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धन्य है मिथिला की धरती जहां मांँ मैथिली ने अवतार लिया जानकी नवमी के अवसर ‘माँ जानकी पूजनोत्सव सह मैथिली दिवस समारोह’ आयोजित

धन्य है मिथिला की धरती जहां मांँ मैथिली ने अवतार लिया

जानकी नवमी के अवसर ‘माँ जानकी पूजनोत्सव सह मैथिली दिवस समारोह’ आयोजित

धरती पुत्री माता सीता के प्राकट्य दिवस जानकी नवमी के उपलक्ष्य में शनिवार को विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में ‘मांँ जानकी पूजनोत्सव सह मैथिली दिवस समारोह आयोजित किया गया। संस्थान के प्रधान कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त रूप से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शशि नाथ झा, सांसद डा गोपाल जी ठाकुर, बेनीपुर के विधायक प्रो विनय कुमार चौधरी, केवटी के विधायक डा मुरारी मोहन झा, पूर्व विधान पार्षद द्वय प्रो विनोद कुमार चौधरी एवं प्रो दिलीप कुमार चौधरी, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पं उपेंद्र झा, मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा, विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू , कार्यकारी अध्यक्ष डा बुचरू पासवान व सखी बहिनपा समूह की संस्थापिका आरती झा ने मिलकर किया। मौके पर बतौर मुख्य अतिथि अपने संबोधन में सांसद डा गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि माँ जानकी मिथिला की बेटी हैं, इस नाते उनका स्वागत और जानकी नवमी मनाना हम सभी मिथिलावासियों का दायित्व और कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि धन्य है मिथिला की धरती जहां मांँ मैथिली ने अवतार लिया। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने में मां सीता की भूमिका अहम है।
बेनीपुर के विधायक प्रो विनय कुमार चौधरी ने कहा कि माँ जानकी का जन्म मिथिला में होना हम सभी का सौभाग्य है। उन्होंने कहा कि मिथिला की भाषा मैथिली यदि समाज का आईना है तो इसकी धरोहर लिपि मिथिलाक्षर माँ जानकी का गहना है। उन्होंने मिथिलाक्षर के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए इसे दैनिक प्रयोग में लाने पर बल दिया। साथ ही ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में दूरस्थ शिक्षा को फिर से बहाल करने के लिए विभिन्न स्तरों पर समेकित प्रयास करने का आह्वान किया। केवटी के विधायक डा मुरारी मोहन झा ने कहा कि दशरथ पुत्र भगवान राम कभी मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं कहलाते यदि मां जानकी का उन्हें साथ नहीं मिला होता।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि माँ जानकी की मातृभूमि मिथिला विद्वानों की धरती है। यहां की वाणी काफी मधुर है और यहाँ के लोग उससे भी अधिक धैर्यवान हैं। उन्होंने माँ जानकी को त्याग व समर्पण का बेहतर उदाहरण बताते कहा कि एक पत्नी, माँ, बेटी, बहू व भाभी की जो आदर्श छवि उन्होंने कायम की, वह आज भी मिथिला की संस्कृति और संस्कार में कायम है। यह हमारे लिए गौरव की बात है। मां जानकी को त्याग व समर्पण की देवी बताते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शशि नाथ झा ने कहा कि उनके जैसा उदात्त चरित्र संपूर्ण विश्व के इतिहास में मिलना असंभव है। उन्होंने मां जानकी को मैथिल संस्कृति की धरोहर बताते हुए कहा कि जानकी हमारी माता है जिनके प्रति सम्मान का भाव सिर्फ मिथिला के लोगों में ही नहीं, बाहर के लोगों के हृदय में भी धड़कता है।
पूर्व विधान पार्षद प्रो विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि सीता और राम सदियों से भारतीय जनमानस के लिए आराध्य रहे हैं। उन्होंने जानकी नवमी को अगले साल से राजकीय पर्व के रूप मनाये जाने हेतु प्रयास करने की बात रखी। पूर्व विधान पार्षद प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात है कि मां जानकी का अवतरण मिथिला में हुआ और भगवान राम को मर्यादा पुरूषोत्तम बनाने में उनकी अहम भूमिका को नकारा नहीं जा सकता है। मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल मैथिली को बिहार में अब तक राजकाज की भाषा का दर्जा नहीं दिए जाने के साथ ही मैथिली भाषा की पूर्व से गठित स्वतंत्र अकादमी को अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के साथ विघटित किए जाने पर सवाल उठाया।
आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि मां जानकी मिथिला के लोगों के रग-रग में बसी हुई है। लेकिन यह सबसे बड़ी त्रासदी है कि मिथिला के लोगों को आज भी मां जानकी की तरह कदम कदम पर अग्निपरीक्षा के दौर से गुजरना पड़ता है। संस्थान की ओर से उन्होंने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति का नाम पद्म पुरस्कार के लिए एवं मिथिला के सपूत ललित नारायण मिश्र व पूर्व मुख्यमंत्री गुदड़ी के लाल कर्पूरी ठाकुर का नाम भारत रत्न सम्मान के लिए नामित किए जाने का प्रस्ताव रखा। मौके पर मिथिला के शैक्षणिक उन्नयन में उत्कृष्ट योगदान के लिए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह को मिथिला गौरव सम्मानोपाधि एवं नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट अवदान के लिए सखी बहिनपा समूह की संस्थापिका आरती झा को जानकी सम्मान से सम्मानित किया गया।
मैथिली दिवस समारोह के संयोजक प्रवीण कुमार झा एवं संयोजिका डा सुषमा झा के संयुक्त संचालन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में पं कुंज बिहारी मिश्र, रामबाबू झा, दुखी राम रसिया, नीरज कुमार झा, अनुपमा मिश्र आदि ने गीत-संगीत के स्वर लहरियों की छटा जमकर बिखेरी।वहीं तबला पर हीरा कुमार झा, इलेक्ट्रॉनिक कैसियो पर नीरज झा, पैड पर मुरारी आदि ने उंगली के जादू का जमकर प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में सखी बहिनपा समूह द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम दर्शकों के विशेष आकर्षण के केन्द्र में रहा।
इससे पहले प्रातः कालीन बेला में पूजा पंडाल में माँ जानकी की प्रतिमा का प्राण प्रतिष्ठा कर शास्त्रीय विधि से पूजा-अर्चना की गई। इसके यजमान डा अमलेन्दु शेखर पाठक बने। पुरोहित के रूप में पं दधीचि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। पूजा अर्चना के दौरान गंधर्व कुमार झा ने सस्वर वेद ध्वनि की जबकि वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने स्वरचित जानकी चालीसा का पाठ किया। कार्यक्रम में विनोद कुमार झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, दुर्गा नंद झा, प्रो विजय कांत झा, , डा गणेश कांत झा, डा उदय कांत मिश्र, चौधरी फूर कुमार राय, हरिकिशोर चौधरी, प्रजेश कुमार झा, डा रमेश झा, स्वर्णिम किरण झा, डा उषा चौधरी, रोहिणी झा, सुधा झा, आशीष चौधरी, पुरूषोत्तम वत्स, नवल किशोर झा, बालेंदु झा आदि उपस्थित थे.

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