गर्भवती महिलाओं में एनीमिया खतरनाक, जच्चा बच्चा की जान को रहता है खतरा
पौष्टिक
आहार व आयरन गोली हैं कारगर
गर्भावस्था में 180 आयरन की गोली तथा 180 कैल्शियम की गोली खाएं – डॉ. मिश्रा
लक्षण दिखें तो हो जाएँ सर्तक
एनएफएचएस 4 की रिपोर्ट में 54 फीसदी गर्भवती महिलाएं जिले में एनीमिक
मधुबनी, 7 अगस्त:
वैश्विक महामारी कोरोना ने दूसरी आवश्यक स्वास्थ्य मुद्दों से हमारा ध्यान खींचा है. लेकिन इस समय में संक्रमण से बचाव के साथ साथ हमें अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की ओर भी से सजग रहना है. इनमें गर्भवती महिलाओं से जुड़ी समस्याएं व जटिलताएं शामिल हैं जिसका ससमय प्रबंधन आवश्यक है. इनमें से एक है- एनीमिया, जो गर्भवती महिलाओं की प्रमुख व आम समस्या है. इसका सही समय पर पहचान कर, सही पोषण तथा डॉक्टर से सलाह लेकर निजात पाई जा सकती है।
राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वे (एनएफएचएस 4) की रिपोर्ट के अनुसार जिला में 15 से 49 वर्ष की 54 फीसदी गर्भवती महिलाओं को एनीमिया रहता है. जबकि इसी आयुवर्ग की कुल 62 फीसदी महिलाएं एनीमिया पीड़ित हैं.
एनीमिया के दुष्प्रभाव को जानना जरूरी:
खून में आयरन यानि लौह तत्व की कमी एनीमिया कहलाता है. रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाने पर शरीर में ऑक्सीज़न का प्रवाह बाधित होता है. गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, प्रसव के दौरान या इसके बाद कई जटिलताओं व जोखिम को जन्म देता है. जैसे समय से पूर्व प्रसव का दर्द, जन्म के समय शिशु का वजन कम होना, कमजोर शिशु, मृत शिशु का जन्म व विकलांगता तथा नवजात की मृत्यु जैसे खतरे बढ़ जाते हैं. इसके साथ ही गर्भावस्था में संक्रमण का भी खतरा रहता है.इसलिए बीमारियों से बचाव करना भी गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत जरूरी है.
पौष्टिक आहार व आयरन गोली हैं कारगर:
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवृत्ति मिश्रा ने बताया गर्भवती महिला का हर माह प्रसव पूर्व जांच आवश्यक है. ताकि एनीमिया का पता लगाया जा सके. एनीमिया के हल्के प्रभाव को पौष्टिक आहार से पूरा किया जा सकता है. जबकि गंभीर एनीमिया के लिए दवाईयों का इस्तेमाल होता है. गंभीर एनीमिया का तुरंत उपचार जरूरी है. अन्यथा जोखिम बहुत अधिक होता है. गंभीर एनीमिया थैलीसिमिया, सिकल सेल, आंत के संक्रमण व दूसरी अन्य बीमारियों की भी वजह बनता है. पालक, हरी सब्जी व मछली, दूध व अंडा आदि का नियमित सेवन शरीर में आयरन की मात्रा को बढ़ाता है. गर्भावस्था में बहुत अधिक चाय व कॉफी के सेवन से बचना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को अच्छी नींद लेनी चाहिए. गुड़ और चना का सेवन काफी लाभप्रद होता है. इसके साथ चुकंदर, सूखे मेवे व मौसमी फल जरूर लें.
आयरन की 180 तथा 180 कैल्सियम जरूर लेनी चाहिए:
डॉ. मिश्रा ने बताया जिन महिलाओं में खून की कमी हो, उन प्रेग्नेंट महिलाओं को बच्चे को जन्म देने से पहले 180 कैल्शियम की तथा 180 आयरन की गोलियां लेनी चाहिए और 180 आयरन की गोली जन्म देने के बाद डॉक्टर की सलाह से लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को चार प्रसव पूर्व जांच एवं टिटनेस का टीका सुरक्षित प्रसव के लिए जरूरी होता है।
ये लक्षण दिखें तो हो जाएँ सर्तक:
• थकान व कमजोरी का एहसास
• सांस फूलना
• ह्रदय धड़कन तेज होना
• सिरदर्द व चिड़चिड़ापन
• होंठ का सूखना व फीकापन
• भूख कम होना
• पैरों में दर्द व ऐंठन
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