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नई दिल्ली  पूर्व सांसद कीर्ति झा आज़ाद ने कहा 14 मार्च को देशव्यापी लॉक डाउन की घोषणा की गई, घोषणा के बाद देश भर की फैक्ट्रियों में ताले लटक गई और परिवहन व्यवस्था ठप हो गई।

नई दिल्ली  पूर्व सांसद कीर्ति झा आज़ाद ने कहा 14 मार्च को देशव्यापी लॉक डाउन की घोषणा की गई, घोषणा के बाद देश भर की फैक्ट्रियों में ताले लटक गई और परिवहन व्यवस्था ठप हो गई, देशभर के कई राज्यों में बिहार के लाखों श्रमिक काम के लिए प्रवास में थे। परंतु फैक्ट्री बंद होने के कारण इनके सामने खाने-पीने का संकट मुंह बाए खड़ा हो गया, इस मुश्किल घड़ी में हमारे श्रमिक भाइयों को बिहार सरकार से काफी उम्मीदें थी। नितीश कुमार जी लोक डाउन मैं प्रवासी मजदूरों को वापस लाने में बहुत देरी कर दी जिसके कारण लोग पैदल ही निकल पड़े, जो सरकार की उदासीनता को दिखाता है । हमारी बिहार सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही , जब गृह मंत्रालय की गाइडलाइन जारी की गई जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार अपने लोगों को अपने गृह राज्य लाने के लिए प्रयास कर सकती हैं। इस पर माननीय उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी द्वारा मीडिया के सामने व्यक्तित्व दिया गया है कि हमारे पास बसों की कमी है। इससे यह स्पष्ट नजर आता है कि बिहार में विकास की बहार एक छलावा मात्र है । मुसीबत के समय ही विकास की परख होती है । जिसकी पोल इस लॉक डाउन के समय खुल चुकी है। हमारे श्रमिक भाई हजारों किलोमीटर की पैदल कष्टदायक यात्रा करके बिहार अपने गृह राज्य पहुंच रहे है । इनके इलाज तथा खान पीन की उचित व्यवस्था करने में भी राज्य सरकार सक्षम दिखाई नहीं दे रही है।
बिहार में 17 मई तक 46464 सैंपलों का टेस्ट हुआ है, जो बिहार की कुल आबादी का 0.044 प्रतिशत ही है। जो शर्मनाक है।
दरभंगा जिले के सिमरी बाजार थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने क्वारंटाइन सेंटर के एक कमरे में गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली, क्वारंटाइन सेंटर आत्महत्या जैसी वारदातें क्यों हो रही है। इसका जवाब राज्य सरकार को देना चाहिए। राष्ट्रीय आपदा के समय बिहार राज्य कितना असक्षम है । राज्य सरकार अपने नागरिकों के साथ खड़ी नहीं दिख रही है। यह डबल इंजन की सरकार सिर्फ कोरी कल्पना करा सकती है, हमने कई अपने प्रवासी मजदूर भाइयों से बात की है ,उनकी हर संभव मदद की, सरकार अपने कर्तव्य से पीछे कैसे हट रही है।
दिल्ली से दरभंगा की यात्रा करने वाली दरभंगा की बेटी ज्योति पासवान तमाचा है। सरकार के मुंह पर जो मजबूरी में अपने वृद्ध बाप को साइकिल पर बिठाकर 1500 किलोमीटर की यात्रा की, सरकार के मंत्री, विधायक , सांसद उसकी तारीफ कर रहे हैं या अपनी सरकार की नाकामी को को छिपा रहे हैं। जनता को उनके जाल में नहीं आना चाहिए और प्रश्न पूछना चाहिए । मैं ज्योति के साहस की सराहना करता हूं लेकिन सरकार की नाकामी को कामयाबी दिखाने के के प्रयास की मैं निंदा करता हूं।

(कीर्ति आज़ाद)

एडिटर अजित कुमार सिंह  (दरभंगा news 24 live )

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