दरभंगा शीशोपश्चमी के मजदूर काम की तलाश में भटते फिर रहे हैं। उसे मजदूरी नहीं मिलने पर परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न होने के कगार पर पहुँच

चुकी है दुकानदार इन्हें उधारी देने से मना कर दिया है . यहाँ ऐसे करीब 90 परिवार हैं जो रोज कमाकर परिवार का भरण पोषण करता है। ये सभी राज मिस्त्री से लेकर लेवर का काम करता है। कोई ऑटो चलाकर पेट भरता है तो कोई चाय बेचकर परिवार चलाता है। इन दिनों लॉकडाउन लागु रहने से सारा काम ठप्प परा है। मालिक अपना काम कराना बंद कर चुका है तो मजदूरों को बीमारी का डर लगा रहता है। सरकार की तरफ से अभीतक इन मजदूरों को राहत मुहैया नहीं कराया जा सका। इन सबों के पास 22 मार्च से लगातार विना काम के बैठकर समय बीताना पर गया है। ऐसी परिस्थिति से निपटना अब इन्हें मुश्किल सा लगने लगा है। टोले के स्व दमरी सहनी के पुत्र अनील सहनी रोज मजदूरी करने शहर में जाता था। अब उसे काम नहीं मिलने से घर पर रहना पर रहा। मजदूरी के पैसे से वह अपने बाल बच्चे का पेट भरता था। उनका कहना है कि काम नहीं मिलता . स्व राजगीर पासवान के पुत्र रविशंकर पासवान के परिवार में तीन बच्चे माँ बहन एवं पत्नी है। वह रोज दिहाड़ी के पैसे से सभी का भरण पोषण कर लेता था लेकिन मजदूरी नहीं मिलने से परेशान रहता है। रविशंकर का कहना है कि अब तो परिवार के सामने भुखमरी आ गया है। इसी तरह शैलेंद्र कुमार पासवान टेम्पु चलाकर पेट भर लेता था .लेकिन बंद हो जाने से बाल बच्चे परिवार को भूखों रहना पर रहा . इस विपदा में कोई खोजने वाला तक नहीं है। वहीं जितेंद्र पासवान पप्पु पासवान राज नारायण पासवान दिलीप पासवान नरेश पासवान श्रीनारायण पासवान लालबाबू पासवान आदि दर्जनों लोग राज मिस्त्री आदि का काम करता है। इन सभी का कहना है कि इतने दिन बैठकर खाये हैं। कर्य भी हो गया है अब तो दुकानदार उधार सामान तक नहीं दे रहा है। बाल बच्चे भुखमरी के
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