कवि रवींद्र के निधन पर प्रो दिलीप ने जताया शोक

मैथिली भाषा साहित्य के शीर्षस्थ गीतकार रवींद्र नाथ ठाकुर के निधन पर पूर्व विधान पार्षद सह सीएम साइंस कालेज के प्रधानाचार्य प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने गहरा शोक जताया. उन्होंने कहा कि मैथिली के लोकप्रिय गीत ‘के छथि मैथिल, की थिक मिथिला हम कहैत छी ओरे सँ…’ के रचयिता रवींद्र नाथ ठाकुर मिथिला के लोगों के हृदय में ही नहीं, जुबान में बसते हैं। उनकी मैथिली रचनाओं को लोग आज भी सुनकर भाव-विभोर हो उठते हैं। वे आधुनिक मैथिली भाषा-साहित्य के संस्थापकों में से एक थे।
उन्होंने कहा कि वे एक ऐसे रस-सिद्ध कवि थे, जिन्होंने मातृभाषा की सेवा की छांव तले जीवन पर्यंत मैथिली साहित्याकाश को अनवरत ऊंचाई प्रदान की। एक गीतकार के रूप में अपनी लेखनी से साहित्यिक एवं सांस्कृतिक क्रांति का बिगुल फूंकने वाले रचनाकार के रूप में वे न सिर्फ सदा अमर रहेंगे बल्कि अपनी रचनाओं के बलबूते मिथिला के जन-जन के दिलों में अपनी खास जगह बनाने वाले रचनाकार के रूप में वे हमेशा जीवंत बने रहेंगे।
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