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संपादकीय अजित कुमार सिंह

मधुबनी  तंबाकू, गुटखा और पान मसाले के सेवन से भी कोरोना का संक्रमण हो सकता है।

बिहार में 25 फ़ीसदी लोग करते हैं तंबाकू का सेवन
– तंबाकू के सेवन से कोरोना संक्रमण का खतरा
– बिहार में 1.75 करोड़ लोग करते हैं तंबाकू का सेवन

मधुबनी  तंबाकू, गुटखा और पान मसाले के सेवन से भी कोरोना का संक्रमण हो सकता है।

संपादकीय अजित कुमार सिंह

चिकित्सको के अनुसार कोरोना के संदिग्ध व संक्रमित व्यक्ति के तम्बाकू खाने के बाद जहां- तहां थूकने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बिहार में इसकी सम्भावना बढ़ जाती है. एक आंकड़ा के अनुसार यहां 1.75 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। जो नीदरलैंड जैसे देश की पूरी जनसंख्या के बराबर है। भारत सरकार ने भी इसे लेकर अलर्ट करते हुए सार्वजनिक स्थानों पर इसका प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया है, तथा लोगों से अपील की है, कि वे तंबाकू का सेवन ना करें, और ना ही सार्वजनिक स्थानों पर थूकें।तंबाकू उत्पादों गुटखा, पान मसाला, तंबाकू के सेवन के साथ पान और अन्य चबाने वाले तंबाकू उत्पाद और सुपारी लार के उत्पादन को बढ़ाते हैं। जिसके बाद थुकने की बहुत तीव्र इच्छा होती है। सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से कोरोना वायरस बढ़ सकता है. इसलिए महामारी के बढ़ते खतरे के मद्देनजर लोग तंबाकू उत्पादों के सेवन और स्थानों पर थूकने से परहेज करें।

कोरोना सुधरने का भी दे रहा मौका:

कोरोना का भय और लॉक डॉन तंबाकू और गुटखा के शौकीनों को इसे छोड़ने का मौका भी दे रहा है। संक्रमण के भय से लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हुए है. सफाई पर ध्यान दे रहे है. मौजूदा स्थिति में बच्चे भी इसका अनुपालन कर रहे है. घर के सदस्य बुजुर्गों पर ध्यान दे रहे हैं. इधर लाकडाउन के कारण इस तरह की दुकान बन्द है. लोग घर से बाहर नही निकल पा रहे है. इस स्थिति में कई ऐसे लोग है जो अपने गलत आदत को छोड़ने का प्रयास कर रहे है. संक्रमण के मद्देनजर लगाया गया लाकडाउन उनके लिए सकारात्मक विचार प्रस्फुटित कर रहा है. लिहाज़ा कई लोगो ने तम्बाकू सेवन करना छोड़ दिया है।

क्या कहते हैं सिविल सर्जन :
सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ.किशोर चन्द्र चौधरी कहते हैं, कि युवाओं को तंबाकू सेवन से बचने की जरूरत है, विशेषकर चबाने वाले तंबाकू से अधिक परहेज की जरूरत है, कोरोना के संक्रमण से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है जो कोरोना वायरस चपेट में आने पर जान – लेवा हो सकता है, लगभग 90% मुंह के कैंसर के पीछे चबाने वाले तंबाकू कारण बनते हैं।

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