17 जून से सत्र स्थल पर लगेंगे जापानी इंसेफेलाइटिस के टीके
– कार्यपालक निदेशक ने पत्र लिख सिविल सर्जन को दिया निर्देश
– 15 साल तक के बच्चों का होगा टीकाकरण
– कोविड-19 प्रोटोकॉल का करना होगा पालन

वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के कारण जिले में 23 मार्च से टीकाकरण स्थगित कर दिया गया था जिसे भारत सरकार के निर्देश के आलोक में 06 मई से कोविड-19 संक्रमण के बचाव के निर्देश का अनुपालन करते हुए प्रारंभ कर दिया गया है.
कोविड-19 के अनिश्चितता को देखते हुए कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने सिविल सर्जन डॉक्टर सुनील कुमार झा को पत्र लिख निदेश दिया है, कि कोविड-19 संक्रमण के बचाव के निर्देश का अनुपालन करते हुए 17 जून से जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण सत्र स्थल पर प्रारंभ किया जाए।
पत्र में बताया गया है कि टीकाकरण स्थल पर एक महीने में तीन सत्र का आयोजन कर 01 से 05 साल तक के बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका लगाकर टीकाकृत किया जाए। इसके लिए प्रत्येक सत्र पर 10 वायल जे.ई. वैक्सीन दिया जाएगा. टीकाकरण के लिए शारीरिक दूरी का अनुपालन करना अनिवार्य होगा विद्यालय के संचालन प्रारंभ होने के बाद 06 से 15 साल तक के बच्चों का विद्यालय में अभियान चलाकर टीकाकृत किया जाएगा।
टीकाकरण प्रारंभ करने के लिए दिया गया आवश्यक निर्देश:
डीआईओ डॉ. एसके विश्वकर्मा ने बताया टीकाकरण प्रारंभ करने के पूर्व टीकाकर्मी को प्रशिक्षण दिया जाएगा, टीकाकरण सत्र पर स्थाई एवं बाह्य टीकाकरण सत्रों पर जेई टीकाकरण संबंधित टैली सीट दिया जाएगा सभी टीके का आंकड़ा इसी टेली सीट में संधारित किया जाएगा नियमित टीकाकरण के लिए टैली में जे.ई. के आच्छादित बच्चों के आंकड़े का संधारण नहीं किया जाएगा।
टीकाकरण सत्र पर जे.ई. टीकाकरण कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा, जिस बच्चे का टीकाकरण किया जाएगा उसे जे.ई. टीकाकरण कार्ड दिया जाएगा।
किया जाएगा प्रचार-प्रसार:
जे.ई (जापानी इंसेफेलाइटिस) के प्रचार प्रसार के लिए बैनर होल्डिंग का प्रयोग किया जाएगा कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सभी बच्चों का टीकाकरण किया जाना है। कचरे का निस्तारण सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के नियम अनुसार किया जाएगा।
क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस:
इन्सेफेलाइटिस को जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है, यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वायरल संक्रमण के कारण होता है यह संक्रमण ज्यादा गंदगी वाली जगह पर पनपता है साथ हा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। हर साल बिहार समेत कई राज्यों में इस बिमारी के कारण नवजात शिशुओं के साथ बच्चों की मृत्यु हो जाती है ।
जपानी इन्सेफेलाइटिस के लक्षण
जापानी इन्सेफेलाइटिस में बुखार होने पर बच्चे की सोचने, समझने, और सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है. तेज बुखार के साथ बार- बार उल्टी होती है. यह बिमारी अगस्त , सितंबर और अक्टूबर माह में ज्यादा फैलता है और 1 से 15 साल की उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है.
जापानी इन्सेफेलाइटिस से बचाव के उपाय
नवजात बच्चे का समय से टीकाकरण कराएं , साफ सफाई का ख़ास ख्याल रखे , गंदे पानी को जमा ना होने दे साथ ही साफ और उबाल कर पानी पियें, बारिश के मौसम में बच्चों को बेहतर खाना दे. हल्का बुखार होने पर डॉक्टर को दिखाए।
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