लनामिवि प्रशासन की कथनी और करनी का फर्क फिर हुआ उजागर: डॉ बैजू

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय एवं इसके अंगीभूत महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के मई माह के वेतन मद की राशि अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह में ही सरकार द्वारा निर्गत कर दिए जाने के बावजूद इसके भुगतान में हो रही अनावश्यक देरी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के कथनी और करनी के फर्क की एक बार फिर से पोल खोल कर रख दी है। उक्त बातें विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सिंडीकेट सदस्य डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कही। मंगलवार को एक बयान जारी कर उन्होंने कहा कि इससे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के सामने अनावश्यक शर्तें थोपकर मार्च एवं अप्रैल माह के वेतन व पेंशन के भुगतान में देरी की और अब आन्दोलनरत शिक्षकों से वार्ता के क्रम में मई माह के वेतन का भुगतान मई महीने में ही कर दिए जाने की कुलपति एवं कुलसचिव की घोषणा के बावजूद इसे अब तक लटका कर रखा जाना अत्यंत हास्यास्पद है।
उधर, लनामिवि के एक अन्य सिंडीकेट सदस्य डाॅ धनेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा है कि सरकार द्वारा मई माह के वेतन का भुगतान ईद के मौके पर ही करने का आदेश हुआ था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के कानों पर इस आदेश को लेकर कोई असर नहीं हुआ और कोरोना महामारी के समय आर्थिक तंगहाली झेल रहे विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारियों सहित पेंशनरों को अपनी ईद फीकी मनाने को मजबूर होना पड़ा। उन्होंने शिक्षकों एवं कर्मचारियों के हित के मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा लापरवाहीपूर्ण रवैया अपनाए जाने पर गहरी नाराजगी जताई है।
विश्वविद्यालय के दोनों सिंडीकेट सदस्यों ने शिक्षकों एवं कर्मचारियों सहित पेंशनरों के मई माह के वेतन एवं पेंशन सहित बकाया राशि के भुगतान में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बरती जा रही लापरवाही के मद्देनजर कुलपति, कुलाधिपति एवं राज्य सरकार से इस मसले में त्वरित संज्ञान लेते हुए अविलंब भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में पहल करने की अपील की है।
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