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डॉ एस के जैन व सुशांत को विद्यापति सेवा संस्थान ने दी श्रद्धांजल

डॉ एस के जैन व सुशांत को विद्यापति सेवा संस्थान ने दी श्रद्धांजलि
आंख,

दरभंगा news 24 live

कान, नाक एवं गला रोग के जानेमाने विशेषज्ञ डॉ एस के जैन के निधन पर दिवंगत आत्मा की पुण्य स्मृति में सोमवार को विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में शोकसभा आयोजित की गई। मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा की अध्यक्षता में आयोजित शोक सभा में उनके कृतित्व एवं व्यक्तित्व की विस्तार से चर्चा करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डाॅ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने उन्हें सामाजिक सरोकारों से जुड़ा चिकित्सक बताते हुए कहा कि उनके जाने से अपनी मधुर वाणी व आत्मीय संवाद से मरीजों में जान फूंकने वाला चिकित्सक हमसे जुदा हो गया।
वरिष्ठ कवि मणिकांत झा ने उन्हें गरीबों का मसीहा व मानवता का पुजारी बताते हुए कहा कि डीएमसीएच में ईएनटी विभाग के अध्यक्ष के रूप में अपने योगदानों के लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे।
एमएलएसएम काॅलेज के प्रधानाचार्य डॉ विद्यानाथ झा ने उन्हें सामाजिक एवं सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़ा चिकित्सक बताया।
संस्थान के सचिव प्रो जीवकांत मिश्र ने उनके चिकित्सा एवं सामाजिक क्षेत्र में दिए योगदानों की चर्चा करते हुए उनके निधन को सामाजिक सरोकारों से जुड़े चिकित्सकों के एक युग का अवसान सरीखा बताया। मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि भारत एवं नेपाल में आंख, कान, नाक एवं गला रोग के विशेषज्ञ के रूप में विशेष रूप से प्रतिष्ठित होने के बावजूद उनमें घमंड का लेश मात्र नहीं था और वह अपने मरीजों से इतनी आत्मीयता से पेश आते, कि गंभीर से गंभीर मरीज भी उनके पास आकर क्षण भर के लिए अपना दुख भूल जाता था और इसका व्यापक असर मरीजों पर होता था।
अध्यक्षीय संबोधन में पं कमलाकांत झा ने मिथिला के विकास में उनके सामाजिक अवदानों को रेखांकित करते कहा कि वह सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था मिथिलांचल विकास परिषद से न सिर्फ आजीवन जुड़े रहे, बल्कि डॉ एन पी मिश्रा एवं डाॅ नवाब सरीखे अपने समकालीन चिकित्सकों के साथ मिलकर सामाजिक विकास के रास्ते मिथिला के विकास की नींव खड़ा करने में उनका विशेष योगदान रहा। इसके साथ ही, रोटरी क्लब सरीखे सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर गरीबों के हित के लिए किए कार्यों के लिए वे हमेशा यादों में बने रहेंगे।
मौके पर मिथिला के उभरते सितारे सुशांत सिंह राजपूत के असामयिक निधन पर भी दुख प्रकट किया गया। वक्ताओं ने उनके निधन को मिथिला एवं सिने जगत के लिए अपूर्णीय क्षति बताया।
शोक सभा में उनके चित्रों पर माल्यार्पण करने के बाद दो मिनट का मौन रखकर दोनों दिवंगत आत्माओं के प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई । साथ ही, दुख की इस घड़ी को सहन करने की उनके परिजनों को शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की गई। मौके पर डॉ गणेश कांत झा, प्रो विजय कांत झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, विनोद कुमार झा, आशीष चौधरी, जयनारायण साह, डॉ उदय कांत मिश्र, चंदन सिंह, मेघानंद झा, राजाराम पासवान आदि उपस्थित हुए।

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