बदलते मौसम में बच्चों को रखें सेहतमंद
-सर्दी के मौसम में खास देखभाल ज़रूरी
-सर्दी में बच्चों का नंगे पांव चलना ठीक नहीं- डॉ ओम प्रकाश
दरभंगा बच्चों को यह सिखाएं कि अगर खेलते वक्त वे भींग जाएं तो तुरंत आकर घर के बड़ों को बताएं। वैसे भी समय-समय पर बच्चों के कपड़ों को जांचते रहें कि कहीं वे भींग तो नहीं गए हैं। कई बार देखने में आता है कि कपड़े भींग जाने के बाद भी बच्चे घंटों खेलते रहते हैं। मौसम देखते-देखते पूरी तरह बदल गया है। सर्दी ने अपने आने की दस्तक दे दी है। मौसम विभाग लगातार पारा गिरने की सूचना दे रहा है। देश में कई जगहों पर जब-तब कम-ज्यादा बारिश भी हो रही है, इसके आसार बताए जा रहे हैं। ऐसे में जिनके स्वास्थ्य को लेकर सर्वाधिक चिंता करने की जरूरत है, वे हैं बच्चे। बच्चों की सेहत की देखभाल की चिंता उनके अभिभावकों को ही करनी पड़ती है। यह अच्छी बात भी है। ऐसे मौसम में थोड़ी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है।
संभाल और सावधानी-
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ ओम प्रकाश ने बताया कि उनका मन जितना चंचल होता है, उनकी शरारतें भी उतनी ही होती हैं। अगर बच्चों पर ध्यान न रखा जाए तो उनकी ये शरारतें उनके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी कई मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। मसलन, आम दिनों में बच्चे नंगे पैर घर में इधर-उधर दौड़ते रहते हैं। मगर ठंड में तो ध्यान रखना पड़ेगा कि बच्चे नंगे पैर जमीन पर न दौड़ें। इस तरह का एहतियात इसलिए जरूरी है क्योंकि ठंड का मौसम बहुत सी बीमारियों को निमंत्रण देता है। हर साल जाड़े में लाखों मां-बाप बच्चों की बीमारियों को लेकर परेशान हो जाते हैं। नतीजतन शिशु रोग विशेषज्ञों के पास बच्चों और अभिभावकों का मेला सा लग जाता है। ऐसे में अक्लमंदी इसी बात में है कि बच्चों के साथ पूरी सावधानी बरती जाए ताकि वे बीमार न पड़ें।
खांसी-बुखार की सम्भावना-
सर्दी के मौसम में पानी से भीगने से बच्चों को मौसमी बुखार का खतरा तो रहता ही है, साथ ही न्यूमोनिया का भी खतरा बना रहता है। न्यूमोनिया फेफड़ों पर असर करने वाला एक ऐसा संक्रमण है जिसकी वजह से फेफड़ों में सूजन होती है और उसमें एक प्रकार का गीलापन आ जाता है। जिससे सांस की नली अवरुद्ध हो जाती और बच्चों को खांसी आने लगती है। यह बीमारी सर्दी-जुकाम का बिगड़ा हुआ रूप है जो आगे चल कर जानलेवा भी साबित हो सकती है। यह बीमारी जाड़े के मौसम में अधिकतर होती है।
पूरे कपड़े पहनाएं-
ठंड के दिनों में बच्चों को आवश्यकतानुसार परतों में कपड़े पहनाएं। इस बात का ध्यान रखें कि आप के बच्चे का सिर, गला और हाथ पूरी तरह ढके हुए हों। अलबत्ता बच्चों के कपड़े के चुनाव में हमें अतिरिक्त रूप से सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ठंड के दिनों में बच्चों को ‘स्किन रैशेज’ का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में बच्चों के कपड़ों का सही तरीके से चुनाव नहीं किया गया तो कुछ कपड़े बच्चों के लिए तकलीफदेह साबित हो सकते हैं।
भींगे कपडे तुरन्त बदलें-
बच्चों को यह सिखाएं कि अगर खेलते वक्त वे भींग जाएं तो तुरंत आकर घर के बड़ों को बताएं। वैसे भी समय-समय पर बच्चों के कपड़ों को जांचते रहें कि कहीं वे भींग तो नहीं गए हैं। कई बार देखने में आता है कि कपड़े भींग जाने के बाद भी बच्चे घंटों खेलते रहते हैं। गौरतलब है कि बड़ों की तुलना में बच्चों का शरीर तापमान को नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होता है। इसीलिए ध्यान रखना पड़ेगा कि बच्चे भींगे नहीं। इस मामले में थोड़ी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है और बच्चे बीमार पड़ सकते हैं।
Darbhanga News24 – दरभंगा न्यूज24 Online News Portal