सुशासन में पंजिकृत मदरसों पर आफत, भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे वत्र्तमान अध्यक्षः नजरे आलम
मुख्यमंत्री

रिपोर्ट गुड्डू कुमार ठाकुर
एवं शिक्षा मंत्री बिहार से बेदारी कारवां ने पत्र लिख कर अध्यक्ष के भ्रष्टाचार की जांच का किया मांग
दरभंगा- सुशासन की सरकार में पंजिकृत मदरसों के शिक्षकों की हालत रोजाना बिगड़ती जा रही है और इसकी कोई सुद्धी लेने वाला नहीं है। बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना को भ्रष्टाचार से पाक करने के लम्बे चैड़े दावे के बीच भ्रष्टाचार शबाब पर है और इसकी सजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रही है। आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवां के अध्यक्ष नजरे आलम ने कहा कि पूरे बिहार में पंजिकृत मदरसों के शिक्षक तंख्वाह पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। बुहत सारे शिक्षकों को छः से आठ माह की तंख्वाह नहीं मिली है जिस कारण भुखमरी की नौबत आ गई है। दूसरी ओर बहुत से मदरसों को जांच के दायरे में लाकर मदरसों के शिक्षकों को तंख्वाह से महरूम रखा जा रहा है। मदरसा बोर्ड के वत्र्तमान अध्यक्ष अब्दुल कयुम के तानाशाही रवैये और जुल्म-व-सितम के शिकार शिक्षकों का यह हाल है कि अध्यक्ष के खौफ से अपनी शिकायत भी दर्ज कराने से डरते हैं। नजरे आलम ने कहा कि कुछ लोगों को खड़ा करके मदरसों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जाती है और फिर जांच के नाम पर पैसों के लेन देन का खेल शुरू हो जाता है और इस दौरान गरीब शिक्षक पर ही मार पड़ती है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष सारे नियम कानून को ठेंगा दिखाते हुए मदरसे का पंजिकृत रद्द कर देते हैं (जिसका उन्हें कोई लीगल अधिकार नहीं है) जब्कि उन्की कोशिश यह होनी चाहिए कि अधिक से अधिक मदरसों को पंजिकृत किया जाए। लेकिन अध्यक्ष खुदको नियम कानून से उपर समझते हुए एकतरफा कार्रवाई करते हुए मदरसों को खत्म करने का खेल कर रहे हैं और इसमें उन्हें बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्ण नन्दन वर्मा का समर्थन भी प्राप्त है जब्कि मुख्यमंत्री खामोश तमाशायी बने हुए हैं। यही कारण है कि अदालती हुक्म के बावजूद अध्यक्ष का मनमाना रवैया जारी है। श्री आलम ने बताया कि अध्यक्ष शिक्षकों को परेशान करने का कोई मौका नहीं जाने देते और यही कारण है कि कोई भी शिक्षक अपनी शिकायत दर्ज कराने से पहले एक हजार बार सोचता है। दूसरी ओर बाज शिक्षक की मानें तो हर जिला में अपने शिक्षकों में से ही कुछ लोग दलाली का काम कर रहे हैं, जो लोग बड़ी बड़ी रिश्वतें देते हैं उनके मदरसे की जांच भी आसानी से हो जाती है और उन्हें तंख्वाहें भी मिल जाती हैं लेकिन जो ऐसा नहीं करते वह दर-दर भटकते फिरते हैं। डीपीओ आॅफिस दलाली का अड्डा बन गया है लेकिन अध्यक्ष को इससे कोई मतलब नहीं है, उन्हें शिक्षकों पर धौंस जमाने और सरकार को खुश करने के अलावह किसी बात से मतलब नहीं है, अगर अध्यक्ष के अंदर अपने पद की कोई गरिमा होती तो वह मदरसों की राह में रूकावटें पैदा करने की जगह उन्की राहें आसान करते लेकिन ऐसा लग रहा है कि इनका मकसद ही मदरसों को खत्म करना और शिक्षकों को जलील (परेशान) करना है। श्री आलम ने शिक्षा मंत्री से प्रश्न किया के आखिर बोर्ड अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती जो मदरसों को तबाह करने पर तुला हुआ है और जिसके संरक्षण में रिश्वत का बाजार गर्म है। उन्होंने मांग किया कि मदरसा बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष अब्दुल कयुम को निलंबित करके उसके खिलाफ निष्पक्ष जांच की जाए ताकि मदरसों और शिक्षकों को उनका हक मिल सके। वत्र्तमान अध्यक्ष के पद पर रहते हुए जांच भी निष्पक्ष नहीं हो पाएगी। नजरे आलम ने मुख्यमंत्री बिहार नीतीश कुमार एवं शिक्षा मंत्री कृष्ण नन्दन वर्मा को पत्र लिखकर मांग किया कि अध्यक्ष की जांच के साथ ही शिक्षकों की समय पर तंख्वाह अदायगी को यकीनी बनाया जाए क्योंकि ये उन्का हक है भीख नहीं है। अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ जल्द ही इसके खिलाफ राज्य भर में जबर्दस्त आन्दोलन करेगा।
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