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देश के सभी आवामो का पेट भरने वाली किसान आज सरकार के गलत नीतियों के कारण लाचार है:-राजीव चौधरी

किसानों को कोरोना काल में 10 हजार प्रति माह भत्ता दे सरकार:-किसान सभा
चल रहे ऐतिहासिक किसान आन्दोलन के 6 माह पूरे होने पर धरना
देश के सभी आवामो का पेट भरने वाली किसान आज सरकार के गलत नीतियों के कारण लाचार है:-राजीव चौधरी

दरभंगा:-26 मई 2021 दिल्ली बोर्डर पर चल रहे किसान आन्दोलन के 6 महीने पूरे होने पर और सरकार के किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रव्यापी आवाह्न के तहत आज दिन के 11 बजे से 2 बजे तक अखिल भारतीय किसान सभा के कार्यकर्ताओं के द्वारा सीपीआई कार्यालय लालबाग में धरना कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसका नेतृत्व करते हुए किसान सभा के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार चौधरी ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण 52 किसान प्रतिदिन आत्महत्या कर रहे हैं। सरकार किसानों की मांगों को टालती ही जा रही है। 22 जनवरी के बाद सरकार ने किसानों से चर्चा बंद कर दी है। 475 से अधिक किसान शहीद हो गए लेकिन सरकार ने कोई मानवीयता नहीं दिखाई है। श्रमिकों ने लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 44 श्रम कानून हासिल किए थे उन्हें भी मोदी सरकार ने खत्म कर दिया है। सरकार साम्राज्यवाद की दलाली कर रही है। बॉर्डर पर जो भी किसान पंहुचा है वह कहा है कि हम और संघर्ष तेज करेंगे, लड़ेंगे और जीत कर ही लौटेंगे। इतना दृढ़ संकल्प जब किसी आंदोलन का हो तो उसे कोई पीछे नही हटा सकता। आज 73% पूंजी 1% लोगों के हाथ में केंद्रित हो गई है। छह माह के किसान आंदोलन के चलते ही प्रधानमंत्री ,अडानी, अंबानी और गोदी मीडिया के खिलाफ जबरदस्त जन आक्रोश बढ़ा है। सरकार किसानों को उपज का डेढ़ गुना दाम देने से पीछे हट रही है जबकि टीका कंपनी को जो डेढ़ सौ रूपये का है उसे मनमाना मुनाफा कमाने का मौका दे रही है। इससे स्पष्ट नजर आता है कि पहले पूंजीपतियों को पैसे कमाने की खुली छूट दो, बदले में पैसा वापस लो। मोदी सरकार का यही गुजरात मॉडल है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने सीना गर्व से ऊंचा कर दिया है। ब्रिटिश गुलामी के समय भी किसानों का इतना सम्मान और ताकत थी कि किसान अपनी बात मनवा सकते थे। अंग्रेजों ने 1937 में जमींदारों के पक्ष में विधानसभा में बिल लाया , उसे सहजानंद सरस्वती के नेतृत्व में वापस कराया गया था लेकिन स्वतंत्र भारत में छह माह में 475 से अधिक किसानों की शहादत के बाद भी सरकार कानून रद्द नहीं करने पर अड़ी हुई है। कृषि बीमा सरकारी हाथों में था उसे निजी हाथों में सौंप दिया गया। जिसके चलते किसानों को लाभ नहीं मिलता है बल्कि अरबों रुपए का प्रीमियम कारपोरेट के खजाने में जाता है।
देश कई विपरीत परिस्थितियों से गुजर रहा है लेकिन यह सरकार विपदा से निपटने की बजाय साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण बढ़ाने में ध्यान लगा रही है। अब यह सिर्फ किसान आंदोलन नहीं रहा, यह देश और संविधान को बचाने वाला जन आंदोलन बन गया है।
किसान आंदोलन, आंदोलन की पाठशाला की तरह चल रहा है। तमाम आरोपों के बावजूद आंदोलन अपनी जगह अडिग है। मोदी सरकार अपनी योजनाओं के विफल होने पर षड्यंत्र पूर्वक लोगों का ध्यान भटकाने का भरपूर प्रयास कर रही है। देश में इतनी मौतों के बाद मोदी को नैतिकता के आधार पर गद्दी छोड़ देना चाहिए। अंबेडकर, नेहरू ने जो संवैधानिक लोकतंत्र लाया था भाजपा उसे मानती नहीं है। वे देश में अमरीका की तरह राष्ट्रपति प्रणाली से शासन चला रहे है। ये लोग भगत सिंह और सुभाषचंद्र को नहीं मानते , गोलवलकर और सावरकर के साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के रास्ते पर चलते हैं । भाजपा ने सत्ता में आने के बाद सांप्रदायिक फासीवाद लागू किया। सरकार कोविड प्रोटोकाल की आड़ में आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। बाजार नहीं खुलने से किसानों की सब्जी, फल दूध खराब हो रहे है। असम में जमीन का टैक्स बढ़ा दिया गया है। माइक्रो फाइनेंस के नाम पर आम नागरिकों का शोषण हो रहा है।
वही धरनाा मे सीपीआई के जिला सचिव नारायण जी झा ने कहा की कोरोना काल में सभी किसानों को सरकार ₹10000 प्रतिमाह सहायता भत्ता भुगतान करें। अभी तक गेहूं सहित सभी किसी भी रवि फसल का पैक्स के द्वारा खरीदारी नहीं शुरू किया गया है। प्रदेश में कहीं-कहीं खरीदारी शुरू भी हुई है तो किसानों का भुगतान नहीं हो पाया है। सरकार अभिलंब एमएसपी के आधार पर सभी किसानों से उनका फसल क्रय करें और अभिलंब उसका भुगतान करें। वहीं उन्होंने कहा कि किसानों का सब्जी लॉकडाउन के कारण बाहर नहीं निकल पाता है। जिसके कारण किसानों का सब्जी उनके खेत में ही बर्बाद हो रहा है। सरकारी स्तर से इसे खरीद कर दूसरे जगह भेजने की भी व्यवस्था किया जाए।
धरना में महेन्द्र साह, रामनाथ पंजियार, दिलीप मिश्रा, गौतमकात चौधरी, शशिरंजन सिंह, चन्द्रमोहन चौधरी, राम बाबू कुमार यादव आदि उपस्थित थे।
द्वारा:- राजीव कुमार चौधरी
जिलाध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा, दरभंगा।

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