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बच्चों को टीकाकरण के बाद दर्द या सूजन की हो समस्या, तो अपनाएं ये उपाय

बच्चों को टीकाकरण के बाद दर्द या सूजन की हो समस्या, तो अपनाएं ये उपाय

चिकित्सकीय सलाह के लिए निकट के स्वास्थ्य केंद्र से करें सम्पर्क

दरभंगा जन्म के बाद पहला साल नवजात शिशु के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान बच्चे का टीकाकरण कराना भी बेहद आवश्यक है। नए माता-पिता के लिए यह चीज बहुत परेशान करने वाली होती है कि टीकाकरण के बाद दर्द से रोते हुए बच्चे को शांत कैसे कराएं और उसका ख्याल कैसे रखें। जन्म के बाद पहले साल में नवजात शिशु को कई इंजेक्शन लगते हैं। ऐसे में टीकाकरण के बाद दर्द और सूजन होना भी सामान्य है। यह स्थिति माता-पिता और शिशु दोनों के लिए कष्टदायक हो सकती है। लेकिन इस दौरान अगर बच्चे को अच्छे से शांत कराया जाए और उसका ध्यान रखा जाए, तो दर्द कुछ हद तक कम हो सकता है। टीकाकरण के बाद दर्द और सूजन को कम करने के लिए क्या किया जाए। इस क्रम में कोई समस्या होने पर निकट के स्वास्थ्य केंद्र में सम्पर्क कर सकते है।

बच्चे को टीके लगाना आवश्यक है
डीएमसीएच के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ ओम प्रकाश ने कहा जन्म के बाद शिशु को कई टीके लगते हैं, जिसकी पूरी जानकारी शिशु के जन्म के बाद मिल जाती हैं। शिशु के टीकाकरण के बाद दर्द और सूजन से बचाने के लिए सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि शिशु को कौन से टीके लगाएं। यह टीके बच्चों को कई गंभीर या घातक बीमारियों से बचाते हैं, इन जरूरी टीकों में से कुछ इस प्रकार हैं: चिकनपॉक्स, डिफ्थीरिया,हीमोफिलिया इन्फ्लुएंजा टाइप बी, हेपेटाइटिस A, हेपेटाइटिस B, ह्यूमन पैपिलोमा वायरस, खसरा, मेनिंगोकोकल, न्यूमोकोकल कोंजूगेट, पोलियो, रोटावायरस, रूबेला, मौसमी इन्फ्लूएंजा (फ्लू), चेचक, टिटनेस, ट्यूबरक्लोसिस, व्हूपिंग खांसी (काली खांसी)|

टीकाकरण के बाद दर्द और सूजन को दूर करने के उपाय
बच्चे को अपने पास ही रखें
वरीय चिकित्सक ने कहा अगर माता या पिता बच्चे को टीकाकरण के दौरान या बाद में अपने पास रखते हैं, तो इससे बच्चे का ध्यान भटकाने में आसानी होती है। जिससे इंजेक्शन के दौरान बच्चा शांत रहता है। इस बात का ध्यान रखें कि इंजेक्शन के दौरान बच्चे को इस तरह से पकड़ें कि जिस जगह पर इंजेक्शन लगना है वो इस तरह से हो कि डॉक्टर आसानी से इंजेक्शन लगा सकें । आपका उसके पास रहना शिशु के आधे दर्द को दूर कर सकता है।

बच्चे को थोड़ा समय दें
टीकाकरण के बाद दर्द की वजह से रोने के कारण शिशु बहुत अधिक चिड़चिड़ा और थका हुआ हो सकता है। ऐसे में बच्चे को शांत और आरामदायक जगह पर ले जाएं। उसे ढीले और आरामदायक कपड़ें पहनाएं, ताकि वो ठीक से सो सके और अच्छा महसूस करे।

मां अपना दूध पिलाए
मां अगर शिशु को अपना दूध पिलाए, तो इससे उसे टीकाकरण के बाद दर्द से राहत मिल सकती है। ऐसा करने से उनका ध्यान भी भटकेगा। हालांकि डॉक्टर इंजेक्शन लगने के कुछ समय तक उसे कुछ न खिलाने या पिलाने की सलाह देते हैं। ऐसे में डॉक्टर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार निश्चित समय के बाद आप बच्चे को दूध पिला सकती हैं।

कुछ मीठा दें

कुछ अध्ययन में यह बात भी सबित हुई है कि कुछ मीठा जैसे चीनी या चीनी का घोल टीकाकरण के बाद दर्द को कम करने में प्रभावी है। टीकाकरण से पहले अपने बच्चे को थोड़ा सा चीनी का घोल देने की कोशिश करें। मीठे घोल में पेसिफायर को डाल कर आप उसे चूसने को दे सकते हैं। इससे भी बच्चे को अच्छा लगेगा।

टीकाकरण के बाद सूजन के लिए बर्फ लगाएं
डॉ ओम ने कहा बच्चे को टीकाकरण के बाद दर्द और सूजन से छुटकारा मिल सके, इसके लिए टीका जिस जगह पर लगा है, वहां बर्फ या कूल पैक लगाएं। इससे त्वचा सुन्न हो जाएगी और बच्चे को इंजेक्शन की जगह होने वाले दर्द से राहत मिलेगी। इसके साथ ही सूजन भी कम होगी। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि सर्दी के मौसम में बच्चे की त्वचा पर बर्फ न लगाएं। ऐसा करने पर बच्चे सर्दी का शिकार हो सकते हैं। इसलिए ऐसा करने से पहले डॉक्टर से पूछ लें।

अधिक तरल पदार्थ दें
बच्चे को टीकाकरण से पहले और बाद में अपना दूध अवश्य पिलाएं। अगर आपका शिशु अभी बहुत छोटा है और आप केवल अपना दूध ही दे रही हैं तो यह बेहद आवश्यक है। अगर आपने उसे ठोस आहार खिलाना भी शुरू कर दिया है, तो शुरू के कुछ घंटे बच्चा कुछ भी नहीं खाना चाहेगा। लेकिन आप उसे प्यूरी, सूप या अन्य तरल पदार्थ दे सकते हैं।
दवाइयां देने से पहले चिकित्सक से ले सलाह
शिशु के प्रभावित स्थान पर ऐसी दवाइयां भी लगा सकते हैं, जो दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती हैं। यह दवाइयां जेल और स्प्रे के रूप में बाजार में उपलब्ध हैं। लेकिन, इन्हें देने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही डॉक्टर भी बच्चे के बुखार और दर्द को कम करने के लिए कुछ दवाइयों जैसे आइबूप्रोफेन देने के लिए कह सकते हैं। यह दवाई बच्चे की उम्र, वजन और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के अनुसार दी जाती हैं। इन्हें भी डॉक्टर के कहने पर ही बच्चे को दें।

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