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समस्तीपुर ,  जिले में कालाजार उन्मूलन को लेकर 181 से अधिक रूरल हेल्थ प्रैक्टिशनर को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया।

कालाजार उन्मूलन को लेकर रूरल हेल्थ प्रैक्टिशनर का एक दिवसीय प्रशिक्षण .
• हर पीएचसी पर मुफ्त जांच सुविधा उपलब्ध
• सरकार द्वारा रोगी को मिलती है आर्थिक सहायता

समस्तीपुर ,  जिले में कालाजार उन्मूलन को लेकर 181 से अधिक रूरल हेल्थ प्रैक्टिशनर को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण मोरवा , सदर, विभूतिपुर एवं रोसरा प्रखंडों में आयोजित किया गया। , 17 दिसंबर को सरायरंजन, पटोरी, वारिसनगर, हसनपुर के रूरल हेल्थ प्रैक्टिशनर का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा । मौके पर भीबीडीसीओ डॉ विजय कुमार ने ग्रामीण चिकित्सकों को संबोधित करते हुए बताया कि कालाजार बीमारी क्या है ,इससे बचाव एवं लक्षण के बारे में जानकारी दी। इसके साथ साथ उन्होंने कालाजार उन्मूलन में रूरल हेल्थ प्रैक्टिशनर की भूमिका के बारे में अवगत करवाया। उन्होंने कालाजार से बचने हेतु मच्छरदानी लगाकर सोने, घरों के आसपास साफ-सफाई रखने और नालियों को साफ रखने आदि के लिए जागरूक करने का भी निर्देश दिया । ताकि, लोगों को वेक्टर जनित रोग जैसे कालाजार, मलेरिया, डेंगू से बचाव के लिए प्रेरित किया जा सके। उन्होंने बताया कि जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कालाजार मरीजों की जांच की व्यवस्था उपलब्ध है। . जहां मरीज की निःशुल्क जांच की जाती है ।

कालाजार के कारण :
प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने बताया कालाजार मादा फाइबोटोमस अर्जेंटिपस(बालू मक्खी) के काटने के कारण होता है, जो कि लीशमैनिया परजीवी का वेक्टर (या ट्रांसमीटर) है। किसी जानवर या मनुष्य को काट कर हटने के बाद भी अगर वह उस जानवर या मानव के खून से युक्त है तो अगला व्यक्ति जिसे वह काटेगा वह संक्रमित हो जायेगा। इस प्रारंभिक संक्रमण के बाद के महीनों में यह बीमारी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है, जिसे आंत में लिशमानियासिस या कालाजार कहा जाता है।

कालाजार के लक्षण :
– लगातार रुक-रुक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।
– वजन में लगातार कमी होना।
– दुर्बलता।
– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।
– व्यापक त्वचा घाव जो कुष्ठ रोग जैसा दिखता है।
– प्लीहा में नुकसान होता है।

सरकार द्वारा रोगी को मिलती है आर्थिक सहायता :

भीडीसीओ जितेंद्र कुमार ने बताया कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में पैसे भी दिए जाते हैं। बीमार व्यक्ति को 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है। वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार (पीकेडीएल) में 4000 रुपये की राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है।

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