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जानिए, कैसे पुरानी सड़क के मैटीरियल से ही चकाचक हो सकती है राज्य और देश की सड़कें:डा सुनील » अजित कुमार सिंह छोटू की रिपोर्ट

जानिए, कैसे पुरानी सड़क के मैटीरियल से ही चकाचक हो सकती है राज्य और देश की सड़कें:डा सुनील

सड़क बनाने में रिक्लेम एसफोर्टिंग पेवमेंट एक ऐसी तकनीक है, जिससे सड़क की लागत आधी हो जाएगी। पुरानी और खस्ताहाल सड़कों को उखाड़कर उसी मैटीरियल से उन्हें चकाचक कर दिया जाएगा। इस तकनीक के जरिए आरएपी मशीन में पुराने मैटीरियल को डालकर उसे सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने लायक बनाया जाता है।ये बाते पर्यावरण के अनुकूल तकनीक एवं कौस्ट इफेक्टिव तकनीक को समाज के अन्तिम पंक्ति के लोगो तक पहुंचाने को कटिबद्ध इन्जीनियर्स फेडरेशन(पूर्वी) के उपाध्यक्ष एवं बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के पूर्व महासचिव डा सुनील कुमार चौधरी ने कही ।उन्होने बताया कि इसके व्यापक इस्तेमाल के लिए शासन स्तर पर भी नीति बनाई जाने की जरूरत है। बता दें कि वर्तमान में विभाग को सिंगल लेन सड़क की लागत 80 से 82 लाख रुपये प्रति किमी पड़ती है। मगर सड़कों को खोद कर उनके मैटीरियल से सड़क बनाए जाने से ये लागत घटकर 28 से 30 लाख रुपये हो जाएगी। कई राज्यों में इस तकनीक से सड़कों का निर्माण हो रहा है। डा चौधरी ने आगे बताया कि पुरानी सड़क को उखाड़कर उसी सामग्री से सड़क बनाने से सिर्फ लागत ही कम नहीं होगी। दरअसल, इससे सड़कों के दोनों किनारों पर स्थित प्रतिष्ठानों और आवासों को भी लाभ मिलेगा। बार-बार डामरीकरण से सड़कों का तल किनारों के तल से ऊपर उठ जाता है जिससे बरसात के दिनों मे आसपास के घरों और प्रतिष्ठानों में पानी भर जाता है। सड़कों को खोदकर उन्हीं के मैटीरियल से जब दोबारा बनाया जाएगा तो उनका तल समान रहेगा। व्यापक इस्तेमाल से पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा।

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