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पर्यावरण संरक्षण के लिए सी एम साइंस कॉलेज में संगोष्ठी व पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित मानव

पर्यावरण संरक्षण के लिए सी एम साइंस कॉलेज में संगोष्ठी व पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित

मानव

रिपोर्टर गुड्डू कुमार ठाकुर

जीवन प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है। हजारों वर्षों से हम प्रकृति पर आश्रित रहते आये हैं। बावजूद इसके पिछले कुछ दशकों से हमने आवश्यकता से कहीं अधिक प्राकृतिक सम्पदाओं का दोहन करना शुरू कर दिया है। औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण की आड़ में जमकर प्राकृतिक संपदाओं को तहस-नहस करते हुए पर्यावरण को नुकसान पहुंचा या गया। जिस कारण तापमान में बढोत्तरी, ओजोन परत में छेद होना और इसके साथ ही बाढ़ और सूखे जैसी समस्याएं जटिल होती गई। सभी जानते हैं कि प्रकृति के बिना मानव जीवन संभव नहीं है। ऐसे में प्रकृति के संरक्षण के लिए सभी को कृतसंकल्प होना समय की मांग है। अगर हम सभी इसी तरह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब पृथ्वी का विनाश होने से कोई नहीं बचा सकता। उक्त बातें सीएम साइंस कॉलेज में शुक्रवार को विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में महाविद्यालय की एनएसएस इकाई एवं एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना के तत्वावधान में आयोजित पर्यावरण जागरूकता संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए रसायन विभागाध्यक्ष-सह-आईक्यूएसी समन्वयक डॉ अजय मिश्र ने कही।
संगोष्ठी में अपना विचार रखते हुए महाविद्यालय के बर्सर डॉ अशोक कुमार झा ने कहा कि यदि हम सब पर्यावरण असंतुलन के भयानक विनाश से बचना चाहते हैं और हमारी आने वाली पीढ़ी को एक खुशनुमा स्वच्छ वातावरण देना चाहते हैं तो, हम सबको मिलकर इस भयानक समस्या से लड़ने के लिए कमर कसकर तैयार होना पड़ेगा और पर्यावरण को संरक्षित व सुरक्षित रखने के लिए मिलजुलकर प्रयास करना होगा।
भौतिकी विभाग के शिक्षक डॉ अजय कुमार ठाकुर ने कहा कि पर्यावरण की चिंता करने वाले और उसे लेकर अपने स्तर पर लगातार प्रयास करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए लॉक डाउन का यह समय आंतरिक खुशी प्रदान करने वाला रहा है। प्रकृति साफ हुई और नदियां, समद्र, जीव-जंतु सभी के जीवन में एक हरियाली लौटी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एकजुट होकर समेकित प्रयास करना समय की मूलभूत जरूरत है।
पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों एवं विश्व पर्यावरण दिवस के मौजूदा साल की थीम पर विस्तार से चर्चा करते हुए मैथिली विभागाध्यक्ष एवं महाविद्यालय के एनएसएस पदाधिकारी डॉ सत्येंद्र कुमार झा ने कहा कि इस दिवस को मनाने के लिए इस साल का थीम ‘प्रकृति के लिए समय’ रखा गया है। जिसका मकसद पृथ्वी और मानव विकास पर जीवन का समर्थन करने वाले आवश्यक बुनियादी ढांचे की ओर आम लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने कहा कि लोगों में पर्यावरण जागरूकता को जगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा संचालित विश्व पर्यावरण दिवस दुनिया का सबसे बड़ा वार्षिक आयोजन है। इसका मुख्य उद्देश्य हमारी प्रकृति की रक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाना और दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों को देखना है।
आइक्यूएसी सहायक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि पर्यावरण पृथ्वी पर स्वस्थ जीवन का अस्तित्व बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है । लिहाजा, पर्यावरण को स्वस्थ व प्रदूषण मुक्त रखने के लिए हमें अपने स्वार्थ को त्यागना और गलतियों को सुधारना होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के दौरान प्रकृति का नया रूप सामने आया है, जो बताता है कि यह दुनिया बहुत खूबसूरत है और इसे पर्यावरण को बेहतर बनाकर और सुंदर बनाया जा सकता है।
लेखापाल शिवशंकर झा ने कहा कि वन हमारी भूमि के फेफड़े हैं। यह हवा को शुद्ध करते हैं और लोगों को नई ताकत देते हैं। वहीं, लेखा सहायक रोहित कुमार झा ने पर्यावरण सुधारने और इसे बिगाड़ने के लिए मानव जाति को जिम्मेदार ठहराया।
कार्यक्रम में संत कबीर एवं जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही महाविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया गया। कार्यक्रम में चन्द्रकांत चौधरी, दिलीप मंडल, रामशंकर भंडारी आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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