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महिलाओं का बंध्याकरण में ‘मिनी लैप तकनीक’ का दिया जा रहा प्रशिक्षण

महिलाओं का बंध्याकरण में ‘मिनी लैप तकनीक’ का दिया जा रहा प्रशिक्षण

•आपरेशन के 24 घंटे बाद ही मरीज को छुट्टी दे दी जाती है छुट्टी।
•परंपरागत आपरेशन की तुलना में यह तकनीक अधिक सरल और सुरक्षित है।

मधुबनी महिलाओं का बंध्याकरण में स्वास्थ विभाग द्वारा ‘मिनी लैप तकनीक’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसको लेकर सदर अस्पताल कैंपस में केयर इंडिया के डॉक्टर संगीता के द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है प्रशिक्षण 16 फरवरी से शुरू होकर 27 फरवरी तक दिया जाएगा. आयोजित प्रशिक्षण में डॉक्टर संगीता ने बताया यह बंध्याकरण की तकनीक है बताया कि इस तकनीक से बंध्याकरण आपरेशन करना बहुत ही आसान हो गया है। परंपरागत आपरेशन में मरीज को कई घंटों तक बेहोश रखने के लिए ईथर का डोज दिया जाता था वहीं आपरेशन के लिए बड़ा चीरा भी लगाना पड़ता था। इस पद्धति से ऑपरेशन के बाद महिला मरीजों को चौबीस घंटे के बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है। वहीं पुरुष नसबंदी के आधा घंटा बाद डिस्चार्ज कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि मिनी लैप का अर्थ ही है मामूली चीरा (एक से डेढ़ इंच ) नाभी के निकट चीरा लगाकर आसानी से बंध्याकरण आपरेशन किये जाते हैं। महिला 48 घंटे के बाद हल्के-फुल्के कार्य कर सकती है तथा सातवें दिन के बाद सामान्य तरीके से कार्य कर सकती है। उन्होंने बताया कि इस आपरेशन में जोखिम जैसी कोई बात नहीं है और न ही लंबी बेहोशी की नौबत। आपरेशन के 24 घंटे बाद ही मरीज को घर जाने की अनुमति दे दी जाती हालांकि आपरेशन के बाद मरीजों को चिकित्सक के परामर्श के अनुसार सेहत का खास ख्याल रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता में इस तकनीक की अहम भूमिका निभा रही है।

सभी पीएचसी में मिलती है सुविधा:
केयर इंडिया के परिवार नियोजन समन्वयक सुरभि ने बताया यह सुविधा सारे पीएचसी में उपलब्ध है अगर किसी पीएससी में सर्जन उपलब्ध नहीं होते हैं तो वैसे स्थिति में केयर इंडिया द्वारा वैसे पीएचसी विजिटर प्रोवाइडर (सर्जन) उपलब्ध कराकर बंध्याकरण कराया जाता है व एमबीबीएस डॉक्टर एवं स्टाफ नर्स को 12 दिनों का प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित किया जाता है। स्वास्थ विभाग का प्रयास है कि प्रत्येक फैसिलिटी में एक इन हाउस सर्जन उपलब्ध हो जिससे किसी भी वक्त महिला का बंध्याकरण किया जा सके।

गर्भ-निरोधक उपाय उपलब्ध है अस्पतालों में:
सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने बताया स्वास्थ विभाग के पास परिवार नियोजन के स्थायी एवं अस्थायी साधनों उपलब्ध हैं स्थायी साधनों में मिनीलैप एवं महिला नसबंदी की सुविधा उपलब्ध है. बच्चों में अंतराल एवं अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कॉपर टी, गर्भ-निरोधक गोली(माला-एम एवं माला-एन), कंडोम एवं इमरजेंसी कंट्रासेपटीव पिल्स उपलब्ध है.

इन्हें दिया गया प्रशिक्षण:

मिनी लैप का प्रशिक्षण डॉक्टर निरंजन कुमार जायसवाल (चिकित्सा पदाधिकारी) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजनगर, डॉ सुमंत कुमार (चिकित्सा पदाधिकारी) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बासोपट्टी, लक्ष्मी कुमारी स्टाफ नर्स /एएनएम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजनगर, प्रियंका कुमारी स्टाफ नर्स एएनएम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बासोपट्टी को दिया जा रहा है।

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