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मैथिली ठाकुर की प्रस्तुति ‘ब्राह्मण बाबू यौ…’ को दर्शकों ने विशेष रूप से पसंद किया। सात सुरों सजी महफिल में आनंद का गोता लगाते रहे श्रोता

सात सुरों सजी महफिल में आनंद का गोता लगाते रहे श्रोता

सोमवार की शाम शुरू हुआ कार्यक्रम मंगलवार की देर सुबह तक जारी रहा

विद्यापति सेवा संस्थान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय मिथिला विभूति पर्व का 51वां समारोह चौथे दिन मंगलवार को सुबह नौ बजे संपन्न हुआ। मैथिली मंच के नवोदित एवं स्थापित कलाकारों की प्रस्तुति ने लगातार उन्हें बांधे रखा। यही कारण रहा कि सोमवार की शाम शुरू हुई सांस्कृतिक संध्या अगले दिन देर सुबह तक जारी रही। इस दौरान ना श्रोता और ना ही कलाकार थके। सृष्टि फाउंडेशन एवं नटराज डांस एकेडमी के कलाकारों द्वारा मिथिला के संस्कृति , संस्कार और लोकपर्वों पर आधारित नृत्य और डा ममता ठाकुर के गाये मंगलाचरण से शुरू हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम के गायकी की पारी की शुरुआत मैथिली मंच की चिरपरिचित गायिका डा सुषमा झा ने विद्यापति गीत के गायन से किया। पारंपरिक लोक धुन पर जैसे ही उन्होंने विद्यापति के गीत पर अपनी स्वर लहरी छेड़ी पूरा का पूरा दर्शक दीर्घा विभोर हो गया।

सोनी चौधरी की गायिकी में पारंपारिकता की चासनी में डुबोए प्रेम व विरह के भावों ने जहां दर्शकों को आत्म विभोर किया। वहीं मैथिल युवा दिलों की धड़कन माधव राय, खुशबू मिश्रा, ज्योति मिश्रा, आलोक भारती, ऋषभ भारद्वाज आदि द्वारा प्रस्तुत गंभीर किंतु लहकदार गीतों ने दर्शकों की तालियां बटोरने में कामयाबी हासिल की।

मैथिली ठाकुर की प्रस्तुति ‘ब्राह्मण बाबू यौ…’ को दर्शकों ने विशेष रूप से पसंद किया। प्रसिद्ध लोक गायिका पूनम मिश्रा व जुली झा दर्शकों के विशेष आकर्षण के केंद्र में रही। सहरसा से आए नवल-नंद की प्रस्तुतियों को भी लोगों ने खूब पसंद किया। रचना झा, आलोक भारती, खुशबू मिश्रा एवं जुली झा की एकल प्रस्तुतियों के बीच कुंज बिहारी मिश्र की सामूहिक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। दुखीराम रसिया की महिला व पुरुष आवाज में एक साथ की गई गायकी ने दर्शकों के बीच जहां रोमांच पैदा किया वहीं रामबाबू झा, केदारनाथ कुमर, अमित कुमार, प्रतिभा कुमारी, नीरज कुमार झा, दीपक कुमार झा आदि की प्रस्तुतियों को भी दर्शकों ने काफी सराहा।

सुबह की बेला में आकाशवाणी के गायिका कंचन एवं कुंज बिहारी मिश्र के साथ माधव राय, अरविंद कुमार सिंह, वर्षा झा, नीरज कुमार झा की प्रस्तुतियां महफिल में जान फूंकने वाले साबित हुए। फरमाइशी गीतों के अंतिम चरण में कुंज बिहारी मिश्र, माधव राय, रामबाबू झा व जुली झा की गायकी का जादू एक बार फिर से दर्शकों के सिर चढ़कर बोला और वे अंत तक डटे रहे। कंचन के गाये सोहर गीत एवं माधव राय के गाए समदाउन के बाद पराती धुन में गोसाउनि गीत जय जय भैरवि की सामूहिक प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम स्थगन की घोषणा की गई।

संगत कलाकारों ने भी खूब जमाया रंग

 

तीन दिवसीय मिथिला विभूति पर्व समारोह के दौरान गायकों के साथ साथ संगत कलाकारों ने भी अपनी उंगली के जादू का जमकर जलवा बिखेरा। तबला पर पं रमेश मल्लिक, पं सुधीर कुमार मिश्र, हीरा कुमार झा, सुधांशु एवं कौशिक ने अपनी प्रतिभा का जमकर प्रदर्शन किया। वहीं, नाल पर गोपाल, कमलेश एवं मुरारी ने अपनी उंगली का जादू खूब दिखाया। कैसियो पर इंद्रकांत झा, पप्पू मिश्रा, राम बहादुर यादव आदि दर्शकों के विशेष आकर्षण का केंद्र अंत तक बने रहे। जबकि बैंजो पर शिवकुमार एक बार फिर से दर्शकों का मन मोहने में कामयाब रहे। पैड पर केशव, बिंदु एवं अभिजीत की प्रस्तुतियों की लोगों ने खूब सराहना की।

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