सेवा संस्थान ने दी श्रद्धांजलि

मैथिली साहित्य के शीर्ष पुरूष पं चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’ की छठी पुण्यतिथि पर बुधवार को विद्यापति सेवा संस्थान की ओर से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सभा में उनके चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। संस्थान की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि अमर जी बहुविधा में रचनाशील उच्च कोटि के साहित्यकार थे। मैथिली साहित्य जगत के महा मनीषी एवं विद्यापति सेवा संस्थान के आजीवन अध्यक्ष रहे पं चन्द्रनाथ मिश्र अमर अपनी कृतियों में सदा जीवंत रहेंगे। विद्यापति सेवा संस्थान के प्रधान कार्यालय में आयोजित श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए पीजी प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो अयोध्या नाथ झा ने कहा कि अमरजी एकमात्र ऐसे साहित्यकार हुए, जिनके पास मिथिला, मैथिली व मैथिल के विकास के चिंतन की समग्र सामग्री उपलब्ध थी। उन्होंने अमर जी के कृतित्व पर आधारित शोध कार्य को बढ़ावा देने को उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
मौके पर उपस्थित पीजी मैथिली विभाग के सेवानिवृत अध्यक्ष प्रो रमेश झा ने अमरजी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व की विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें सरल व्यक्तित्व, विलक्षण कृतित्व एवं सामाजिक प्रवृत्ति का निष्णात विद्वान बताया। गीतकार डा चन्द्रमणि झा ने अमर जी को मैथिली साहित्य के विकास की दिव्य दृष्टि से संपन्न कालजयी साहित्यकार बताते हुए मैथिली साहित्य के भंडार को भरने में उनके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया।
मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने अमरजी को विभिन्न विधाओं में पारंगत प्रबुद्ध साहित्यकार होने के साथ-साथ एक कुशल रंगकर्मी बताते कहा कि मातृभाषा मैथिली की समृद्धि के लिए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।मौके पर विनोद कुमार झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, डा गणेश कांत झा, हरिकिशोर चौधरी, चन्द्रमोहन झा, नन्द कुमार झा, डा अजय किशोर झा, आशीष चौधरी, प्रो अरुण सिंह आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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