छात्र सेना के विश्वविद्यालय अध्यक्ष सह परिषद सदस्य प्रशांत राय ने बताया की भारत में अब तक तकरीबन 50 अस्पतालकर्मी (डॉक्टर व नर्स) कोरोना से संक्रमित हो चुके

हैं। ये सारे लोग कोरोना से संक्रमित बीमारों का इलाज करने के दौरान हुए हैं। यानी अस्पतालों में संक्रमण को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतेज़ाम नहीं हैं। डॉक्टर्स शुरुआत से ही इस बात की मांग कर रहे हैं कि उन्हें कोरोना संक्रमित मरीज़ों का इलाज करने के लिए सुरक्षित उपकरण मुहैया कराए जाएं।
श्री प्रशांत ने बताया की बिहार में तो डॉक्टर्स इस मांग को लेकर हड़ताल तक कर चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर्स को उपकरण मुहैया नहीं कराए जा रहे। सरकार डॉक्टर्स की जान ख़तरे में डालकर इवेंट्स के ज़रिए उनका मनोबल बढ़ाने की दम भर रही है।
वह कभी ताली-थाली तो कभी मोमबत्ती के ज़रिए डॉक्टर्स का मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहें है। लेकिन क्या ऐसा संभव है, डॉक्टर्स को जिस चीज़ की सख़्त ज़रूरत है, उसे मुहैया न कराने के बजाए इवेंट का आयोजन कर उनका मनोबल बढ़ाया जा सकता है?
क्या ताली-थाली पीटने और मोमबत्ती जलाने से डॉक्टर्स को कुछ मदद मिल सकती है? क्या इससे वह मरीज़ व डॉक्टर अपनी जान बचा सकते हैं? निश्चित तौर पर नहीं। उन्हें कोरोनो संक्रमित मरीज़ो का इलाज करने के लिए पी०पी०इ० सूट, मास्क, ग्लव्स और सेनिटाइज़र जैसी सुरक्षा सामग्री की ज़रूरत है, जो सरकार उन्हें मुहैया नहीं करा रही।
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