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कोविड काल में मारे गए लोगों की याद में श्रद्धांजलि सभा माले जिला कार्यालय में कैंडल जलाकर दी गई श्रद्धांजिल।

कोविड काल में मारे गए लोगों की याद में श्रद्धांजलि सभा

माले जिला कार्यालय में कैंडल जलाकर दी गई श्रद्धांजिल।

DN 24 LIVE अजित कुमार सिंह

दरभंगा देश भर के बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं आदि के साझे रूप से कोविड-19 और अन्य सन्दर्भों में मारे गए लोगों का शोक मनाने के अभियान के चल रहे अभियान के तहत रविवार को देर शाम भाकपा(माले) जिला कार्यालय में माले कार्यकर्ताओं ने कैंडल जलाकर कोविड काल में मारे गए तमाम लोगों को श्रद्धांजलि दी। विदित हो कि ‘अपनों की याद, हर मौत को गिनें – हर गम को बाँटें’ नाम से यह अभियान हर रविवार को आयोजित किया जाना है।
भाकपा-माले जिला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य सह मिथिलांचल प्रभारी धीरेन्द्र झा, जिला सचिव बैद्यनाथ यादव,राज्य कमिटी सदस्य अभिषेक कुमार, लक्ष्मी पासवान, नंद लाल ठाकुर, अबधेश सिंह, जंगी यादव, पप्पू पासवान,उमेश साह, सदीक भारती, देवेन्द्र कुमार,अशोक पासवान, शनिचरी देवी, आइसा जिला अध्यक्ष प्रिंस राज, माले नेता संतोष यादव, प्रो कल्याण भारती, विशनाथ पासवान, रंजीत राम, चंदन कुमार रजक, मोहम्मद शम्स तबरेज, रानी शर्मा सहित स्थानीय मुहल्ले के लोगों ने भी कैंडल जलाकर सभी मृतकों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

इस मौके पर धीरेन्द्र झा ने कहा कि जब सरकारों ने हाथ खींच लिए तब देश के नागरिकों ने एक दूसरे का हाथ थामकर कोविड-19 की चुनौतियों का सामना किया है। कोरोना वायरस, फंगस और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण हमारे हजारों लोग मारे गए कोविड पेशेंट के साथ-साथ बड़ी संख्या में डाॅक्टरों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भी मौत हुई है। बिहार में सबसे अधिक डाॅक्टरों की मौत हुई है। जिन लोगों की पहचान कोविड पेशेंट के रूप में हो गई, उससे बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनका कोविड जांच ही नहीं हुआ, लेकिन उनके तमाम लक्षण कोविड के ही थे और वे भी मौत के शिकार हुए। इन तमाम मौतों को सरकार को कोविड से हुई मौत की श्रेणी में गिनना चाहिए। हम इस अभियान को इसलिए चला रहे हैं कि आने वाले दिनों में ऐसा दर्द फिर से न झेलना पड़े क्योंकि हम जानते हैं कि कोविड की तीसरी लहर फिर से आने वाली है।

वही बैद्यनाथ यादव ने कहा कि जिन्हें कोविड के अलावा कोई जानलेवा बीमारी थी – उनके लिए अस्पतालों में जगह न होने से उनकी जान गई। जलाने, दफनाने की जगह कम पड़ गई। गरीबों ने अपने आंसुओं के साथ अपनों को नदी में बहा दिया या नदी किनारे कफन डाल विदा किया। पूरा देश इस साझे दर्द को आज भी झेल रहा है। माले नेता केडी यादव ने भी कैंडल जलाकर सभी मृतकों को श्रद्धांजलि दी। भाकपा-माले विधायक दल कार्यालय में भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया।
अभिषेक कुमार ने कहा कि सरकारें तो इन मौतों को गिनना, मानना नहीं चाहतीं. दुनिया न गिन पाए इसके लिए वे नदी किनारे दफनाई गई लाशों से कफन तक हटवा दे रही हैं. मौतों की गिनती न करके, सरकारें हमारे प्यारे अपनों को भुला देना चाहती हैं. पर हम अपनों को भुला नहीं सकते. इनमें से हरेक का नाम है, जिसे याद रखना जरूरी है, उनके लिए अपने प्यार को जिंदा रखना जरूरी है।

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